अमर योद्धा से रिटायर्ड जज तक, अमिताभ बच्चन ने पिछली 5 मूवीज में निभाए दमदार रोल, OTT पर घर बैठे उठाएं आनंद
बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन दशक दर दशक अपनी अदाकारी से दर्शकों के दिलों पर राज करते आ रहे हैं। बढ़ती उम्र के साथ उनका अभिनय और भी प्रखर, निखरा हुआ तथा प्रभावशाली होता जा रहा है। अपनी हालिया फिल्मों में बिग बी ने जिस तरह के विविध और चुनौतीपूर्ण रोल निभाए हैं, उसने यह साबित कर दिया है कि उनके लिए उम्र महज एक संख्या है। पौराणिक योद्धा से लेकर एक न्यायप्रिय रिटायर्ड जज तक, उन्होंने हर किरदार में जान फूंक दी है। अगर आप सिनेमा के इस महानायक की बेहतरीन अदाकारी के कायल हैं, तो उनकी पिछली पांच शानदार फिल्मों को आपको अपने वीकेंड की वॉचलिस्ट में जरूर शामिल करना चाहिए। आइए जानते हैं अमिताभ बच्चन के इन 5 दमदार किरदारों के बारे में, जिन्हें आप अपने घर पर ही विभिन्न ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर आसानी से देख सकते हैं।
कल्कि 2898 एडी में अश्वत्थामा का अमर और गर्जनापूर्ण अवतार
नाग अश्विन द्वारा निर्देशित फिल्म 'कल्कि 2898 एडी' में अमिताभ बच्चन ने महाभारत के पौराणिक पात्र अश्वत्थामा की भूमिका निभाई है। इस एपिक साइंस-फिक्शन और माइथोलॉजिकल ड्रामा में उनकी स्क्रीन प्रेजेंस इतनी जबरदस्त थी कि युवा दर्शकों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई उनके अभिनय का मुरीद हो गया। कई फीट ऊंचे, अपार शक्तिशाली और श्राप के बोझ को सहते हुए अमर योद्धा के रूप में अमिताभ बच्चन ने अपनी आवाज, बॉडी लैंग्वेज और एक्शन सीक्वेंस से दर्शकों को रोमांचित कर दिया। इस फिल्म में उन्होंने प्रभास और दीपिका पादुकोण जैसे दिग्गजों के बीच भी अपनी एक अलग छाप छोड़ी। यदि आप उनके इस शक्तिशाली और पौराणिक स्वरूप का आनंद लेना चाहते हैं, तो यह फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम करने के लिए उपलब्ध है।
गणपत में एक रहस्यमयी मार्गदर्शक की भूमिका
विकास बहल द्वारा निर्देशित डिस्टोपियन एक्शन-थ्रिलर फिल्म 'गणपत' में अमिताभ बच्चन ने महर्षि/गुरु की एक बहुत ही महत्वपूर्ण और रहस्यमयी भूमिका निभाई है। फिल्म की कहानी भविष्य की एक ऐसी दुनिया पर आधारित है जहां अमीर और गरीब के बीच की खाई बहुत बढ़ चुकी है। इस चुनौतीपूर्ण परिवेश में अमिताभ बच्चन का किरदार नायक टाइगर श्रॉफ के लिए एक मार्गदर्शक और उम्मीद की किरण बनकर सामने आता है। हालांकि फिल्म में उनकी स्क्रीन टाइमिंग कम थी, लेकिन उनकी भारी आवाज, गहरी आंखें और संजीदा संवाद अदायगी ने हर दृश्य को बेहद खास और प्रभावशाली बना दिया। उनका यह किरदार दर्शकों को पूरी कहानी से जोड़े रखने का काम करता है। यह फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध है।
ऊंचाई में उम्र के पड़ाव पर दोस्ती की अमर मिसाल
सूरज बड़जात्या की भावुक और प्रेरक फिल्म 'ऊंचाई' में अमिताभ बच्चन ने अमित श्रीवास्तव नाम के एक लेखक की भूमिका निभाई है। यह फिल्म ढलती उम्र में तीन दोस्तों की एक ऐसे ट्रैक पर जाने की यात्रा को दर्शाती है, जहाँ पहुँचना युवा अवस्था में भी आसान नहीं होता। अपने स्वर्गीय दोस्त की आखिरी इच्छा पूरी करने के लिए माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप तक जाने की यह कहानी दोस्ती, जज्बे और आत्म-खोज का एक अद्भुत संगम है। अमिताभ बच्चन ने एक ऐसे बुजुर्ग का किरदार निभाया है जो अपनी शारीरिक सीमाओं और भावनात्मक पीड़ाओं से लड़ते हुए आगे बढ़ता है। उनके अभिनय की सादगी और भावनात्मक गहराई ने दर्शकों के दिलों को छू लिया। इस प्रेरणादायक और खूबसूरत फिल्म का आनंद आप जी5 (ZEE5) पर ले सकते हैं।
ब्रह्मास्त्र पार्ट वन शिवा में गुरु का ओजस्वी किरदार
अयान मुखर्जी के एस्ट्रावर्स ब्रह्मांड की पहली फिल्म 'ब्रह्मास्त्र: पार्ट वन - शिवा' में अमिताभ बच्चन ने 'गुरु' का किरदार निभाया, जो 'ब्रह्मांश' के प्रमुख हैं। इस फैंटेसी-एक्शन फिल्म में बिग बी प्रभास और अन्य दिव्यास्त्रों के रक्षक के रूप में नजर आते हैं। उनके हाथ में 'प्रभास्त्र' (रोशनी का अस्त्र) होता है। फिल्म में उनका लुक, उनकी चाल-ढाल और संवाद बोलने की शैली इतनी प्रभावशाली है कि वह पूरे सीन में छा जाते हैं। युवा पीढ़ी को प्राचीन भारतीय अस्त्रों और उनके महत्व से परिचित कराने वाले इस किरदार में अमिताभ बच्चन की गरिमा साफ झलकती है। रणबीर कपूर और आलिया भट्ट के साथ उनका तालमेल भी काफी पसंद किया गया। इस विजुअल ट्रीट और आधुनिक पौराणिक कथा को आप डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर देख सकते हैं।
झुंड में विजय बारसे का परिवर्तनकारी सफर
नागराज मंजुले द्वारा निर्देशित खेल-ड्रामा फिल्म 'झुंड' में अमिताभ बच्चन ने विजय बारसे का किरदार निभाया है, जो 'स्लम सॉकर' के संस्थापक पर आधारित है। फिल्म में वह झोपड़पट्टी के वंचित, भटके हुए और नशे की गिरफ्त में फंसे युवाओं को फुटबॉल के जरिए एक नया जीवन और दिशा देने का काम करते हैं। इस फिल्म में बिग बी का अभिनय इतना वास्तविक और जमीनी है कि दर्शक खुद को उस माहौल से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। बिना किसी तामझाम के, एक साधारण कोट-पैंट पहने और आंखों में सहानुभूति लिए अमिताभ बच्चन ने इस रोल को अमर बना दिया। उनका कोर्टरूम सीन और आखिरी भाषण सिनेमा इतिहास के बेहतरीन पलों में से एक माना जाता है।