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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही सत्ताधारी दल भाजपा ने अपनी कमर कस ली है। चुनावी समर में 'हैट्रिक' लगाने के इरादे से भारतीय जनता पार्टी एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेलने जा रही है। आगामी 7 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह धर्मनगरी हरिद्वार से भाजपा के चुनावी अभियान का औपचारिक आगाज करेंगे। इस दौरान शाह न केवल कार्यकर्ताओं में जोश भरेंगे, बल्कि 'जन-जन की सरकार, चार साल बेमिसाल' के नए चुनावी नारे के साथ विपक्ष की घेराबंदी भी शुरू करेंगे।

पुष्कर सिंह धामी की सक्रियता बनेगी भाजपा का मुख्य हथियार

भाजपा की चुनावी रणनीति के केंद्र में इस बार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की बेदाग छवि और उनकी जमीनी सक्रियता है। पहाड़ से लेकर मैदान तक धामी सरकार की 'प्रो-पीपल' नीतियों को चुनाव प्रचार का मुख्य आधार बनाया जा रहा है। 23 मार्च को कार्यकाल के सफल चार साल पूरे होने से पहले ही अमित शाह हरिद्वार की पावन धरती से सरकार की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखेंगे। सूत्रों की मानें तो चुनाव के नजदीक आते ही यह नारा 'पांच साल बेमिसाल' में तब्दील हो जाएगा।

'जन-जन की सरकार' प्रदर्शनी से दिखेगी विकास की झलक

अमित शाह के दौरे को भव्य बनाने के लिए हरिद्वार में जोरदार तैयारियां चल रही हैं। जनसभा स्थल पर एक विशाल प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिसमें धामी सरकार के पिछले चार वर्षों के ऐतिहासिक निर्णयों और विकास कार्यों को प्रदर्शित किया जाएगा। इस प्रदर्शनी में विशेष रूप से केंद्र सरकार द्वारा लागू भारतीय न्याय संहिता के तीन नए कानूनों और राज्य की समान नागरिक संहिता (UCC) जैसी उपलब्धियों को भी प्रमुखता से दिखाया जाएगा।

गांवों के बाद अब शहरों में 'जन-जन के द्वार' अभियान

उत्तराखंड राज्य की रजत जयंती के बाद धामी सरकार ने 'जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' अभियान के जरिए न्याय पंचायत स्तर तक पहुंच बनाई है। प्रशासनिक मशीनरी को सीधे जनता की चौखट पर भेजकर समस्याओं का समाधान करने की इस पहल को ग्रामीण इलाकों में जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। अब भाजपा इस मॉडल को शहरी क्षेत्रों में भी लागू करने की योजना बना रही है, ताकि सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) को विकास की लहर से काटा जा सके।

राजनीतिक स्थिरता और विकास का संदेश

अमित शाह के इस दौरे के जरिए भाजपा उत्तराखंड में 'राजनीतिक स्थिरता' का कड़ा संदेश देना चाहती है। पिछले चार वर्षों में धामी सरकार ने जिस तरह से कड़े फैसले लिए हैं और विकास की गति को बनाए रखा है, उसे भाजपा अपने तरकश के सबसे मजबूत तीर के रूप में इस्तेमाल करेगी। इस चुनावी शंखनाद से यह साफ है कि भाजपा 2027 की जंग के लिए अभी से पूरी तरह 'एक्शन मोड' में आ गई है।