फेड चीफ के बयान के बाद लगातार दूसरे सत्र में धड़ाम हुआ सोना और चांदी का भाव, जानिए
भारतीय सर्राफा बाजार से इस समय सोने और चांदी के खरीदेदारों के लिए एक बहुत ही बड़ी और हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है, जहां वैश्विक बाजार में आए भूचाल के कारण दोनों कीमती धातुओं के दाम लगातार दूसरे सत्र में औंधे मुंह गिर गए हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख के एक तीखे और अप्रत्याशित बयान के बाद से अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट से लेकर घरेलू वायदा बाजार तकि सोने और चांदी की कीमतों में भारी बिकवाली देखने को मिल रही है। पिछले कुछ हफ्तों से लगातार आसमान छू रहे सोने के तेवर अब ठंडे पड़ते नजर आ रहे हैं, जिससे आम निवेशकों और शादियों के सीजन के लिए खरीदारी करने वाले ग्राहकों के मन में एक ही सवाल सबसे तेजी से घूम रहा है कि आखिर सोने और चांदी की ये कीमतें अब किस निचले स्तर पर जाकर रुकेंगी। इस अचानक आए भूचाल ने सर्राफा कारोबारियों की नींद उड़ा दी है, और हर कोई यह जानना चाहता है कि इस मंदी के पीछे असली आर्थिक समीकरण क्या काम कर रहे हैं।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन के बयान का भारतीय बाजार पर असर
सोने और चांदी के भाव में आई इस अचानक और बड़ी गिरावट के पीछे मुख्य कारण अमेरिकी केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के चीफ द्वारा दिया गया वह बयान है जिसमें उन्होंने निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती को लेकर नरमी बरतने के संकेत दिए हैं। जैसे ही यह वैश्विक अपडेट सामने आया, वैसे ही अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने सोने से अपना पैसा निकालकर डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की तरफ शिफ्ट करना शुरू कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप सोने की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। भारत में भी इसका सीधा और तगड़ा असर देखने को मिला है, जहां मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना और चांदी दोनों ही लाल निशान के साथ कारोबार करते हुए नजर आ रहे हैं। इस वैश्विक उथल-पुथल ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय सर्राफा बाजार किस हद तक अमेरिकी आर्थिक नीतियों और डॉलर के उतार-चढ़ाव से सीधे तौर पर प्रभावित होता है।
घरेलू सर्राफा बाजार में सोने और चांदी के ताजा और गिरे हुए भाव
स्थानीय सराफा बाजारों की बात करें तो पिछले दो सत्रों से जारी इस मंदी के कारण ग्राहकों को कुछ राहत जरूर मिलती दिख रही है, लेकिन निवेशकों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ तौर पर देखी जा सकती हैं। जानकारों के अनुसार, 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने के दामों में प्रति दस ग्राम के हिसाब से बड़ी कमी आई है, वहीं चांदी की चमक भी फीकी पड़ गई है और इसके भाव प्रति किलोग्राम के हिसाब से काफी नीचे लुढ़क गए हैं। स्थानीय स्तर पर ज्वैलर्स का कहना है कि कीमतों के इस प्रकार अचानक टूटने से एक तरफ जहां खुदरा खरीदारों में थोड़ा उत्साह बढ़ा है, वहीं दूसरी तरफ जिन लोगों ने ऊंचे दामों पर सोना खरीदकर निवेश किया था, वे अब पशोपेश की स्थिति में हैं। लोकल बाजारों में ग्राहकों की भीड़ तो नजर आ रही है, लेकिन हर कोई यही सोच रहा है कि क्या यह गिरावट अभी और आगे जारी रहेगी या फिर यहां से बाजार में कोई नया सुधार देखने को मिलेगा।
आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन और बुलियन मार्केट का भविष्य
आधुनिक डिजिटल और जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) के इस दौर में आर्थिक खबरें और कमोडिटी मार्केट के अपडेट्स पल भर में सोशल मीडिया और सर्च इंजन पर छा जाते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए सोने और चांदी में अभी कुछ और दिनों तक उतार-चढ़ाव का यह दौर जारी रह सकता है। वैश्विक महंगाई के आंकड़े, भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतें वे तमाम अन्य कारक हैं जो तय करेंगे कि आने वाले हफ्तों में bullion market की चाल कैसी होगी। निवेशकों को यह सलाह दी जा रही है कि वे बाजार की हर एक ग्लोबल हलचल पर पैनी नजर बनाए रखें और किसी भी प्रकार की जल्दबाजी में बड़ा निवेश करने से बचें, क्योंकि वैश्विक बाजार की अस्थिरता इस समय अपने चरम पर है।
क्या अब खरीदारी करने का यही है सही समय या थोड़ा और करना होगा इंतजार?
सोने और चांदी के दाम गिरने के बाद से ही आम जनता और निवेशकों के बीच यह बहस छिड़ गई है कि क्या इस समय खरीदारी करना फायदेमंद साबित होगा या फिर अभी कीमतों के और नीचे आने का इंतजार करना चाहिए। विशेषज्ञों का एक वर्ग यह मानता है कि लंबी अवधि के लिहाज से सोना हमेशा से एक सुरक्षित निवेश रहा है, और इस तरह की गिरावट बाजार में एंट्री करने का एक सुनहरा मौका देती है। वहीं दूसरी तरफ, कंजर्वेटिव निवेशक यह मान रहे हैं कि जब तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली मौद्रिक नीति बैठक के आधिकारिक आंकड़े सामने नहीं आ जाते, तब तक बाजार में पूरी स्थिरता आने की उम्मीद कम ही है। आने वाले दिनों में शादियों के सीजन की मांग और लोकल बाजार के रुझान यह तय करेंगे कि सोने और चांदी की कीमतें किस दिशा में आगे बढ़ती हैं, जिस पर हर निवेशक और आम आदमी की गहरी नजर टिकी हुई है।