कौन बनेगा बिहार विधान परिषद के इस महासंग्राम का सरताज और कौन रहेगा फिसड्डी
बिहार की राजनीतिक गलियारों में इस समय ठंड की आहट के साथ ही सियासी तापमान अपने चरम पर पहुंच चुका है, जिसकी सबसे बड़ी वजह राज्य की 8 महत्वपूर्ण विधान परिषद (MLC) सीटों पर होने जा रहा घमासान है। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की कुल 8 सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब सभी की निगाहें 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान और आने वाली 27 अक्टूबर की तारीख पर टिकी हैं, जब मतों की गिनती के बाद यह फैसला होगा कि किस पार्टी और दिग्गज चेहरे के सिर पर जीत का ताज सजेगा। इस बार के इन चुनावों में कुल 164 उम्मीदवारों ने अपना भाग्य अजमाने के लिए पर्चा भरा है, जिसमें राजनीतिक दलों के दिग्गज से लेकर नए विकल्प तलाशने वाले दल भी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। इस बहुप्रतीक्षित चुनावी रण में सत्ता पक्ष, विपक्ष और नए राजनीतिक खिलाड़ियों के उतरने से मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का हो गया है, जिससे बिहार की सियासत में अभी से हलचल तेज हो गई है। आइए इस विशेष रिपोर्ट में विस्तार से जानते हैं कि इन 8 सीटों पर समीकरण क्या कह रहे हैं और कौन से 5 बड़े चेहरे इस चुनाव के असली केंद्र बिंदु बने हुए हैं।
चार स्नातक और चार शिक्षक सीटों पर कुल 164 उम्मीदवारों का भविष्य दांव पर
बिहार विधान परिषद की जिन 8 सीटों पर यह चुनाव हो रहा है, उनमें चार सीटें स्नातक निर्वाचन क्षेत्र (Graduates' Constituencies) की हैं और चार सीटें शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र (Teachers' Constituencies) की शामिल हैं। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, इन सभी सीटों पर कुल 164 प्रत्याशियों ने अपने नामांकन पत्र दाखिल किए हैं, जिनमें स्नातक सीटों के लिए 98 और शिक्षक सीटों के लिए 66 पर्चे भरे गए हैं। खास तौर पर दरभंगा स्नातक सीट पर सबसे ज्यादा 40 उम्मीदवारों ने पर्चा भरकर मुकाबले को बेहद कड़ा बना दिया है। इन चुनावों की सबसे खास बात यह है कि इसमें आम मतदाता वोट नहीं डालते, बल्कि राज्य के ग्रेजुएट युवा और मान्यता प्राप्त स्कूलों-कॉलेजों के शिक्षक अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हैं। मतदाता सूची और वरीयता क्रम (Preference Vote) के इस जटिल चुनावी गणित के कारण हर एक पार्टी और प्रत्याशी को बहुत ही सूझबूझ के साथ अपनी रणनीति बनानी पड़ रही है, ताकि बुद्धिजीवी वर्ग के इन मतदाताओं को अपने पाले में खींचा जा सके।
वे 5 बड़े चेहरे और हॉट सीटें जो बनी हुई हैं राजनीतिक चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र
इस पूरे एमएलसी चुनाव में कुछ ऐसी सीटें और दिग्गज चेहरे हैं जिन पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हुई हैं और जिन्हें इस चुनाव के पांच सबसे बड़े केंद्र बिंदु माना जा रहा है। सबसे पहले बात करते हैं पटना स्नातक सीट की, जहां जेडीयू के टिकट पर मौजूदा और आक्रामक तेवर वाले नेता नीरज कुमार मैदान में हैं, जिनके सामने जन सुराज और अन्य दलों के उम्मीदवारों ने कड़ी चुनौती पेश की है। दूसरा बड़ा चेहरा पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार लंबे समय से प्रतिनिधित्व करते आ रहे नवल किशोर यादव का है, जिनकी राजनीतिक पकड़ इस क्षेत्र में बेहद मजबूत मानी जाती है। तीसरा चर्चित केंद्र दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र है, जहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री डॉ. मदन मोहन झा मैदान में हैं, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इसी सीट पर महागठबंधन के सहयोगी दल आरजेडी और वाम दलों ने भी अपने उम्मीदवार उतारकर आपसी मुकाबले को बेहद रोचक बना दिया है। चौथा और पांचवा बड़ा केंद्र कोसी और तिरहुत की स्नातक तथा शिक्षक सीटें हैं, जहां से विभिन्न दलों के दिग्गज अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
महागठबंधन के भीतर दोस्ताना जंग और एनडीए की एकजुटता की अग्निपरीक्षा
बिहार के इस विधान परिषद चुनाव ने राज्य के मुख्य विपक्षी गठबंधन यानी महागठबंधन के भीतर चल रही अंदरूनी कलह और सीट शेयरिंग के पेंच को भी खुलकर सामने ला दिया है। स्थिति यह बन गई है कि कई महत्वपूर्ण सीटों पर आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों ने एक-दूसरे के खिलाफ ही अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं, जिसे राजनीतिक विश्लेषक 'फ्रेंडली फाइट' या आपसी खींचतान का नाम दे रहे हैं। दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड (JDU) वाला एनडीए गठबंधन पूरी रणनीति और समन्वय के साथ इन सभी आठों सीटों पर अपनी जीत का परचम लहराने के लिए फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। सत्ताधारी दल के रणनीतिकार यह अच्छी तरह जानते हैं कि बुद्धिजीवी और शिक्षक वर्ग का यह चुनाव आम विधानसभा चुनाव से बिल्कुल अलग होता है, इसलिए यहां जरा सी भी चूक भारी पड़ सकती है। यही वजह है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से लेकर स्थानीय कार्यकर्ता तक जमीन पर उतरकर हर एक वोटर को साधने में जुटे हुए हैं।
23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को खुलेगा राजनीतिक पिटारा
नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब मैदान पूरी तरह से साफ हो चुका है और उम्मीदवारों की निगाहें आगामी 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान पर टिकी हैं, जब सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक शांतिपूर्ण तरीके से बैलेट पेपर के जरिए वोट डाले जाएंगे। इसके तुरंत बाद सभी मतपेटियों को सुरक्षित रखकर 27 अक्टूबर को मतगणना कराई जाएगी, जिसके परिणाम यह तय करेंगे कि विधान परिषद के इस सदन में किसकी आवाज गूंजेगी और कौन राजनीतिक दल धूल چाटेगा। इन नतीजों का असर न केवल आगामी राजनीतिक समीकरणों पर पड़ेगा, बल्कि यह भी साबित होगा कि बिहार के शिक्षक और स्नातक मतदाता मौजूदा समय में किस राजनीतिक दल की नीतियों और नेतृत्व पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं।