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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की समय सीमा खत्म होने के बेहद करीब है, लेकिन शांति वार्ता की राह अब भी कांटों भरी नजर आ रही है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता पर संशय के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि उन पर शांति वार्ता के लिए कोई दबाव नहीं है और वे एक ऐसे समझौते पर काम कर रहे हैं जो दुनिया को परमाणु खतरे से बचाएगा।

JCPOA को बताया 'सबसे खराब और शर्मनाक' सौदा

राष्ट्रपति ट्रंप ने पूर्ववर्ती ओबामा और बाइडेन सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए 2015 के 'ईरान परमाणु समझौते' (JCPOA) को अमेरिका के लिए विनाशकारी बताया। ट्रंप ने कहा:

"बराक ओबामा और जो बाइडेन ने जो परमाणु समझौता किया था, वह हमारे देश की सुरक्षा के लिए अब तक का सबसे खराब फैसला था। वह समझौता ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के बजाय उसे पक्का रास्ता दे रहा था। हम जिस नए समझौते पर काम कर रहे हैं, उसके तहत ईरान कभी भी परमाणु शक्ति नहीं बन पाएगा।"

'बोइंग 757 से भेजी गई थी नकदी' - ट्रंप का खुलासा

ट्रंप ने ओबामा प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उस दौरान ईरान को 1.7 अरब डॉलर (करीब 14,000 करोड़ रुपये) नकद भेजे गए थे। ट्रंप के अनुसार:

यह पैसा बोइंग 757 विमान के जरिए सीधे ईरान पहुंचाया गया ताकि वहां का नेतृत्व इसे अपनी मर्जी से खर्च कर सके।

वाशिंगटन डी.सी., वर्जीनिया और मैरीलैंड के बैंकों से बड़ी मात्रा में नकदी निकाली गई थी।

ट्रंप का दावा है कि अगर उन्होंने उस समझौते को न बदला होता, तो आज इजरायल और मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर परमाणु हथियारों का खतरा मंडरा रहा होता।

पूरी दुनिया के लिए 'शांति की गारंटी' बनेगा नया समझौता

ट्रंप ने मीडिया के एक वर्ग (जिन्हें वे 'फेक न्यूज' कहते हैं) पर निशाना साधते हुए कहा कि वे जानते हैं कि पुराना समझौता कितना खतरनाक था। ट्रंप ने दुनिया को भरोसा दिलाया:

"अगर हमारा नया समझौता होता है, तो यह इजरायल, मध्य पूर्व, यूरोप और अमेरिका के लिए शांति और सुरक्षा की गारंटी देगा। यह एक ऐसा ऐतिहासिक कदम होगा जिस पर पूरी दुनिया को गर्व होगा, न कि वह अपमान जो हमने पिछले कायर नेतृत्व के कारण झेला है।"

संकट की घड़ी: क्या टल पाएगा युद्ध?

एक तरफ ट्रंप कड़े तेवर दिखा रहे हैं, तो दूसरी तरफ हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी और ईरान का आक्रामक रुख जारी है। पाकिस्तान में प्रस्तावित वार्ता फिलहाल अधर में है। अब देखना यह है कि क्या ट्रंप की 'मैक्सिमम प्रेशर' (अधिकतम दबाव) की नीति ईरान को उनकी शर्तों पर झुकने के लिए मजबूर कर पाती है या खाड़ी क्षेत्र एक नए महायुद्ध की गवाह बनेगी।