क्रूड ऑयल में उबाल: होर्मुज पर ट्रंप के दावे और ईरान की 'विनाशकारी' चेतावनी से 94 डॉलर के पार पहुंचा तेल

क्रूड ऑयल में उबाल: होर्मुज पर ट्रंप के दावे और ईरान की 'विनाशकारी' चेतावनी से 94 डॉलर के पार पहुंचा तेल

मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी अब वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक बड़ा संकट बनती जा रही है। रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और तेहरान के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। ट्रंप द्वारा होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण का दावा करने और ईरान पर अब तक के सबसे कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आग लग गई है। इस भू-राजनीतिक तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमत 94 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जिससे दुनिया भर में एक बार फिर महंगाई और ईंधन संकट का खतरा मंडराने लगा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे की असल वजह क्या है और तेल बाजार मेंतनाव क्यों बढ़ता जा रहा है।

क्या है होर्मुज विवाद और ट्रंप का नया दावा?

अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अस्थायी संघर्ष विराम (Ceasefire) समझौता समाप्त होने के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत के दरवाजे लगभग बंद हो चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि उनका प्रशासन ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से पंगु बनाने के लिए "इकोनॉमिक डी-डे" (Economic D-Day) जैसी सख्त नीतियां लागू कर रहा है। इतना ही नहीं, ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने नौसैनिक नाकेबंदी के जरिए दुनिया के सबसे संवेदनशील तेल मार्ग माने जाने वाले 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया है और इसे अमेरिकी क्षेत्र की तरह देखा जाना चाहिए। ट्रंप के इन तीखे तेवरों और ईरान के व्यापारिक साझीदारों पर भी कड़े सेकेंडरी सैंक्शंस (Secondary Sanctions) लगाने की धमकी के बाद बाजार में तेल की सप्लाई को लेकर भारी अनिश्चितता पैदा हो गई है।

ईरान की 'विनाशकारी' चेतावनी और घटती सप्लाई

अमेरिकी धमकियों और प्रतिबंधों के जवाब में ईरान के तेवर भी बेहद आक्रामक हो गए हैं। ईरानी अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका या उसके सहयोगी देश नए दबाव बनाने की कोशिश करेंगे, तो तेहरान की तरफ से उसका "विध्वंसक" (Devastating) और कड़ा जवाब दिया जाएगा। दोनों पक्षों के बीच चल रहे इस टकराव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली तेल टैंकरों की आवाजाही पर भारी असर पड़ा है। शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, इस अहम मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में घटकर बेहद कम रह गई है। चूंकि दुनिया का लगभग एक-पांचवां हिस्सा तेल और एलएनजी (LNG) इसी रास्ते से होकर गुजरता है, इसलिए यहां यातायात बाधित होने से वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में तेजी आना लाजिमी था।

क्रूड ऑयल की कीमतों पर क्या हो रहा असर?

तनाव के इस नए दौर का सीधा असर जिंस बाजारों (Commodity Markets) पर देखने को मिल रहा है। लगातार पांच सत्रों तक तेजी दर्ज करते हुए अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड उछलकर $94.39 प्रति बैरल के स्तर पर बंद हुआ, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड भी चढ़कर $87.06 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। जानकारों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच यह कूटनीतिक और सैन्य गतिरोध जल्द ही खत्म नहीं होता है, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल के दाम और अधिक ऊंचाई छू सकते हैं। ऊर्जा बाजार के विश्लेषकों का यह भी कहना है कि हालांकि कुछ देश वैकल्पिक पाइपलाइनों और शेल ऑयल के जरिए आपूर्ति संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन होर्मुज संकट का स्थायी समाधान न निकलना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का बड़ा विषय बना हुआ है।

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