सांप भी नहीं ले सका धरमपाल की जान, 100 साल की उम्र, पढ़ें मंगला गौरी व्रत की ये कथा
श्रावण मास के पवित्र दिनों में माता मंगला गौरी की उपासना का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि सच्चे मन से व्रत और पूजन करने वाले भक्तों पर मां की असीम कृपा बरसती है, जिससे उनके जीवन के सभी संकट टल जाते हैं। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में रहने वाले 100 वर्षीय धरमपाल की कहानी कुछ ऐसी ही है, जिस पर मां मंगला गौरी की ऐसी कृपा बरसी कि मौत भी उनके सामने बेबस नजर आई। इस अनोखी घटना ने एक बार फिर लोगों की आस्था को और अधिक मजबूत कर दिया है।
100 साल की उम्र में मौत को चकमा
गांव के बुजुर्ग धरमपाल की उम्र इस समय पूरे 100 वर्ष हो चुकी है। इस ढलती उम्र में भी उनकी जीवन शक्ति और मजबूत इच्छाशक्ति हर किसी को हैरान कर देती है। हाल ही में उनके साथ एक ऐसी घटना घटी, जिसे सुनकर हर कोई अचंभित है। एक रात सोते समय एक जहरीले सांप ने उन्हें डस लिया। आमतौर पर इस उम्र में जहरीले सांप का काटना किसी भी व्यक्ति के लिए घातक साबित हो सकता है और कुछ ही पलों में जान जा सकती है। लेकिन धरमपाल के मामले में कुदरत का कुछ और ही करिश्मा देखने को मिला और सांप भी उनकी जान नहीं ले सका।
जब घर में मचा हड़कंप और सामने आई मंगला गौरी की आस्था
धरमपाल को सांप काटने की खबर मिलते ही पूरे परिवार में कोहराम मच गया। आनन-फानन में परिजनों ने उन्हें अस्पताल ले जाने की तैयारी की और झाड़-फूंक का सहारा भी लिया गया। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इतना जहरीला सांप काटने के बावजूद धरमपाल के शरीर पर जहर का कोई खास असर नहीं हुआ और वह पूरी तरह होश में बने रहे। डॉक्टरों ने भी इसे एक मेडिकल चमत्कार माना, वहीं स्थानीय ग्रामीण इसे सीधे तौर पर मां मंगला गौरी के आशीर्वाद और उनके द्वारा सावन मास में किए गए निष्ठावान व्रतों का प्रताप मान रहे हैं।
मंगला गौरी व्रत की पौराणिक कथा और उसका महत्व
हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, सावन के महीने में प्रत्येक मंगलवार को रखे जाने वाले मंगला गौरी व्रत का विशेष फल प्राप्त होता है। यह व्रत मुख्य रूप से माता पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप को समर्पित होता है। पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक साहूकार था जिसके पास अपार संपत्ति थी लेकिन कोई संतान नहीं होने के कारण वह दुखी रहता था। ईश्वर की कृपा से उसे संतान की प्राप्ति तो हुई, लेकिन भविष्यवाणियां थीं कि सोलहवें वर्ष में उसकी मृत्यु हो जाएगी। मां मंगला गौरी के व्रत और देवी की आराधना के प्रभाव से ही उस बालक की आयु लंबी हुई और उसके जीवन पर मंडरा रहा मृत्यु का संकट हमेशा के लिए टल गया। तभी से सुहागिन महिलाएं और भक्त अपने परिवार की लंबी उम्र और आरोग्यता के लिए इस व्रत को पूरी श्रद्धा के साथ करते आ रहे हैं।
चमत्कार या अटूट विश्वास का परिणाम
धरमपाल की लंबी उम्र और इस जानलेवा हादसे से सुरक्षित बच निकलने की चर्चा पूरे इलाके में फैल चुकी है। आज के आधुनिक वैज्ञानिक युग में जहां लोग हर घटना के पीछे तर्क तलाशते हैं, वहीं इस घटना ने साबित कर दिया कि अटूट आस्था और भगवान के प्रति समर्पण इंसान को कठिन से कठिन परिस्थितियों से बाहर निकाल सकता है। 100 साल की उम्र में सांप के जहर को मात देने वाले धरमपाल आज पूरे क्षेत्र के लोगों के लिए आस्था और प्रेरणा का एक जीवित प्रतीक बन चुके हैं।