ट्रंप की 'D-day' वाली धमकी और भू-राजनीतिक तनाव से चढ़ा तेल का बाजार: क्रूड ऑयल में आई जोरदार तेजी, जानिए क्या है इसके पीछे की पूरी वजह

ट्रंप की 'D-day' वाली धमकी और भू-राजनीतिक तनाव से चढ़ा तेल का बाजार: क्रूड ऑयल में आई जोरदार तेजी, जानिए क्या है इसके पीछे की पूरी वजह

वैश्विक कमोडिटी बाजार से इस समय ऊर्जा क्षेत्र को लेकर एक बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार तेजी का रुख देखा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के खिलाफ दिए गए कड़े बयानों और नए आर्थिक प्रतिबंधों की चेतावनियों के बाद तेल के बाजार में भूचाल आ गया है। विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है, जिससे यह पिछले कुछ हफ्तों के अपने उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गया है। इस अचानक आई तेजी से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट और महंगाई बढ़ने की चिंताएं एक बार फिर से गहरी हो गई हैं।

ट्रंप की 'Economic D-Day' वाली धमकी और मध्य पूर्व का तनाव

कच्चे तेल की कीमतों में इस अचानक आई 5% तक की तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता हुआ तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और 'इकोनॉमिक डी-डे' (Economic D-Day) जैसी बड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापारिक संबंध रखेगा या वित्तीय सहायता देगा, उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इसके अलावा, रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को लेकर दोनों पक्षों के बीच गतिरोध और तनाव गहराता जा रहा है, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशक ऊर्जा बाजार में किसी लंबी अनिश्चितता की आशंका जता रहे हैं, जिसका सीधा असर क्रूड ऑयल के दामों पर पड़ रहा है।

कमजोर डॉलर और रूस-यूक्रेन संघर्ष का भी बाजार पर प्रभाव

मध्य पूर्व के तनाव के अलावा मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की चाल और रूस-यूक्रेन संघर्ष भी कच्चे तेल की कीमतों को समर्थन दे रहे हैं। डॉलर सूचकांक में आई कमजोरी के कारण अन्य मुद्राओं वाले देशों के लिए डॉलर में ट्रेड होने वाला कच्चा तेल महंगा हो गया है, जिससे मांग और आपूर्ति के समीकरण प्रभावित हुए हैं। इसके साथ ही, रूस के ऊर्जा बुनियादी ढांचों पर हालिया हमलों के कारण कुछ क्षेत्रों में ईंधन की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। इन सभी वैश्विक कारकों के मिलने से तेल बाजार में बिकवाली के बजाय तेजी का माहौल हावी है, और क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार दूसरे हफ्ते बढ़त की ओर अग्रसर हैं।

भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका क्या होगा असर?

कच्चे तेल की कीमतों में इस प्रकार की तेज वृद्धि भारत जैसी उभरती हुई और ऊर्जा आयातक अर्थव्यवस्थाओं के लिए चिंता का विषय बन सकती है। भारत अपनी कुल जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम बढ़ने से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें प्रभावित होने और आयात बिल बढ़ने का जोखिम पैदा हो जाता है। हालांकि, भारतीय नीति निर्माता और तेल विपणन कंपनियां वैश्विक बाजार की हर गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि घरेलू बाजार पर इसका न्यूनतम प्रभाव पड़े।

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