जोमैटो का बड़ा फैसला: कैश ऑन डिलीवरी (COD) ऑर्डर करने पर अब ग्राहकों की जेब ढीली करेगी कंपनी

जोमैटो का बड़ा फैसला: कैश ऑन डिलीवरी (COD) ऑर्डर करने पर अब ग्राहकों की जेब ढीली करेगी कंपनी

ऑनलाइन फूड डिलीवरी की दुनिया में रोज नए प्रयोग और नियम देखने को मिल रहे हैं, और ग्राहकों की सुविधा के लिए जानी जाने वाली दिग्गज फूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो (Zomato) ने एक बार फिर अपने प्लेटफॉर्म के नियमों में एक बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव किया है। यदि आप भी घर बैठे अपने पसंदीदा रेस्टोरेंट से खाना ऑर्डर करते वक्त ऑनलाइन पेमेंट करने के बजाय 'कैश ऑन डिलीवरी' (Cash on Delivery - COD) के विकल्प को चुनना पसंद करते हैं, तो अब यह आदत आपको थोड़ी महंगी पड़ने वाली है। जोमैटो ने अपने उन ग्राहकों के लिए एक नया अतिरिक्त शुल्क यानी एक्स्ट्रा चार्ज लगाने का फैसला किया है जो डिजिटल भुगतान के बजाय ऑर्डर मिलते वक्त नकद पैसे चुकाना पसंद करते हैं। कंपनी के इस ताजा फैसले के बाद से ऑनलाइन ऑर्डर करने वाले ग्राहकों के बीच चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है, क्योंकि इस नियम से उन लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा जो आज भी ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के मुकाबले कैश पेमेंट पर ज्यादा भरोसा करते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि जोमैटो के इस नए फैसले के पीछे की क्या वजह है और अब ग्राहकों को COD चुनने पर कितना अतिरिक्त शुल्क चुकाना होगा।

#जोमैटो द्वारा कैश ऑन डिलीवरी पर अतिरिक्त चार्ज वसूलने की क्या है पूरी योजना

भारत के डिजिटल पेमेंट मार्केट में पिछले कुछ वर्षों में क्रांतिकारी बदलाव आया है और यूपीआई (UPI) के जरिए भुगतान करने का चलन देश के कोने-कोने में फैल चुका है। इसके बावजूद एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जो आज भी ऑनलाइन धोखाधड़ी के डर से या अपनी सहूलियत के चलते खाने का ऑर्डर मिलने पर डिलीवरी ब्वॉय को कैश देना ही सुरक्षित मानता है। लेकिन जोमैटो जैसी बड़ी फूड टेक कंपनियों के लिए कैश ऑन डिलीवरी को मैनेज करना, उसे कलेक्ट करना और कंपनी के खातों तक सुरक्षित पहुंचाना एक बेहद जटिल और खर्चीली प्रक्रिया साबित होती रही है। इसी ऑपरेशनल खर्च और लॉजिस्टिक्स की लागत को संतुलित करने के लिए कंपनी ने अब ग्राहकों से COD ऑर्डर पर अतिरिक्त हैंडलिंग या सर्विस चार्ज वसूलने का निर्णय लिया है। इस नए बदलाव के तहत जब कोई ग्राहक ऐप पर खाना चुनकर पेमेंट के समय 'कैश ऑन डिलीवरी' का विकल्प चुनेगा, तो उसके बिल में एक छोटा सा अतिरिक्त शुल्क ऑटोमैटिक रूप से जुड़ जाएगा।

