शेयर बाजार में मचा भयंकर हाहाकार, सेंसेक्स धड़ाम से 1100 अंक गिरा

शेयर बाजार में मचा भयंकर हाहाकार, सेंसेक्स धड़ाम से 1100 अंक गिरा

दलाल स्ट्रीट और शेयर बाजार से इस वक्त देश भर के निवेशकों के लिए एक बेहद डरावनी और बुरी खबर सामने आ रही है, जिसने छोटे-बड़े तमाम निवेशकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में आज कारोबार के दौरान अचानक एक ऐसा भयंकर तूफान आया कि निवेशकों की गाढ़ी कमाई से बने लगभग 10 लाख करोड़ रुपए पलक झपकते ही शेयर बाजार के रास्ते हवा में स्वाहा हो गए। बंबई स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स (Sensex) भारी बिकवाली के दबाव में एक झटके में 1100 से अधिक अंकों का गोता लगा गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty) भी बुरी तरह लुढ़ककर निचले स्तरों पर बंद हुआ। इस अचानक आए वित्तीय भूचाल से मार्केट में कोहराम मच गया है और हर कोई यह जानने के लिए बेचैन है कि आखिर दुनिया की सबसे तेज उभरती अर्थव्यवस्था वाले हमारे देश के शेयर बाजार में यह अचानक इतना बड़ा हाहाकार क्यों मच गया। आइए विस्तार से जानते हैं इस भारी गिरावट के पीछे के उन 7 प्रमुख और महत्वपूर्ण कारणों को, जिन्हें समझना हर निवेशक के लिए इस समय बेहद जरूरी है।

1. वैश्विक बाजारों से मिले बेहद कमजोर संकेत और अमेरिकी शेयर बाजारों में भारी बिकवाली का दबाव

भारतीय शेयर बाजार में आज आई इस भीषण गिरावट का सबसे पहला और मुख्य कारण वैश्विक बाजारों (Global Markets) से मिले बेहद निराशाजनक और कमजोर संकेत रहे हैं। अमेरिकी शेयर बाजार यानी वॉल स्ट्रीट पर पिछले कुछ सत्रों से लगातार मुनाफावसूली और बिकवाली का दौर चल रहा था, जिसका सीधा असर एशियाई बाजारों और भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। जब दुनिया के प्रमुख बाजारों में मंदी का माहौल बनता है, तो विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) बिना सोचे-समझे उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की तरफ भागने लगते हैं, और यही पैनिक सेलिंग आज भारतीय बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी को नीचे खींचने का सबसे बड़ा कारण बनी।

2. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार धड़ाधड़ बिकवाली और पैसा निकालने का सिलसिला

शेयर बाजार की चाल को हमेशा से प्रभावित करने वाले विदेशी संस्थागत निवेशकों ने पिछले कुछ दिनों से भारतीय बाजारों में बिकवाली का जो रुख अपनाया हुआ है, उसने घरेलू निवेशकों की नींद उड़ा रखी है। पिछले कई सत्रों से लगातार FIIs भारतीय शेयरों को भारी मात्रा में बेच रहे हैं और अपने निवेश को समेट रहे हैं, जिससे बाजार की लिक्विडिटी पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। जब बड़े फंड हाउस और विदेशी निवेशक किसी बाजार में बिकवाल बन जाते हैं, तो रिटेल निवेशकों का मनोबल भी टूटने लगता है, और आज के कारोबार में इसी भारी बिकवाली के चलते देखते ही देखते निवेशकों के 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक डूब गए।

3. महंगाई के आंकड़े और ब्याज दरों में कटौती को लेकर अमेरिकी फेड रिजर्व के रुख से बढ़ती अनिश्चितता

वैश्विक आर्थिक मोर्चे पर अमेरिकी केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) के ब्याज दरों को लेकर आए ताजा बयानों ने निवेशकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। निवेशक इस बात की उम्मीद लगाए बैठे थे कि वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में जल्द बड़ी कटौती देखने को मिलेगी, जिससे बाजार में सस्ते कर्ज का दौर लौटेगा, लेकिन हालिया महंगाई के आंकड़ों ने फेड रिजर्व को सतर्क रहने पर मजबूर कर दिया है। जब तक वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं, तब तक शेयर बाजारों में इक्विटी निवेशकों का जोखिम बढ़ जाता है, और इसी अनिश्चितता के चलते आज दलाल स्ट्रीट पर जमकर बिकवाली देखने को मिली।

