एवरग्रैंड के संस्थापक हुई का यान को उम्रकैद: चीन के सबसे बड़े रियल एस्टेट टाइकून का अंत और अर्थव्यवस्था को लगा भारी झटका
ग्लोबल बिजनेस और रियल एस्टेट जगत से इस समय की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर चीन से सामने आ रही है। एक समय में एशिया के सबसे अमीर और चीन के सबसे बड़े प्रॉपर्टी डेवलपर एवरग्रैंड (Evergrande) ग्रुप के संस्थापक हुई का यान (Hui Ka Yan) को चीनी अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। कभी फर्श से अर्श तक का सफर तय करने वाले इस अरबपति टाइकून को बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी, भारी कर्ज छुपाने, घूसखोरी और कॉरपोरेट भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में दोषी पाया गया है। अदालत ने उनके सभी निजी资产 (Assets) को जब्त करने और उनके राजनीतिक अधिकारों को आजीवन समाप्त करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही एवरग्रैंड ग्रुप पर अरबों डॉलर का भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया गया है।
कैसे बर्बाद हुआ चीन का रियल एस्टेट मार्केट और एवरग्रैंड का पतन?
हुई का यान ने साल 1996 में एवरग्रैंड की नींव रखी थी और देखते ही देखते अंधाधुंध कर्ज (Debt-fuelled growth model) के दम पर इसे चीन की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी बना दिया था। यह कंपनी चीन की तेज आर्थिक वृद्धि का प्रतीक बन चुकी थी, लेकिन यह मॉडल पूरी तरह से कर्ज और भविष्य की ऊंची कीमतों के उम्मीदों पर टिका हुआ था। साल 2020 के बाद जब ड्रैगन (चीन) की सरकार ने रियल एस्टेट सेक्टर में अत्यधिक उधार और बुलबुले पर लगाम कसने के लिए कड़े नियम लागू किए, तो एवरग्रैंड का यह साम्राज्य ताश के पत्तों की तरह ढह गया। कंपनी पर 300 बिलियन डॉलर (लगभग 25 लाख करोड़ रुपये) से अधिक का भारी कर्ज हो गया और वह अपने कर्ज चुकाने में असमर्थ (Default) हो गई। इस पतन ने पूरे चीनी रियल एस्टेट बाजार में ऐसा भूचाल लाया जिससे आज तक उबर नहीं पाया है।
वित्तीय धोखाधड़ी और जनता की गाढ़ी कमाई पर संकट
जांच एजेंसियों और अदालत के अनुसार, हुई का यान ने अपनी कंपनियों के वित्तीय आंकड़ों में भारी हेराफेरी की थी और परिसंपत्तियों (Assets) को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया था, जबकि देनदारियों को छुपाया गया था। इस धोखाधड़ी में उनके परिवार के सदस्य और कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे, जिन्हें अदालत ने 22 महीने से लेकर 18 साल तक की सजा सुनाई है। एवरग्रैंड के दिवालिया होने और प्रोजेक्ट्स बीच में ही रुक जाने के कारण लाखों आम नागरिकों और निवेशकों की जिंदगीभर की जमा पूंजी डूब गई। इस ऐतिहासिक सजा के बाद विश्लेषकों का मानना है कि बीजिंग सरकार ने यह कड़ा संदेश देने की कोशिश की है कि देश की आर्थिक स्थिरता से खिलवाड़ करने वाले कितने भी बड़े रसूखदार क्यों न हों, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।