#ग्राहकों की जेब पर कितना पड़ेगा असर और क्या होगी अतिरिक्त शुल्क की राशि

जोमैटो द्वारा लागू किए गए इस नए नियम के अनुसार, कैश ऑन डिलीवरी का चयन करने वाले ग्राहकों को प्रत्येक ऑर्डर पर कुछ रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे, हालांकि यह राशि बहुत ज्यादा बड़ी नहीं है, लेकिन बार-बार ऑर्डर करने वालों के लिए यह एक अतिरिक्त बोझ जरूर बन सकती है। कंपनी का उद्देश्य इस मामूली शुल्क के जरिए ग्राहकों को डिजिटल पेमेंट यानी यूपीआई, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या वॉलेट का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करना है। जब ग्राहक ऑनलाइन पेमेंट के विकल्प चुनते हैं, तो रेस्टोरेंट और डिलीवरी पार्टनर्स के साथ लेन-देन का हिसाब रखना कंपनी के लिए बेहद आसान हो जाता है और इसमें किसी भी तरह के खुले पैसे (चेंज) की झंझट भी नहीं रहती। जोमैटो के इस कदम को फिनटेक और डिजिटल इकॉनमी को बढ़ावा देने की दिशा में एक और बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन पारंपरिक रूप से कैश पेमेंट पसंद करने वाले उपभोक्ताओं के लिए यह थोड़ा निराशाजनक जरूर हो सकता है।

#डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने और ऑपरेशनल कॉस्ट कम करने की बड़ी रणनीति

कॉर्पोरेट विश्लेषकों का मानना है कि जोमैटो का यह फैसला केवल अतिरिक्त कमाई का जरिया नहीं है, बल्कि इसके पीछे कंपनी की ऑपरेशनल इफिशिएंसी को सुधारने की एक गहरी सोची-समझी रणनीति काम कर रही है। जब डिलीवरी ब्वॉय को कैश इकट्ठा करके कंपनी के डिपो या बैंक में जमा कराना होता है, तो इसमें समय की बर्बादी के साथ-साथ पैसों के हेरफेर या खुले पैसे की समस्या का सामना भी करना पड़ता है। डिजिटल ट्रांजैक्शन से न केवल पारदर्शिता बढ़ती है, बल्कि पूरा सिस्टम पलक झपकते ही पेपरलेस और सुरक्षित तरीके से काम करने लगता है। देश के अधिकांश टियर-1 और टियर-2 शहरों में पहले से ही लोग ऑनलाइन पेमेंट का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन छोटे शहरों या नए ग्राहकों के बीच अभी भी कैश ऑन डिलीवरी का चलन काफी ज्यादा है। कंपनी को उम्मीद है कि इस छोटे से चार्ज के लागू होने के बाद लोग धीरे-धीरे पूरी तरह से डिजिटल भुगतान की तरफ शिफ्ट हो जाएंगे, जिससे कंपनी और ग्राहकों दोनों का समय बचेगा।

#फूड डिलीवरी इंडस्ट्री में अन्य कंपनियों का रुख और भविष्य का ट्रेंड

जोमैटो के इस कदम के बाद अब यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि क्या फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स की अन्य प्रमुख कंपनियां भी इसी रास्ते पर चलेंगी और कैश ऑन डिलीवरी पर शुल्क वसूलना शुरू करेंगी। उद्योग जगत के जानकारों का कहना है कि डिजिटल इकॉनमी की तरफ बढ़ रहे भारत में धीरे-धीरे सभी बड़ी कंपनियां कैश ट्रांजैक्शन को हतोत्साहित करने के लिए ऐसे नियम लागू कर रही हैं, ताकि लॉजिस्टिक्स की लागत को कम किया जा सके। ग्राहकों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे समय के साथ डिजिटल भुगतान के तरीकों से पूरी तरह अभ्यस्त हो जाएं ताकि उन्हें इस तरह के अतिरिक्त शुल्कों से बचाया जा सके। जोमैटो का यह बड़ा फैसला आने वाले दिनों में ऑनलाइन शॉपिंग और फूड डिलीवरी के पूरे ढांचे में एक नया मानक स्थापित करने जा रहा है, जिस पर हर किसी की निगाहें टिकी रहेंगी।

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