पर्सनल इन्सॉल्वेंसी पर डॉ. सुभाष चंद्रा का बड़ा खुलासा, कहा- 'मैंने कोई कर्ज....
मीडिया जगत के दिग्गज और एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर लाइव आकर अपनी पर्सनल इन्सॉल्वेंसी (व्यक्तिगत दिवाला) से जुड़े मामलों पर खुलकर बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से बैंकों या किसी भी कर्जदाता से एक भी रुपये का लोन नहीं लिया था। उनके मुताबिक, वह केवल उन कंपनियों के लिए गारंटर बने थे जो एस्सेल ग्रुप से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई थीं। इस लाइव सत्र के दौरान उन्होंने अपनी संपत्ति, गलतफहमियों और इस पूरी प्रक्रिया से जुड़े हर पहलू पर विस्तार से प्रकाश डाला, जिससे लोगों के मन में चल रहे तमाम भ्रम दूर हो सकें।
व्यक्तिगत कर्ज और गारंटर होने के बीच का असली सच
डॉ. सुभाष चंद्रा ने लाइव बातचीत के दौरान सबसे पहले उधार लेने वाले (Borrower) और गारंटर (Guarantor) के बीच के बुनियादी अंतर को बहुत ही सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने कहा कि जब कोई संस्था या कंपनी व्यापार के विस्तार के लिए बैंक से कर्ज लेती है, तो वह मुख्य उधारकर्ता होती है। उन्होंने कभी भी अपने खुद के निजी उपयोग के लिए बाजार से कोई लोन नहीं लिया था। उन्होंने लगभग 18 से 20 कंपनियों के कर्जों के लिए अपनी व्यक्तिगत गारंटी दी थी। डॉ. चंद्रा ने खुले तौर पर स्वीकार किया कि शायद किसी अन्य व्यक्ति या कंपनी के लोन के लिए गारंटर बनना उनके जीवन की सबसे बड़ी गलती साबित हुई, जिसकी वजह से उन्हें आज इस कठिन परिस्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
संपत्ति के आंकड़ों और व्यक्तिगत नेटवर्थ की पूरी सच्चाई
अपनी व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति पर बात करते हुए डॉ. सुभाष चंद्रा ने बताया कि उन्होंने साल 2016 में संसद में अपनी संपत्ति का जो ब्योरा दिया था, उसमें उनकी कुल संपत्ति लगभग 39 करोड़ रुपये घोषित की गई थी। समय के साथ और विभिन्न परिस्थितियों के कारण मौजूदा समय में उनकी कुल संपत्ति घटकर करीब 31 करोड़ रुपये के आसपास रह गई है। इसमें उनके रहने का एक आवासीय घर भी शामिल है। उन्होंने यह भी साझा किया कि जब कंपनियों के पास कर्मचारियों को देने के लिए पैसे नहीं थे, तब उन्होंने कई बार अपने खुद के पर्सनल अकाउंट से एम्प्लॉइज की सैलरी का भुगतान किया था। यही कारण है कि पिछले एक दशक में उनकी निजी संपत्ति में लगातार गिरावट आई है।
कर्ज माफी की अफवाहों का खंडन और नया स्टार्टअप शुरू करने की योजना
सोशल मीडिया पर चल रही उन चर्चाओं को भी डॉ. चंद्रा ने पूरी तरह खारिज कर दिया जिनमें यह कहा जा रहा था कि बैंकों ने उनका कर्ज माफ कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंकों ने कोई कर्ज माफ नहीं किया है, बल्कि कानूनी और नियमों के दायरे में पूरी प्रक्रिया चल रही है। इस मुश्किल दौर से गुजरने के बाद भी उनका हौसला कम नहीं हुआ है। उन्होंने लाइव के दौरान यह घोषणा की कि वह कानून का पूरी तरह पालन करते हुए अपने कुछ पुराने मित्रों और पार्टनर्स के साथ मिलकर जल्द ही एक नया और बड़ा स्टार्टअप शुरू करने की योजना बना रहे हैं। उनका मानना है कि जीवन में कितनी भी बड़ी चुनौती क्यों न आए, सकारात्मक सोच और कानूनी रास्ते पर चलकर आगे बढ़ते रहना चाहिए।