वैश्विक जीडीपी रैंकिंग में कौन-कौन से देश छोड़ रहे हैं पीछे, जानिए पूरी वित्तीय तस्वीर

वैश्विक जीडीपी रैंकिंग में कौन-कौन से देश छोड़ रहे हैं पीछे, जानिए पूरी वित्तीय तस्वीर

वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में इन दिनों भारत की तेज रफ़्तार अर्थव्यवस्था की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं इसे लगातार सराह रही हैं, लेकिन एशियाई महाद्वीप के भीतर कुछ ऐसे भी देश हैं जिनकी विकास दर (GDP Growth Rate) मौजूदा समय में भारत से भी काफी आगे निकल चुकी है। एशियाई विकास बैंक (ADB) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत अपनी मजबूत 7% के आसपास की विकास दर के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है, इसके बावजूद एशिया के कुछ चुनिंदा देश तकनीकी मैन्युफैक्चरिंग, एआई बूम (AI Boom) और मजबूत घरेलू मांग के दम पर रफ्तार के मामले में भारत से आगे दौड़ रहे हैं। आइए इस विस्तृत और विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि वे कौन-से तीन देश हैं जो जीडीपी ग्रोथ के मामले में वर्तमान में भारत से आगे बने हुए हैं और इस आर्थिक प्रगति के पीछे की असली वजहें क्या हैं।

ताइवान: ग्लोबल एआई बूम और टेक एक्सपोर्ट के दम पर नंबर एक पर काबिज

एशियाई देशों की इस सूची में ताइवान (Taiwan) की अर्थव्यवस्था सबसे आगे दौड़ती नजर आ रही है, जहां हालिया आर्थिक पूर्वानुमानों के मुताबिक जीडीपी ग्रोथ रेट दहाई यानी 11% के ऊंचे स्तर को छूने का अनुमान लगाया गया है। ताइवान की इस बेजोड़ रफ्तार के पीछे मुख्य रूप से वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग, सेमीकंडक्टर चिप्स का भारी उत्पादन और अत्याधुनिक तकनीक से जुड़े एक्सपोर्ट्स की सबसे बड़ी भूमिका है। दुनिया भर में डेटा सेंटर्स और एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए जरूरी कलपुर्जे और चिप्स की आपूर्ति करने के कारण ताइवान की अर्थव्यवस्था को जबरदस्त वित्तीय गति मिली है, जिसने इसे एशियाई क्षेत्र में सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना दिया है।

किर्गिस्तान: सेंट्रल एशिया में पब्लिक इन्वेस्टमेंट और कंजम्पशन का कमाल

एशियाई क्षेत्र के भीतर केंद्रीय एशिया का देश किर्गिस्तान (Kyrgyzstan) भी जीडीपी ग्रोथ के मामले में भारत से काफी आगे निकलकर लगभग 8.9% की शानदार विकास दर दर्ज कर रहा है। किर्गिस्तान की इस तेज आर्थिक छलांग के पीछे सरकार द्वारा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Public Investment) में किया गया भारी निवेश और मजबूत प्राइवेट कंजम्पशन (Private Consumption) मुख्य कारण हैं। देश के भीतर बढ़ती आर्थिक गतिविधियों और व्यापारिक समझौतों ने इस मध्य एशियाई देश को वैश्विक मंदी के दौर में भी अपनी विकास दर को उंचे पायदान पर बनाए रखने में पूरी मदद की है।

वियतनाम: मजबूत मैन्युफैक्चरिंग और विदेशी निवेश के बूते दौड़ रही अर्थव्यवस्था

दक्षिण पूर्व एशिया का चमकता सितारा बन चुका वियतनाम (Vietnam) इस फेहरिस्त का तीसरा ऐसा देश है जिसकी इकॉनमी करीब 7.8% की तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है और यह भारत की विकास दर को पीछे छोड़ रहा है। वियतनाम की इस सफलता का सबसे बड़ा आधार उसकी लचीली और मजबूत मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, लगातार बढ़ता हुआ निर्यात (Exports) तथा दुनिया भर की बड़ी कंपनियों द्वारा वहां किया जा रहा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में चीन के विकल्प के रूप में उभरने के कारण वियतनाम पिछले कुछ वर्षों से लगातार निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है, जिसका सीधा असर उसकी मजबूत जीडीपी वृद्धि पर साफ दिखाई दे रहा है।

इन देशों की तुलना में कहां ठहरती है भारत की अर्थव्यवस्था और भविष्य के संकेत

भले ही ये तीन देश प्रतिशत के आंकड़ों के मामले में भारत से आगे चल रहे हैं, लेकिन यह भी एक अकाट्य सत्य है कि भारत का कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP Size) इन छोटे देशों की तुलना में कई गुना बड़ा है, और इतनी विशाल आबादी वाली अर्थव्यवस्था के लिए 7% की स्थिर रफ्तार बनाए रखना अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। भारत की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से अपने विशाल घरेलू बाजार, सेवा क्षेत्र (Services Sector) की मजबूती और लगातार बढ़ते बुनियादी ढांचे के निवेश पर टिकी हुई है, जो लंबी अवधि में देश को एक अत्यंत स्थिर और टिकाऊ आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रही है। वैश्विक निवेशकों और अर्थशास्त्रियों की नजरें अब आने वाले तिमाहियों के आंकड़ों पर टिकी हैं ताकि यह देखा जा सके कि एशियाई बाजार की यह दौड़ आने वाले समय में क्या नया रुख अपनाती है।