Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब की सियासत में भूचाल ला देने वाले डीएम गगनदीप सिंह रंधावा आत्महत्या मामले ने अब देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है। पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को एक भावुक और तर्कपूर्ण पत्र लिखा है। बाजवा ने मांग की है कि रंधावा की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट स्वतः संज्ञान (Suo Motu) ले और अपनी निगरानी में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे। बाजवा का आरोप है कि मामला सत्तापक्ष के रसूखदार चेहरे से जुड़ा है, इसलिए राज्य की एजेंसियों से न्याय की उम्मीद बेमानी है।
पूर्व मंत्री पर उत्पीड़न का आरोप, मौत से पहले रंधावा ने खोला था मोर्चा
गगनदीप सिंह रंधावा, जो पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन में जिला प्रबंधक के पद पर तैनात थे, उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाजवा ने पत्र में उल्लेख किया है कि 21 मार्च 2026 को अमृतसर में हुई इस घटना से पहले रंधावा ने एक वीडियो जारी किया था। इस वीडियो में उन्होंने पूर्व मंत्री ललजीत सिंह भुल्लर और उनके करीबियों पर मानसिक प्रताड़ना, दबाव और टेंडर प्रक्रिया में अवैध दखल देने के संगीन आरोप लगाए थे। परिवार का भी यही दावा है कि रंधावा को लगातार धमकाया जा रहा था, जिसके चलते वे टूट गए।
'अधिकारियों को दी थी सूचना, फिर भी मौन रहा प्रशासन' - बाजवा का बड़ा दावा
प्रताप सिंह बाजवा ने अपनी चिट्ठी में प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोलते हुए कहा कि रंधावा ने अपनी जान देने से पहले एमडी और अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर (DC) समेत कई उच्चाधिकारियों को लिखित शिकायतें भेजी थीं। उन्होंने साफ कहा था कि उन पर गलत काम करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। बाजवा ने सवाल उठाया कि जब एक ईमानदार अधिकारी सिस्टम के भीतर गुहार लगा रहा था, तो सरकार ने उसे सुरक्षा क्यों नहीं दी? उन्होंने इसे 'प्रशासनिक विफलता' करार देते हुए कहा कि सत्ता के संरक्षण में मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है।
निष्पक्ष जांच पर संशय: गवाहों को डराने और सबूत मिटाने की आशंका
विपक्ष के नेता ने मुख्य न्यायाधीश को बताया कि वर्तमान स्थिति में पंजाब पुलिस या राज्य की एजेंसियां स्वतंत्र जांच नहीं कर पाएंगी, क्योंकि गृह और सहकारिता विभाग सीधे मुख्यमंत्री के पास हैं। बाजवा ने डर जताया है कि मामले से जुड़े अहम गवाहों को डराया-धमकाया जा सकता है और सबूतों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। उन्होंने कोर्ट से गुहार लगाई है कि मृतक के परिवार को सुरक्षा दी जाए और किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से कोर्ट की निगरानी में जांच कराई जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
यह सिर्फ एक मौत नहीं, ईमानदार अफसरों के मनोबल का सवाल है
बाजवा ने पत्र के अंत में जोर देकर कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की खुदकुशी का नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि सत्ता का दुरुपयोग किस हद तक किया जा रहा है। अगर आज एक ईमानदार अधिकारी को न्याय नहीं मिला, तो भविष्य में कोई भी अफसर निर्भीक होकर काम नहीं कर पाएगा। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से अपील की कि न्याय न केवल होना चाहिए, बल्कि वह होता हुआ जनता को दिखना भी चाहिए।




