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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : कल्पना कीजिए कि अनंत अंतरिक्ष की गहराइयों में एक इंसानी शरीर तैर रहा है। पृथ्वी पर तो मृत्यु के कुछ ही घंटों बाद शरीर पंचतत्व में विलीन होने लगता है, लेकिन क्या ब्रह्मांड के शून्य (Vacuum) में भी ऐसा ही होता है? विज्ञान कहता है कि अंतरिक्ष का वातावरण पृथ्वी से इतना अलग है कि वहां मौत के बाद की प्रक्रिया किसी डरावनी साइंस-फिक्शन फिल्म जैसी हो सकती है। वहां न हवा है, न वायुमंडलीय दबाव और न ही वह नमी, जो सड़ने की प्रक्रिया के लिए जरूरी है।

बिना हवा के उबलने लगता है शरीर का खून?

पृथ्वी पर शरीर के तरल पदार्थों को थामे रखने के लिए वायुमंडलीय दबाव (Atmospheric Pressure) काम करता है। अंतरिक्ष में इस दबाव की भारी कमी है। ऐसे में शरीर के भीतर मौजूद पानी और रक्त तेजी से वाष्पित (Evaporate) होने लगते हैं। नमी के गायब होते ही शरीर सूखकर पूरी तरह सिकुड़ जाता है। यह एक तरह की 'प्राकृतिक ममीकरण' (Natural Mummification) प्रक्रिया है, जो शरीर को गलने के बजाय उसे एक सूखे ढांचे में बदल देती है।

हाड़ कंपा देने वाली ठंड: 24 घंटे में जम जाता है मांस

अंतरिक्ष में अगर शरीर पर सीधी धूप न पड़ रही हो, तो वहां का तापमान शून्य से कई सौ डिग्री नीचे चला जाता है। ऐसी भीषण ठंड में शरीर की गर्मी धीरे-धीरे खत्म होने लगती है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि लगभग 12 से 26 घंटों के भीतर एक इंसानी शव पूरी तरह से पत्थर जैसा जम जाता है। बिना गर्मी और नमी के, विघटन (Decomposition) की सामान्य प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो पाती।

जीवाणुओं का अंत और रेडिएशन का वार

पृथ्वी पर शव को सड़ाने का काम बैक्टीरिया करते हैं, जिन्हें जिंदा रहने के लिए ऑक्सीजन चाहिए। अंतरिक्ष में ऑक्सीजन के अभाव में ये बैक्टीरिया तुरंत दम तोड़ देते हैं, जिससे ऊतकों का गलना रुक जाता है। हालांकि, भले ही शरीर न सड़े, लेकिन वह सुरक्षित नहीं रहता। ब्रह्मांडीय विकिरण (Cosmic Radiation) लगातार शरीर पर प्रहार करता है। सालों-साल तक चलने वाला यह रेडिएशन धीरे-धीरे कोशिकाओं को नष्ट कर देता है और ऊतकों को कमजोर बना देता है।

स्पेस सूट के अंदर क्या होगा?

एक दिलचस्प स्थिति तब पैदा होती है जब शव स्पेस सूट के भीतर हो। सूट के अंदर मौजूद थोड़ी बहुत ऑक्सीजन बैक्टीरिया को कुछ समय तक सक्रिय रख सकती है, जिससे सड़न शुरू तो होगी लेकिन जैसे ही ऑक्सीजन खत्म होगी और तापमान गिरेगा, यह प्रक्रिया भी वहीं थम जाएगी। कुल मिलाकर, अंतरिक्ष में एक शव अनंत काल तक एक 'फ्रोजन ममी' बनकर तैरता रह सकता है।