जयपुर में काउंटिंग से पहले भाजपा की बाड़ेबंदी शुरू, पार्षद प्रत्याशियों को बसों में भरकर अज्ञात जगह भेजा
जयपुर में काउंटिंग से पहले भाजपा की बाड़ेबंदी शुरू, पार्षद प्रत्याशियों को बसों में भरकर अज्ञात जगह भेजा, 22 सितंबर तक रुकने के निर्देश
राजस्थान की राजधानी जयपुर में नगर निगम चुनाव के मतदान संपन्न होने के बाद राजनीतिक हलचलें तेज हो गई हैं। 14 सितंबर को होने वाली वोटों की गिनती और उसके बाद बोर्ड गठन की प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने एक बड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने अपने सभी पार्षद प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी है। जयपुर के शहर भाजपा कार्यालय के बाहर अचानक कई बसें मंगाई गईं, जिनमें प्रत्याशियों को बैठाकर सुरक्षित और अज्ञात स्थान के लिए रवाना किया गया। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि चुनाव परिणामों के बाद पार्षदों की खरीद-फरोख्त या उनकी टूट-फूट को रोकने के लिए यह एहतियातन कदम उठाया गया है, ताकि महापौर और उपमहापौर के चुनावों तक पार्टी की स्थिति पूरी तरह से मजबूत बनी रहे।
#जयपुर नगर निगम चुनाव के परिणाम से पहले भाजपा का मास्टर प्लान और बाड़ेबंदी
जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों के लिए हुए चुनावों के बाद अब सभी की निगाहें 14 सितंबर को आने वाले नतीजों पर टिकी हुई हैं। मतों की गिनती से ठीक पहले भाजपा संगठन ने किसी भी तरह का जोखिम न लेते हुए अपने उम्मीदवारों को एकजुट करने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी कार्यालय पहुंचे प्रत्याशियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वे अपने साथ 22 सितंबर तक का जरूरी सामान और कपड़े साथ लेकर आएं। भाजपा जिला नेतृत्व और वरिष्ठ पदाधिकारियों की देखरेख में इन सभी प्रत्याशियों को लग्जरी बसों और अन्य वाहनों के जरिए शहर से बाहर किसी सुरक्षित रिसॉर्ट या कैंप में शिफ्ट किया जा रहा है। इस दौरान कई महिला प्रत्याशी अपने बच्चों और परिवार के साथ इस कैंप में पहुंची हैं, जहां उनके रहने और खाने-पीने के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
#पार्टी पदाधिकारियों ने बताया इसे नियमित 'प्रशिक्षण शिविर' का हिस्सा
इस पूरी बाड़ेबंदी पर जब राजनीतिक सवाल खड़े हुए, तो भाजपा के शहर जिला अध्यक्ष अमित गोयल ने स्पष्ट किया कि इसे किसी प्रकार की राजनीतिकबंदी नहीं बल्कि पार्टी की नियमित कार्यशाला और प्रशिक्षण शिविर का हिस्सा माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव संपन्न होने के बाद सभी प्रत्याशियों को एक मंच पर लाकर पार्टी की आगामी नीतियों, संगठन की रीति-नीति और एक परिवार की तरह साथ रहने के तौर-तरीकों के बारे में प्रशिक्षित किया जाता है। पार्टी का यह भी तर्क है कि चुनाव के बाद पार्षदों को एक साथ रखकर उन्हें स्थानीय निकाय की आगामी कार्यप्रणाली और बैठकों के नियमों से अवगत कराया जाएगा, ताकि वे जनता के विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ा सकें। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक इसे विपक्षी दलों की संभावित सेंधमारी से अपने पार्षदों को सुरक्षित रखने की एक अचूक रणनीति के रूप में देख रहे हैं।
#21 और 22 सितंबर को होने हैं महापौर और उपमहापौर के महत्वपूर्ण चुनाव
राजनीतिक दलों के लिए यह पूरा पखवाड़ा बेहद तनावपूर्ण और व्यस्त रहने वाला है। नियमों के मुताबिक 14 सितंबर को मतों की गिनती पूरी होने के बाद विजयी पार्षदों की तस्वीर साफ हो जाएगी, जिसके तुरंत बाद 21 सितंबर को नगर निगम के महापौर पद के लिए चुनाव आयोजित किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 22 सितंबर को उपमहापौर पद का चुनाव संपन्न होगा। यही वजह है कि परिणाम आने से लेकर शीर्ष पदों के चुनाव तक के इन सात-आठ दिनों का समय राजनीतिक दलों के लिए बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। बहुमत के जादुई आंकड़े को छूने और अपने बोर्ड का गठन सुनिश्चित करने के लिए दोनों ही प्रमुख दल यानी भाजपा और कांग्रेस अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। कांग्रेस खेमा भी अपनी तरफ से रणनीति बनाने और परिणामों के बाद की स्थिति से निपटने के लिए आंतरिक बैठकों का दौर चला रहा है।
#पार्षदों की दिनचर्या और कैंप के भीतर का माहौल
बस में सवार होने से पहले कई पार्षदों ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्हें पार्टी की तरफ से चार से पांच दिनों या उससे अधिक समय तक एक साथ कैंप में रहने के निर्देश मिले हैं। इस दौरान सभी पार्षद एक ही स्थान पर रहकर आपसी संवाद बढ़ा रहे हैं और चुनाव के अनुभवों को साझा कर रहे हैं। पार्टी की तरफ से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कैंप में रहने वाले सभी प्रत्याशियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। अनिश्चितता के इस दौर में जयपुर की राजनीति का पारा काफी हाई हो चुका है, और हर किसी की नजरें अब 14 सितंबर के उस ऐतिहासिक दिन पर टिकी हैं जब यह तय होगा कि गुलाबी शहर की जनता ने किसके सिर पर ताज का सेहरा बांधा है।