Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिम एशिया (Mid-East) में जारी युद्ध और ईरान-इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहाँ 'परमाणु युद्ध' की चर्चा अब महज कल्पना नहीं रह गई है। अगर ईरान की धरती पर परमाणु विस्फोट होता है, तो इसका असर केवल सरहदों तक सीमित नहीं रहेगा। वैज्ञानिक विश्लेषणों के अनुसार, भारत भौगोलिक रूप से सुरक्षित दिख सकता है, लेकिन पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर इसके परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं।
दूरी है ढाल: क्या भारत को है सीधा खतरा?
ईरान के प्रमुख परमाणु केंद्रों से भारत की पश्चिमी सीमा की दूरी लगभग 2,000 से 2,500 किलोमीटर है। परमाणु विज्ञान के नियमों के मुताबिक, विस्फोट के सबसे घातक और भारी रेडियोधर्मी कण (Radioactive Fallouts) कुछ सौ किलोमीटर के दायरे में ही जमीन पर गिर जाते हैं। इतनी लंबी दूरी होने के कारण, भारत को विकिरण (Radiation) से तत्काल कोई जानलेवा खतरा होने की संभावना कम है। हालांकि, असली चुनौती 'हवा की चाल' में छिपी है।
हवा का रुख बदला तो 72 घंटे में गुजरात-राजस्थान पर संकट
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विस्फोट के समय हवा पश्चिम से पूर्व की ओर चलती है, तो रेडियोधर्मी बादल 48 से 72 घंटों के भीतर भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं।
प्रभावित राज्य: गुजरात, राजस्थान और पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्यों में इन कणों की उपस्थिति दर्ज की जा सकती है।
राहत की बात: भारत पहुँचते-पहुँचते ये कण काफी हल्के और बिखर चुके होंगे, जिससे तत्काल 'हेल्थ इमरजेंसी' जैसी स्थिति नहीं बनेगी। लेकिन लंबे समय में ये कण बारिश के पानी और मिट्टी को प्रदूषित कर सकते हैं।
इन पड़ोसी देशों के लिए 'काल' बनेगा रेडिएशन
ईरान के सबसे करीब स्थित देशों के लिए परमाणु विस्फोट एक ऐसी मानवीय त्रासदी होगी, जिसका असर दशकों तक रहेगा।
सबसे ज्यादा खतरा: इराक, तुर्की, अफगानिस्तान और पाकिस्तान। ये देश 500 से 1,000 किलोमीटर के दायरे में होने के कारण सीधे तौर पर घातक विकिरण की चपेट में आएंगे।
परिणाम: कृषि भूमि का बंजर होना, पेयजल का जहरीला होना और आने वाली पीढ़ियों में कैंसर व जेनेटिक बीमारियों का खतरा बढ़ना तय है।
समुद्री अर्थव्यवस्था और खाड़ी देशों पर प्रहार
यदि ईरान के तट पर स्थित 'बुशहर' जैसे परमाणु संयंत्र पर हमला होता है, तो अरब सागर का जल प्रदूषित हो सकता है।
पेयजल संकट: सऊदी अरब, कुवैत और यूएई जैसे देश अपनी पानी की जरूरत के लिए समुद्र (Desalination) पर निर्भर हैं। समुद्री प्रदूषण इनके लिए जीवन-मरण का प्रश्न बन जाएगा।
भारत पर असर: प्रदूषित समुद्री लहरें भारत के पश्चिमी तटों तक पहुँच सकती हैं, जिससे मछली पालन और समुद्री व्यापार को भारी आर्थिक नुकसान होगा।
सक्रिय रिएक्टर: परमाणु बम से भी अधिक खतरनाक
वैज्ञानिकों के अनुसार, सक्रिय परमाणु रिएक्टर पर हमला किसी परमाणु बम के फटने से भी अधिक डरावना है। बम का असर वक्त के साथ कम होता है, लेकिन रिएक्टर से निकलने वाले स्ट्रोंटियम और सीज़ियम जैसे तत्व दशकों तक मिट्टी और पानी में सक्रिय रहते हैं। भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षित निकासी और तेल-गैस (LPG) की आपूर्ति बाधित होना होगी।




