Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में ईंट भट्टों के संचालन को नियमित करने और एनजीटी मानकों के अनुरूप प्रदूषण को कम करने के लिए जनपद स्तरीय समितियों का गठन किया गया है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में इन समितियों की सक्रिय भूमिका के चलते प्रदेश ने ईंट भट्टों से लगभग 193.5 करोड़ रुपये विनियमन शुल्क के रूप में राजस्व प्राप्त किया। यह न केवल राज्य की आमदनी में वृद्धि को दर्शाता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और अवैध भट्टा संचालन पर अंकुश लगाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
जनपद स्तरीय समितियों की भूमिका
समितियों के संचालन में जिला अधिकारी, अपर जिला अधिकारी, एसडीएम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी, स्थानीय पुलिस और पर्यावरण विशेषज्ञ शामिल हैं। इन समितियों ने प्रदेश के हजारों ईंट भट्टों का सत्यापन किया और:
80 प्रतिशत भट्टों को एनजीटी अनुपालन प्रमाणित किया
अवैध भट्टों को बंद कराया
कई भट्टों में मानक के अनुरूप प्रबंधन कर उन्हें मानकीकृत किया
सत्यापन अभियान के दौरान सभी वैध भट्टों को जिग-जैग तकनीक, ऊंची चिमनियां और कम प्रदूषणकारी ईंधन के उपयोग के लिए अनिवार्य किया गया। इसके परिणामस्वरूप, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, आगरा और दिल्ली एनसीआर जिलों में वायु प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।
आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ
जनपद स्तरीय समितियों के सक्रिय संचालन से न केवल प्रदेश के राजस्व में वृद्धि हुई, बल्कि अवैध ईंट भट्टों का संचालन लगभग 70 प्रतिशत तक कम हुआ। यह कदम सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
मुख्य सचिव की समीक्षा बैठक में यह बताया गया कि सत्यापन समितियों ने भट्टा मालिकों से विनियमन शुल्क की शत-प्रतिशत वसूली सुनिश्चित की, जिससे राज्य को पिछले वर्षों की तुलना में अधिक आय प्राप्त हुई।
इस तरह, ईंट भट्टों के नियंत्रण और एनजीटी मानकों के अनुपालन से प्रदेश में राजस्व और पर्यावरण सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हुई हैं।
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