आरबीआई के रेपो रेट बढ़ाते ही एक्शन में आए ये दिग्गज बैंक
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट (Repo Rate) से जुड़े अहम फैसले लेते ही देश का पूरा बैंकिंग सेक्टर एक बार फिर से बेहद सक्रिय हो गया है और बैंकों के बीच ग्राहकों को लुभाने की एक नई होड़ शुरू हो गई है। केंद्रीय बैंक के इस कदम का सीधा असर अब आम जनता की जेब और उनकी बचतों पर दिखने लगा है, क्योंकि रेपो रेट में बदलाव की आहट मिलते ही देश के कई प्रमुख सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों ने अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी (Fixed Deposit) ब्याज दरों में ताबड़तोड़ बढ़ोतरी करने की घोषणा कर दी है। जो बैंक कुछ समय पहले तक कम ब्याज दरें दे रहे थे, वे अब अपने ग्राहकों को टिकए रखने और नया डिपॉजिट जुटाने के लिए एफडी पर 8% तक का आकर्षक रिटर्न ऑफर कर रहे हैं। जिन नागरिकों ने अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित जगहों पर निवेश करने का मन बनाया है, उनके लिए यह समय बेहद खास साबित हो सकता है। आइए इस विस्तृत और विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि किन-किन बैंकों ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है और इस पूरे वित्तीय फेरबदल से आम निवेशकों को आखिर क्या-क्या बड़े फायदे मिलने वाले हैं।
क्या है रेपो रेट बढ़ने और बैंकों के एक्शन के पीछे का पूरा आर्थिक गणित?
जब भी भारतीय रिजर्व बैंक अपनी नीतिगत दरों यानी रेपो रेट में संशोधन करता है, तो देश के तमाम कमर्शियल बैंकों के लिए कर्ज देना और डिपॉजिट स्वीकार करना महंगा या सस्ता हो जाता है। मौजूदा आर्थिक दौर में जब महंगाई को नियंत्रित करने और बैंकिंग प्रणाली में लिक्विडिटी (तरलता) को संतुलित रखने की बात आती है, तो बैंक तुरंत अपने फंड जुटाने के तरीकों को बदलते हैं। इसी कड़ी में, जब बैंकों को अधिक पूंजी की आवश्यकता होती है, तो वे एफडी की ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर देते हैं ताकि अधिक से अधिक लोग बैंकों में अपने पैसे जमा करें। यही मुख्य वजह है कि जैसे ही आरबीआई के अगले कदमों के संकेत मिले, देश के बड़े बैंकों ने बिना किसी देरी के अपनी विभिन्न अवधियों वाली फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम्स पर ब्याज दरों को बढ़ाना शुरू कर दिया। इसका सीधा फायदा उन मध्यम वर्गीय परिवारों और वरिष्ठ नागरिकों को मिल रहा है जो शेयर बाजार के जोखिम भरे सफर से दूर रहकर अपनी गाढ़ी कमाई पर एक निश्चित और गारंटीड आय प्राप्त करना चाहते हैं।
किन प्रमुख बैंकों ने बढ़ाई हैं एफडी की ब्याज दरें और क्या हैं नए आंकड़े?
हाल ही में जिन प्रमुख बैंकों ने अपनी एफडी दरों में संशोधन किया है उनमें एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank), स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के अलावा कुछ प्रमुख स्मॉल फाइनेंस बैंक और प्राइवेट बैंक सबसे आगे चल रहे हैं। इन बैंकों द्वारा अब 1 साल से लेकर 3 साल और 5 साल तक की अलग-अलग अवधियों वाली एफडी पर ब्याज दरों में 0.25% से लेकर 0.50% तक की सीधी बढ़ोतरी की गई है। उदाहरण के लिए, अब कई बैंक आम नागरिकों को सामान्य एफडी पर 7.2% से 7.5% तक का ब्याज दे रहे हैं, जबकि वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) के लिए यही दरें बढ़कर 7.7% से 8.1% के ऊंचे दायरे में पहुंच गई हैं। बैंकों की इन नई दरों के लागू होने से निवेशकों को कम समय में ही अपने निवेश पर पहले की तुलना में काफी ज्यादा रिटर्न मिलने की पूरी उम्मीद बंध गई है, जिससे बाजार में उत्साह का माहौल है।
सामान्य निवेशकों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए क्या हैं इसके खास मायने?
वित्तीय विशेषज्ञों का यह मानना है कि ब्याज दरों के इस दौर में फिक्स्ड डिपॉजिट निवेशकों के लिए सबसे मु मुफीद विकल्प बन गया है, खासकर उनके लिए जो अपनी सेवानिवृत्ति (Retirement) के बाद मिलने वाले पैसों या पेंशन की बचत को सुरक्षित रखना चाहते हैं। वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाला अतिरिक्त आधा प्रतिशत ब्याज उनकी मासिक या त्रैमासिक आय को बढ़ाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। इसके अलावा, टैक्स-सेविंग एफडी (Tax-Saving FD) का विकल्प चुनने वाले निवेशकों को न केवल आकर्षक ब्याज दर का लाभ मिलता है, बल्कि इनकम टैक्स एक्ट के तहत उन्हें वित्तीय वर्ष में कर छूट का फायदा भी मिल जाता है। बैंक इस समय अलग-अलग स्पेशल डेज या अमृत कलश जैसी विशेष योजनाएं भी चला रहे हैं, जिनमें निवेश करने पर निवेशकों को सबसे अधिक ब्याज दरों का फायदा मिल रहा है।
निवेश करने से पहले किन बातों का रखें ध्यान और कैसे उठाएं पूरा लाभ?
यदि आप भी इन बढ़े हुए ब्याज दरों के दौर में बैंक एफडी में अपने पैसे निवेश करने का मन बना रहे हैं, तो कुछ महत्वपूर्ण बातों को पहले ही जांच लेना बेहद समझदारी होगा। सबसे पहले अपने नजदीकी बैंकों की तुलना करें और यह देखें कि कौन सा बैंक किस अवधि पर सबसे ज्यादा रिटर्न दे रहा है, क्योंकि हर बैंक की अपनी अलग योजनाएं होती हैं। इसके अलावा, यदि आप समय से पहले एफडी को तोड़ते हैं (Premature Withdrawal), तो बैंक कुछ पेनल्टी काट सकते हैं, इसलिए अपनी वित्तीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही अवधि (Tenure) का चयन करें। डीआईसीजीसी (DICGC) के नियमों के तहत देश के हर शेड्यूल्ड बैंक में आपका 5 लाख रुपये तक का निवेश पूरी तरह से सुरक्षित रहता है, जिससे आपको सुरक्षा को लेकर भी किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। इस समय उठाया गया एक सही वित्तीय कदम आपके भविष्य को आर्थिक रूप से बेहद मजबूत और सुरक्षित बना सकता है।