img

Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार की सियासत में एक बार फिर 'उच्च सदन' की जंग तेज हो गई है। भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार की 5 राज्यसभा सीटों समेत देश की 37 सीटों पर चुनाव का बिगुल फूंक दिया है। 16 मार्च को होने वाली वोटिंग केवल सांसदों का चयन नहीं करेगी, बल्कि यह बिहार एनडीए (NDA) और महागठबंधन के भीतर बदलते शक्ति संतुलन की भी परीक्षा होगी। अमरेंद्र धारी सिंह, प्रेमचंद गुप्ता, उपेंद्र कुशवाहा, रामनाथ ठाकुर और हरिवंश नारायण सिंह का कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो रहा है, जिससे कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लग गई है।

41 विधायकों का 'जादुई आंकड़ा' और पार्टियों का गणित

बिहार विधानसभा की 243 सीटों के मौजूदा समीकरण के अनुसार, एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 41 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोट चाहिए। आंकड़ों पर नजर डालें तो भाजपा (89 विधायक) और जदयू (85 विधायक) के पास अपने दो-दो उम्मीदवारों को आसानी से राज्यसभा भेजने का बहुमत है। असली पेंच 'पांचवीं सीट' को लेकर फंसा है, जहां चिराग पासवान की पार्टी और महागठबंधन के बीच शह-मात का खेल शुरू हो चुका है।

चिराग पासवान की 'मदर कार्ड' वाली चाल

सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा लोजपा (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान की है। सूत्रों की मानें तो चिराग इस बार अपनी मां रीना पासवान को राज्यसभा भेजने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। चिराग के पास 19 विधायक हैं और उन्हें अतिरिक्त 22 वोटों की दरकार है। चर्चा तो यहां तक है कि अगर एनडीए के भीतर बात नहीं बनी, तो क्रॉस वोटिंग या 'पर्दे के पीछे' के नए समीकरण भी देखने को मिल सकते हैं। क्या चिराग अपने हनुमान होने का इनाम भाजपा से मांगेंगे? यह देखना दिलचस्प होगा।

नितिन नवीन और उपेंद्र कुशवाहा: किसका खुलेगा नसीब?

भाजपा के कद्दावर नेता और हाल ही में पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए नितिन नवीन को लेकर सस्पेंस लगभग खत्म होता दिख रहा है। दिल्ली के लुटियंस जोन में उन्हें 'टाइप-8' बंगला आवंटित होना इस बात का संकेत है कि पार्टी उन्हें संगठन की बड़ी जिम्मेदारी में ही रखेगी। दूसरी ओर, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के लिए राह कठिन लग रही है। 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद बदले समीकरणों और उनकी पार्टी के भीतर मची खींचतान ने उनके दोबारा उच्च सदन जाने के सपनों पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है।

नीतीश के भरोसेमंद और तेजस्वी की अग्निपरीक्षा

जदयू कोटे से हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है, क्योंकि दोनों ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी हैं। वहीं, महागठबंधन के लिए यह चुनाव तेजस्वी यादव की अग्निपरीक्षा है। उनके पास 41 विधायकों का समर्थन है, जिससे वे एक सीट निकाल सकते हैं। लेकिन विपक्षी एकता को बरकरार रखते हुए किसी एक नाम पर सहमति बनाना तेजस्वी के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा।