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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : चैत्र नवरात्रि 2026 का पावन पर्व अपने समापन की ओर है। मां दुर्गा की भक्ति में लीन श्रद्धालु नौ दिनों तक उपवास रखने के साथ-साथ अपने घरों में 'अखंड ज्योति' प्रज्वलित करते हैं। अखंड ज्योति को मां भगवती के साक्षात स्वरूप और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। 28 मार्च 2026 को नवरात्रि का समापन हो रहा है, ऐसे में भक्तों के मन में यह सवाल रहता है कि नौ दिनों तक जलने वाली इस पावन ज्योति का विसर्जन कैसे करें। ज्योतिष और धर्म शास्त्रों में अखंड ज्योति के विसर्जन को लेकर कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है।

अटूट आस्था का प्रतीक है अखंड ज्योति: जानें इसका महत्व

हिंदू धर्म में दीपक को ज्ञान और प्रकाश का पुंज माना गया है। अखंड ज्योति जलाने का अर्थ है अपने भीतर के अंधकार को मिटाकर ईश्वर से पूर्ण ज्ञान की प्राप्ति करना। माना जाता है कि जिस घर में नौ दिनों तक बिना खंडित हुए ज्योति जलती है, वहां देवी दुर्गा का स्थाई निवास होता है। यह ज्योति न केवल भक्त के संकल्प की सिद्धि का प्रमाण है, बल्कि जीवन में निरंतर प्रगति और ऊंचाइयों को छूने की प्रेरणा भी देती है। किसी विशेष मनोकामना के लिए जलाई गई अखंड ज्योति के प्रभाव से साधक के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

अखंड ज्योति विसर्जन के शास्त्रोक्त नियम और सावधानियां

नवरात्रि के नौवें या दसवें दिन कन्या पूजन और हवन के पश्चात ही अखंड ज्योति के विसर्जन की प्रक्रिया शुरू की जाती है। सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि जलती हुई अखंड ज्योति को कभी भी फूंक मारकर या हाथ से बुझाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। इसे अपने आप ही शांत (ठंडा) होने देना सबसे उत्तम माना जाता है। विसर्जन से पहले पूजा में हुई किसी भी अनजानी भूल के लिए मां दुर्गा से क्षमा याचना अवश्य करें। साथ ही कलश और माता की चौकी को विसर्जित करने से पहले उन्हें उनके स्थान से थोड़ा हिलाकर उनकी स्थिति बदल देनी चाहिए।

बची हुई सामग्री और दीपक का क्या करें?

जब अखंड ज्योति प्राकृतिक रूप से शांत हो जाए, तो उसमें बची हुई बाती और घी को अत्यंत सावधानी से निकाल लें। इस बचे हुए घी या तेल का उपयोग आप घर के दैनिक पूजा वाले दीयों में कर सकते हैं। ज्योति की बुझी हुई बाती को इधर-उधर फेंकने के बजाय किसी पवित्र पेड़ जैसे पीपल या बरगद की जड़ के पास रख दें या गमले की मिट्टी में दबा दें। यदि आपने मिट्टी के दीपक का उपयोग किया है, तो उसे भी विसर्जित कर दें, लेकिन यदि दीपक पीतल या तांबे का है, तो उसे अच्छी तरह धोकर शुद्ध कर लें ताकि उसे दोबारा उपयोग में लाया जा सके।