न सेट, न स्टूडियो… चलती ट्रेन बनी शूटिंग लोकेशन, 'रामायण' से पहले दूरदर्शन के इस शो ने मचाई थी धूम
टेलीविजन के सुनहरे दौर की जब भी बात होती है, तो रामानंद सागर की 'रामायण' और बीआर चोपड़ा की 'महाभारत' का नाम सबसे पहले जुबान पर आता है। इन पौराणिक धारावाहिकों ने देश के घर-घर में जो इतिहास रचा, उसकी मिसाल आज भी दी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन एतिहासिक शोज के आने से बहुत पहले दूरदर्शन पर एक ऐसा अनोखा शो प्रसारित होता था, जिसकी शूटिंग के लिए न तो कोई भारी-भरकम सेट तैयार किया गया और न ही किसी एयरकंडीशंड स्टूडियो का इस्तेमाल हुआ। यह एक ऐसा प्रोजेक्ट था, जिसकी शूटिंग चलती हुई ट्रेन के डिब्बों में की गई थी और इस शो ने टीवी इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया था।
जब पटरियों पर दौड़ा कैमरों का कारवां
दूरदर्शन के शुरुआती दौर में मेकर्स के पास आज की तरह आधुनिक तकनीक और बड़े बजट का अभाव हुआ करता था, लेकिन रचनात्मकता की कोई कमी नहीं थी। ऐसे समय में जब टीवी पर सामाजिक मुद्दों और पारिवारिक कहानियों को तरजीह दी जाती थी, एक निर्देशक ने लीक से हटकर कुछ ऐसा करने की सोची, जिसकी कल्पना करना भी उस दौर में आसान नहीं था। चलती ट्रेन को स्टूडियो बना देना और यात्रियों के बीच से किरदारों को चुनकर कैमरे के सामने लाना एक बेहद साहसिक कदम था। इस अनोखे प्रयोग ने न सिर्फ दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया, बल्कि टीवी की दुनिया में यह साबित कर दिया कि बेहतरीन कहानी कहने के लिए बड़े सेट की नहीं, बल्कि मजबूत दृश्यों की जरूरत होती है।
भारतीय टेलीविज़न का वह अनसुना इतिहास
इस क्लासिक शो से जुड़ी यादें आज भी पुराने दर्शकों के जेहन में ताजा हैं। जिस दौर में लोग शाम को टीवी के सामने परिवार के साथ इकट्ठा होते थे, उस समय इस शो का प्रसारण किसी बड़े त्योहार से कम नहीं होता था। ट्रेन की खिड़कियों से बाहर निकलते खूबसूरत नजारे, पटरियों की खड़खड़ाहट के बीच गूंजते संवाद और डिब्बों के अंदर का वह जीवंत माहौल इस धारावाहिक की यूएसपी हुआ करता था। कलाकारों ने बिना किसी खास सुख-सुविधा के बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में शूटिंग की और अपनी अदायगी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यही वजह है कि 'रामायण' के आने से काफी पहले ही इस शो ने लोगों के दिलों पर अपनी गहरी छाप छोड़ दी थी।