4. रुपये की कमजोरी और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगातार उछाल से बढ़ता आर्थिक दबाव

घरेलू मोर्चे पर विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये (Indian Rupee) की विनिमय दर में कमजोरी का रुख बना हुआ है, जो हमारे आयात को महंगा कर रहा है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में हो रहा उतार-चढ़ाव भारत जैसी अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि हम अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करते हैं। तेल की कीमतें बढ़ने से देश में आयात बिल बढ़ता है, राजकोषीय घाटा प्रभावित होता है और कंपनियों का ऑपरेशनल खर्च बढ़ जाता है, जिसका सीधा और नकारात्मक असर कॉरपोरेट कंपनियों के तिमाही नतीजों और शेयरों के भाव पर पड़ता है।

5. कंपनियों के तिमाही वित्तीय नतीजे उम्मीद से कमजोर रहने और कंपनियों के वैल्यूएशन को लेकर बढ़ती चिंता

पिछले कुछ समय से तमाम बड़ी कंपनियों और ब्लू-चिप शेयरों के तिमाही नतीजे (Quarterly Earnings) बाजार के विश्लेषकों के अनुमानों से थोड़े कमजोर रहे हैं, जिससे निवेशकों में यह डर बैठ गया है कि भारतीय कंपनियों की आय की ग्रोथ धीमी हो रही है। इसके अलावा, पिछले एक-दो साल में बाजार जिस तेज रफ्तार से भागा था, उसके कारण कई शेयरों का वैल्यूएशन (Valuation) काफी अधिक यानी ओवरवैल्यूड हो चुका था। जब बाजार में बहुत ज्यादा तेजी आ जाती है, तो जरा सी भी खराब खबर या वैश्विक मंदी का साया आते ही निवेशक मुनाफावसूली करने लगते हैं और शेयर धड़ाधड़ गिरने लगते हैं, जो आज के दिन साफ-साफ देखने को मिला।

6. तकनीकी कारणों से स्टॉप लॉस ट्रिगर होना और बाजार में पैनिक सेलिंग का हावी होना

शेयर बाजार में जब एक बार गिरावट का दौर शुरू होता है, तो तकनीकी मोर्चे पर कई बड़े ट्रेडर्स और एल्गोरिद्मिक ट्रेडिंग सिस्टम्स के 'स्टॉप लॉस' (Stop Loss) ट्रिगर होने लगते हैं। जैसे ही सेंसेक्स और निफ्टी ने अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तरों को तोड़ा, बाजार में ऑटोमैटिक बिकवाली का एक ऐसा दौर शुरू हो गया जिसने आग में घी का काम किया। इस तकनीकी गिरावट को देखकर छोटे और मझोले निवेशकों में भी घबराहट फैल गई और उन्होंने भी बिना सोचे-समझे अपने शेयर बेचने शुरू कर दिए, जिससे बाजार में एकतरफा हाहाकार मच गया और सेंसेक्स 1100 अंक से ज्यादा नीचे लुढ़क गया।

7. भू-राजनीतिक तनाव और आगामी आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों की सतर्कता

दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और युद्ध जैसे हालातों ने भी वैश्विक सप्लाई चेन और अर्थव्यवस्था की रफ्तार को लेकर निवेशकों के मन में डर पैदा कर रखा है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह का तनाव बढ़ता है, तो सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना और अन्य संपत्तियां महंगी होने लगती हैं और शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे एसेट्स से पैसा बाहर निकलने लगता है। इन सभी 7 प्रमुख कारणों के एक साथ मिलने से आज भारतीय शेयर बाजार में यह भीषण मंदी देखने को मिली है, जिससे एक्सपर्ट्स निवेशकों को इस वक्त बहुत अधिक सोच-समझकर और लंबी अवधि के नजरिए से ही निवेश करने की सलाह दे रहे हैं।