Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर चल रही गहमागहमी के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। नामांकन पत्रों की जांच (Scrutiny) के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन समेत सभी 6 उम्मीदवारों के पर्चे सही पाए गए हैं। चुनाव अधिकारी ने शुक्रवार शाम आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि किसी भी उम्मीदवार का नामांकन रद्द नहीं हुआ है। इसके साथ ही अब यह साफ हो गया है कि बिहार की 5 सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में मुकाबला दिलचस्प होने वाला है, क्योंकि मैदान में 6 धुरंधर डटे हुए हैं।
इन 6 दिग्गजों के बीच होगी 'बैटल रॉयल'
बिहार विधानसभा सचिवालय के मुताबिक, जिन उम्मीदवारों के नामांकन वैध पाए गए हैं, उनमें सत्ताधारी एनडीए (NDA) के 5 और मुख्य विपक्षी दल राजद (RJD) का 1 उम्मीदवार शामिल है:
नीतीश कुमार (जदयू): बिहार के मुख्यमंत्री, जो पहली बार राज्यसभा जा रहे हैं।
नितिन नबीन (भाजपा): भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष।
राम नाथ ठाकुर (जदयू): केंद्रीय मंत्री, जो हैट्रिक की तैयारी में हैं।
उपेंद्र कुशवाहा (आरएलएम): पूर्व केंद्रीय मंत्री और आरएलएम प्रमुख।
शिवेश कुमार (भाजपा): भाजपा के प्रदेश महासचिव।
अमरेंद्र धारी सिंह (राजद): राजद के मौजूदा सांसद और व्यवसायी।
16 मार्च को वोटिंग या निर्विरोध चुनाव?
निर्वाचन आयोग के नियमानुसार, उम्मीदवार 9 मार्च तक अपना नाम वापस ले सकते हैं। यदि 9 मार्च की शाम तक सभी 6 उम्मीदवार मैदान में बने रहते हैं, तो 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। हालांकि, यदि कोई एक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले लेता है, तो शेष 5 उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना तय हो जाएगा। सूत्रों की मानें तो एनडीए खेमा सभी 5 सीटों पर जीत को लेकर आश्वस्त है, जबकि राजद ने अमरेंद्र धारी सिंह को उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश की है।
समीकरणों का खेल: एक सीट के लिए चाहिए 41 वोट
बिहार विधानसभा की वर्तमान सदस्य संख्या के आधार पर एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 41 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता होगी। एनडीए के पास वर्तमान में 202 विधायकों का भारी-भरकम समर्थन है, जो 5 सीटें जीतने के लिए पर्याप्त से थोड़ा ही कम है। वहीं, राजद के पास अपने और सहयोगियों के मिलाकर केवल 35 विधायक हैं, जिससे उन्हें अपनी इकलौती सीट बचाने के लिए भी निर्दलीय या अन्य दलों के 6 अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी।
नीतीश का राज्यसभा जाना 'ऐतिहासिक' मोड़
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले को बिहार की राजनीति में 'एक युग के अंत' के तौर पर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने स्वयं सोशल मीडिया (X) पर पोस्ट कर अपनी इस इच्छा को साझा किया था कि वे संसद और विधानमंडल के चारों सदनों का अनुभव लेना चाहते हैं। उनके इस कदम के बाद अब बिहार में नए मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं, जिसमें भाजपा की ओर से किसी बड़े नेता के नाम पर मुहर लग सकती है।




