img

Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) में गहराते युद्ध और ईरान द्वारा 'होर्मुज की खाड़ी' (Strait of Hormuz) में तेल-गैस की सप्लाई बाधित किए जाने के बाद भारत सरकार पूरी तरह से 'एक्शन मोड' में आ गई है। घरेलू रसोई में गैस की किल्लत न हो, इसके लिए केंद्र सरकार ने 'आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955' (ESMA) की शक्तियों का प्रयोग करते हुए एक अभूतपूर्व निर्देश जारी किया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने देश की सभी सरकारी और निजी रिफाइनरियों को आदेश दिया है कि वे अपनी पूरी क्षमता का उपयोग केवल LPG (रसोई गैस) के उत्पादन के लिए करें और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली गैस की कटौती करें।

'हौसला और ईंधन' सुरक्षित रखने की कवायद: पेट्रोकेमिकल्स पर 'ब्रेक'

मंत्रालय द्वारा जारी निर्देश के मुताबिक, रिफाइनरियों को अब प्रोपेन (Propane) और ब्यूटेन (Butane) का इस्तेमाल प्लास्टिक या अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पाद बनाने के लिए करने की मनाही होगी। इन दोनों गैसों का उपयोग अब अनिवार्य रूप से केवल घरेलू रसोई गैस (LPG) बनाने के लिए किया जाएगा। सरकार का यह फैसला रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) जैसी बड़ी निजी रिफाइनरियों और IOC, BPCL, HPCL जैसी सरकारी कंपनियों पर तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। माना जा रहा है कि इससे औद्योगिक क्षेत्र की उत्पादन लागत बढ़ सकती है, लेकिन सरकार की पहली प्राथमिकता देश के 33 करोड़ से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं को निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करना है।

होर्मुज की खाड़ी में फंसे जहाज, 10 दिन का ही बचा था स्टॉक

दरअसल, खुफिया और ट्रेड रिपोर्ट्स से पता चला था कि ईरान-इजरायल युद्ध के कारण भारत आने वाले कई LPG टैंकर होर्मुज की खाड़ी में फंस गए हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 90% रसोई गैस आयात करता है, जिसमें से बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से आता है। कुछ दिन पहले तक देश में केवल 10 से 15 दिनों का ही 'बफर स्टॉक' बचा होने की खबरें थीं। इसी 'सप्लाई शॉक' को देखते हुए मोदी सरकार ने घरेलू उत्पादन (Domestic Production) को अधिकतम स्तर पर पहुँचाने का यह मास्टर प्लान तैयार किया है।

सरकार का दावा: "घबराने की जरूरत नहीं, पर्याप्त है भंडार"

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्थिति की समीक्षा करने के बाद देशवासियों को आश्वस्त किया है कि भारत के पास वर्तमान में करीब 25-30 दिनों का एलपीजी भंडार (Petroleum Product Inventory) मौजूद है। इसके अलावा, सरकार ने अमेरिका, रूस और पश्चिम अफ्रीकी देशों से भी वैकल्पिक सप्लाई के लिए बातचीत तेज कर दी है। सरकार का लक्ष्य है कि जब तक खाड़ी देशों में युद्ध की स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक घरेलू रिफाइनरियों के माध्यम से आपूर्ति की कमी को पूरा किया जाए।

आम जनता पर क्या होगा असर?

सप्लाई में स्थिरता: इस आदेश के बाद स्थानीय स्तर पर एलपीजी की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे सिलेंडर की लंबी वेटिंग से राहत मिलेगी।

कीमतों पर दबाव: हालांकि उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया गया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण हाल ही में हुए ₹60 के इजाफे के बाद कीमतें फिलहाल ऊंची ही बनी रह सकती हैं।

औद्योगिक प्रभाव: पेट्रोकेमिकल सेक्टर में कच्चे माल की कमी से प्लास्टिक, पेंट और अन्य संबंधित उत्पादों की कीमतों में आने वाले समय में बढ़ोतरी देखी जा सकती है।