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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर प्रदेश के अगले पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति को लेकर शासन स्तर पर हलचल तेज हो गई है। योगी सरकार ने नए डीजीपी के चयन की प्रक्रिया शुरू करते हुए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को पात्र आईपीएस अधिकारियों का एक विस्तृत पैनल भेज दिया है। सूत्रों के अनुसार, इस सूची में तीन दर्जन से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल किए गए हैं, जिनमें से तीन नामों पर अंतिम मुहर लगने के बाद प्रदेश को नया 'पुलिस कप्तान' मिलेगा। वर्तमान में कार्यवाहक व्यवस्था को समाप्त कर पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति की दिशा में इसे बड़ा कदम माना जा रहा है।

वरिष्ठता और ट्रैक रिकॉर्ड पर टिकी नजरें

यूपी सरकार द्वारा भेजे गए इस पैनल में 1990, 1991 और 1992 बैच के कई कद्दावर आईपीएस अधिकारियों के नाम शामिल हैं। यूपीएससी इन नामों की स्क्रूटनी करेगा और अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड, सत्यनिष्ठा और अनुभव के आधार पर तीन सबसे उपयुक्त नामों का चयन कर वापस राज्य सरकार को भेजेगा। शासन की मंशा है कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए एक अनुभवी और बेदाग छवि वाले अधिकारी को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाए।

तीन दर्जन से अधिक अफसरों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा

डीजीपी की कुर्सी के लिए चल रही इस रेस में कई ऐसे चेहरे शामिल हैं जो केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर हैं या प्रदेश में महत्वपूर्ण पदों पर तैनात हैं। नियमों के मुताबिक, डीजीपी पद के लिए कम से कम 30 साल की सेवा और रिटायरमेंट में न्यूनतम छह महीने का समय शेष होना अनिवार्य है। इस बार पैनल में अधिकारियों की संख्या अधिक होने के कारण मुकाबला काफी रोचक हो गया है। गृह विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जा रही है ताकि जल्द से जल्द नियुक्ति प्रक्रिया संपन्न हो सके।

यूपीएससी की बैठक के बाद साफ होगी तस्वीर

आने वाले दिनों में दिल्ली में यूपीएससी और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक होने की संभावना है। इस बैठक में ही पैनल के नामों पर विस्तार से चर्चा होगी। वर्तमान में कार्यवाहक डीजीपी के नेतृत्व में चल रहे पुलिस विभाग को अब स्थायी नेतृत्व मिलने की उम्मीद जगी है। नए डीजीपी के सामने आगामी चुनौतियों, कानून-व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण और पुलिस आधुनिकीकरण जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों को पूरा करने की जिम्मेदारी होगी। प्रदेश की जनता और पुलिस महकमे की निगाहें अब दिल्ली से आने वाले फैसले पर टिकी हैं।