Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार के चर्चित हिजाब कांड में आज (7 जनवरी) निर्णायक दिन है। आयुष डॉक्टर नुसरत परवीन के पास सरकारी नौकरी बचाने का अंतिम अवसर है। 15 दिसंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा मंच पर हिजाब हटाए जाने की घटना के बाद नुसरत पिछले 23 दिनों से लापता हैं।
आज तक न तो वे सामने आईं और न ही सिविल सर्जन कार्यालय में रिपोर्ट की है। नियमों के अनुसार अगर नुसरत आज शाम तक जॉइनिंग नहीं करतीं, तो उनकी नियुक्ति स्वतः रद्द मानी जा सकती है।
मामले की पृष्ठभूमि
15 दिसंबर 2025: पटना में नियुक्ति पत्र वितरण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंच पर डॉ. नुसरत को पास बुलाया। बातचीत के दौरान उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “ये क्या है जी?” और उनके हिजाब को अपने हाथ से हटा दिया।
मंच पर मौजूद डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने रोकने की कोशिश की, लेकिन नुसरत सार्वजनिक रूप से असहज हो गईं।
घटना के बाद नुसरत कॉलेज और घर दोनों जगह नहीं दिखीं, उनके घर पर ताला लगा है और परिजन चुप्पी साधे हुए हैं।
जॉइनिंग की समयसीमा
स्वास्थ्य विभाग ने पहले 20 दिसंबर को जॉइनिंग तय की थी।
बाद में समय बढ़ाकर 31 दिसंबर और फिर 7 जनवरी किया गया।
तय समयसीमा के बाद भी जॉइनिंग न होने पर नियुक्ति रद्द मानी जाएगी।
झारखंड का प्रस्ताव और सियासी हलचल
झारखंड सरकार ने नुसरत को 3 लाख रुपये मासिक वेतन, मनचाही पोस्टिंग और सरकारी फ्लैट का ऑफर दिया।
झारखंड स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इसे महिला सम्मान से जोड़ते हुए बिहार सरकार और नीतीश कुमार पर हमला किया।
बिहार में उन्हें करीब 32 हजार रुपये मिलते हैं, जबकि झारखंड में बेहतर सम्मान और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
आज का महत्व
आज शाम तक नुसरत जॉइनिंग नहीं करतीं, तो उनका स्थान वेटिंग लिस्ट के उम्मीदवार को मिल सकता है।
यह मामला केवल नियुक्ति का नहीं, बल्कि सम्मान, सियासत और सिस्टम के टकराव का प्रतीक बन गया है।




