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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर प्रदेश की सियासत में अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद इन दिनों एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। मिशन-2027 को साधने के लिए चंद्रशेखर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में ताबड़तोड़ जनसभाएं कर रहे हैं। इसी कड़ी में नवाबों के शहर लखनऊ में आयोजित एक जनसभा के दौरान उन्होंने कुछ ऐसा कह दिया, जिसने न केवल विरोधियों की धड़कनें तेज कर दी हैं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी एक नई बहस छेड़ दी है।

नगीना सांसद के तेवर देख विपक्ष हैरान

लखनऊ की रैली में समर्थकों के भारी हुजूम को संबोधित करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने सीधे तौर पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को निशाने पर लिया। उन्होंने अपने संबोधन में साफ किया कि आने वाले विधानसभा चुनाव में आजाद समाज पार्टी किसी भी बड़े दल के लिए 'बड़ी चुनौती' बनने जा रही है। उन्होंने कहा कि अब दलितों और पिछड़ों का वोट केवल किसी को जिताने के लिए नहीं, बल्कि खुद सत्ता के गलियारों तक पहुंचने के लिए इस्तेमाल होगा। उनके इस बयान को राजनीतिक पंडित उत्तर प्रदेश में एक नए समीकरण के उदय के रूप में देख रहे हैं।

वायरल बयान ने बढ़ाई सियासी तपिश

सोशल मीडिया पर चंद्रशेखर का जो बयान सबसे ज्यादा चर्चा बटोर रहा है, उसमें उन्होंने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि "दिल्ली के बाद अब लखनऊ के सिंहासन की बारी है।" उन्होंने कार्यकर्ताओं को गांव-गांव जाकर पार्टी की विचारधारा पहुंचाने का निर्देश दिया है। चंद्रशेखर ने दावा किया कि उनकी पार्टी अब केवल उप-चुनावों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि 2027 के महासंग्राम में निर्णायक भूमिका निभाएगी। इस बयान के वीडियो क्लिप्स एक्स (ट्विटर) और फेसबुक पर जमकर शेयर किए जा रहे हैं, जिसे उनके समर्थकों द्वारा 'परिवर्तन की आहट' बताया जा रहा है।

दलित-पिछड़ा गठजोड़ पर चंद्रशेखर का फोकस

चंद्रशेखर आजाद की रणनीति स्पष्ट है कि वे पश्चिमी यूपी के साथ-साथ अब अवध और पूर्वांचल में भी अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं। लखनऊ की इस सभा में उन्होंने स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ संविधान और आरक्षण के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। जानकारों का मानना है कि नगीना सीट पर मिली बड़ी जीत ने चंद्रशेखर के हौसले बुलंद कर दिए हैं और अब वे खुद को उत्तर प्रदेश में दलित राजनीति के एक प्रमुख चेहरे के तौर पर स्थापित कर चुके हैं।