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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार की राजनीति इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां 'रातों-रात' कुछ भी बदल सकता है। देशभर में जारी राज्यसभा चुनावों के बीच पटना के गलियारों में यह चर्चा चरम पर है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी पारी का रुख दिल्ली की ओर कर सकते हैं। इन अटकलों को तब और हवा मिली जब उनके सबसे भरोसेमंद साथी और जेडीयू एमएलसी संजय गांधी ने मुख्यमंत्री आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद अपनी चुप्पी तोड़ी।

नीतीश कुमार का अगला कदम: राज्यसभा या बिहार की कमान?

संजय गांधी ने पत्रकारों से बात करते हुए साफ कहा कि राज्यसभा जाने का अंतिम निर्णय केवल नीतीश कुमार ही ले सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि नीतीश कुमार अपने फैसलों को हमेशा गुप्त रखने के लिए जाने जाते हैं। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि अगर नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करते हैं (जिसकी आखिरी तारीख 5 मार्च 2026 है), तो उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना होगा। ऐसी स्थिति में सत्ताधारी गठबंधन में बीजेपी की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।

बिहार की गद्दी पर कौन? सत्ता संघर्ष के नए समीकरण

अगर नीतीश कुमार दिल्ली जाते हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? चर्चाएं हैं कि:

बीजेपी का दावा: सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते भारतीय जनता पार्टी मुख्यमंत्री पद पर अपना मजबूत दावा पेश कर सकती है।

नया नेतृत्व: जेडीयू और बीजेपी के बीच सत्ता के नए फॉर्मूले पर मंथन चल रहा है, जिसमें किसी नए चेहरे को कमान सौंपी जा सकती है।

निशांत कुमार की 'ग्रैंड एंट्री': सक्रिय राजनीति में कदम

इस पूरी उठापटक के बीच मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार का नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में है। बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने पहले ही पुष्टि कर दी है कि निशांत अब सक्रिय राजनीति में आ रहे हैं। संजय गांधी ने भी इसका समर्थन करते हुए कहा कि राज्य के युवा और पार्टी कार्यकर्ता लंबे समय से निशांत को नेतृत्व संभालते देखना चाहते थे। माना जा रहा है कि निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री जैसी कोई बड़ी जिम्मेदारी देकर पार्टी युवाओं को एक बड़ा संदेश देना चाहती है।

आज की रात बिहार के लिए अहम

फिलहाल पटना में बैठकों का दौर जारी है। जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और अन्य वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री आवास पर रणनीति तैयार कर रहे हैं। बिहार की 13 करोड़ जनता की निगाहें अब 5 मार्च की सुबह पर टिकी हैं, जब राज्यसभा नामांकन के साथ ही बिहार की सत्ता का भविष्य भी साफ हो सकता है।