समस्तीपुर के चकोठी मठ में बड़ी चोरी: चालू थे कैमरे पर रिकॉर्डिंग थी बंद, जी मीडिया के कैमरे पर आईं मंदिर की बड़ी खामियां
बिहार के समस्तीपुर जिले से एक बेहद हैरान और विचलित करने वाला मामला सामने आया है। यहां के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक 'चकोठी मठ' में चोरों ने धावा बोलकर लाखों रुपये मूल्य की प्राचीन मूर्तियों और कीमती आभूषणों पर हाथ साफ कर दिया। इस हाई-प्रोफाइल चोरी की घटना के बाद जब 'ज़ी मीडिया' (Zee Media) की टीम ग्राउंड जीरो पर तफ्तीश करने पहुंची, तो मंदिर प्रशासन और स्थानीय पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था की ऐसी कलई खुली जिसने सबको हैरान कर दिया। जांच में सामने आया कि मंदिर परिसर में तीसरी आंख यानी सीसीटीवी (CCTV) कैमरे तो शान से हवा में चालू दिख रहे थे, लेकिन उनकी रिकॉर्डिंग का सिस्टम महीनों से पूरी तरह बंद पड़ा था। अब सवाल यह उठ रहा है कि चकोठी मठ में हुई इस महाचोरी का असली जिम्मेदार कौन है?
तीसरी आंख का धोखा: कैमरे चालू, पर डीवीआर खाली
चकोठी मठ में जैसे ही चोरी की खबर फैली, इलाके के लोगों में भारी आक्रोश पनप गया। सदियों पुरानी मूर्तियों के चोरी होने की सूचना मिलते ही पुलिस और खोजी कुत्ते मौके पर पहुंचे। जब ज़ी मीडिया के संवाददाता ने मंदिर के मुख्य सुरक्षा कक्ष और मॉनिटर रूम का जायजा लिया, तो चौंकाने वाला सच सामने आया।
कंट्रोल रूम में लगे स्क्रीन पर सभी कैमरों का लाइव विजुअल (Live Visual) तो दिखाई दे रहा था, लेकिन जब घटना के समय का फुटेज निकालने के लिए डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DVR) को चेक किया गया, तो उसमें कोई डेटा ही नहीं था। मंदिर प्रशासन की लापरवाही के कारण सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग सेटिंग्स बंद थीं या फिर स्टोरेज फुल होने की वजह से महीनों से बैकअप ही नहीं लिया जा रहा था। चोरों के लिए यह लापरवाही एक बड़ा वरदान साबित हुई और वे आसानी से वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए।
ज़ी मीडिया की पड़ताल में खुलीं ये 3 बड़ी खामियां
मठ परिसर का बारीकी से मुआयना करने पर ज़ी मीडिया की टीम को सुरक्षा व्यवस्था में एक या दो नहीं, बल्कि कई गंभीर कमियां और लूपहोल्स (Loopholes) देखने को मिले:
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गार्ड्स की तैनाती में लापरवाही: इतने बड़े और ऐतिहासिक मठ की सुरक्षा के लिए रात के समय पर्याप्त होमगार्ड या निजी सुरक्षाकर्मियों की तैनाती नहीं थी। जो थे भी, वे घटना के समय गहरी नींद में सो रहे थे।
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कमजोर लॉकिंग सिस्टम: जिस गर्भगृह और लॉकर रूम में बेशकीमती मूर्तियां और अष्टधातु के सामान रखे थे, वहां का ताला और दरवाजा बेहद पुराना और कमजोर था, जिसे चोरों ने आसानी से कटर या रॉड की मदद से तोड़ दिया।
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स्थानीय पुलिस की ढीली गश्त: ग्रामीणों का आरोप है कि चकोठी मठ जैसे संवेदनशील धार्मिक स्थल के आसपास स्थानीय थाने की पुलिस वैन या नाइट पेट्रोलिंग (Night Patroling) की टीम कभी नहीं दिखती, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।
आक्रोशित ग्रामीणों का हंगामा, पुलिस के हाथ अब तक खाली
इस ऐतिहासिक धरोहर में हुई चोरी के बाद समस्तीपुर के स्थानीय निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। चकोठी मठ के बाहर सैकड़ों की संख्या में जुटे ग्रामीणों ने मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी और हंगामा किया। ग्रामीणों का कहना है कि यह चोरी बिना किसी अंदरूनी मिलीभगत या रेकी के संभव नहीं है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए समस्तीपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी (DSP) ने जांच की कमान संभाली है। पुलिस का कहना है कि वे तकनीकी सेल (Technical Cell) और मोबाइल टावर डंप डेटा की मदद से घटना के समय इलाके में सक्रिय संदिग्ध नंबरों को शॉर्टलिस्ट कर रहे हैं। हालांकि, सीसीटीवी फुटेज न मिलने के कारण पुलिस के लिए चोरों का हुलिया पहचानना एक बेहद टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। ज़ी मीडिया के इस बड़े खुलासे के बाद अब मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय प्रशासन एक-दूसरे पर जिम्मेदारी मढ़ने में जुटे हैं।