Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार की सियासत में आज यानी 5 मार्च 2026 का दिन ऐतिहासिक साबित हो सकता है। राज्य में पिछले दो दशकों से सत्ता के केंद्र रहे नीतीश कुमार अब बिहार की मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर देश की संसद (राज्यसभा) जाने की तैयारी में हैं। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में आज नीतीश कुमार अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं। इस संभावित 'रिजाइम चेंज' (सत्ता परिवर्तन) के बीच बीजेपी के तीन दिग्गज नेताओं के नाम मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे चल रहे हैं।
1. सम्राट चौधरी: बीजेपी का 'पगड़ी' वाला योद्धा
बिहार के उपमुख्यमंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेता सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।
प्रोफाइल: 16 नवंबर 1968 को मुंगेर में जन्मे सम्राट चौधरी कोइरी/कुशवाहा समाज का बड़ा चेहरा हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी भी दिग्गज राजनेता रहे हैं।
ताकत: उन्होंने नीतीश कुमार को सत्ता से हटाने के लिए सिर पर पगड़ी बांधने का संकल्प लिया था। ओबीसी (OBC) वोट बैंक पर उनकी मजबूत पकड़ और आक्रामक तेवर उन्हें पार्टी की पहली पसंद बनाते हैं।
2. नित्यानंद राय: पार्टी का 'यादव' चेहरा
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय भी इस रेस में मजबूती से बने हुए हैं।
प्रोफाइल: 1966 में जन्मे नित्यानंद राय वैशाली के हाजीपुर से आते हैं। वे बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं और लंबे समय तक विधायक रहे हैं।
ताकत: भाजपा उन्हें राजद के पारंपरिक यादव वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए एक 'मास्टरकार्ड' के रूप में देखती है। संगठन में उनका अनुभव और केंद्र से निकटता उनके पक्ष में जाती है।
3. डॉ. दिलीप जायसवाल: संगठन के 'चाणक्य'
वर्तमान बिहार बीजेपी अध्यक्ष डॉ. दिलीप जायसवाल का नाम तीसरे बड़े दावेदार के रूप में उभरा है।
प्रोफाइल: 3 दिसंबर 1963 को खगड़िया में जन्मे दिलीप जायसवाल कलवार जाति (EBC) से आते हैं। वे 22 वर्षों तक पार्टी के प्रदेश कोषाध्यक्ष रहे हैं और वर्तमान में नीतीश कैबिनेट में मंत्री भी हैं।
ताकत: बीजेपी नेतृत्व का उन पर अटूट भरोसा है। वे एक साफ-सुथरी छवि वाले और शांत रणनीतिकार माने जाते हैं। ईबीसी (EBC) समुदाय से होने के कारण उनका चयन बीजेपी की 'सोशल इंजीनियरिंग' में फिट बैठता है।
क्या होगा नीतीश कुमार और उनके बेटे का भविष्य?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद उनके बेटे निशांत कुमार सक्रिय राजनीति में प्रवेश करेंगे। अटकलें हैं कि नए मंत्रिमंडल में निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी जा सकती है, ताकि जेडीयू का आधार बना रहे और पार्टी में एक उत्तराधिकारी तैयार हो सके।




