कौन हैं ‘हनुमान अंश’ में ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान...’ गाने वाले नेत्रहीन सिंगर?

कौन हैं ‘हनुमान अंश’ में ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान...’ गाने वाले नेत्रहीन सिंगर?

भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई बार कुछ ऐसी जादुई आवाजें अचानक से सामने आती हैं जो सीधे सुनने वाले की रूह में उतर जाती हैं। जब बॉक्स ऑफिस पर छोटे बजट की फिल्में बड़े कारनामे करती हैं, तो उनके पीछे केवल कलाकारों का अभिनय ही नहीं बल्कि पर्दे के पीछे काम करने वाले उन गुमनाम फरिश्तों का संगीत भी होता है जो अपनी कला से फिल्म की आत्मा को जीवंत कर देते हैं। हाल ही में बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ने वाली ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘हनुमान अंश’ में एक ऐसा ही चमत्कारी वाकया हुआ है। इस फिल्म में शामिल एक बेहद भावुक और भक्ति से ओत-प्रोत गाना ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान...’ इन दिनों देश के हर कोने में गूंज रहा है और सोशल मीडिया से लेकर हर संगीत प्रेमी की जुबान पर छाया हुआ है। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले भजन को अपनी जादुई आवाज देने वाले गायक कोई बहुत बड़े कमर्शियल प्लेबैक सिंगर नहीं हैं, बल्कि एक ऐसे साधारण और जमीन से जुड़े नेत्रहीन कलाकार हैं जिन्होंने अपनी कठिन संघर्ष यात्रा के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। कभी जो शख्स गांवों की धूल भरी गलियों में तंबूरा बजाकर और चौपालों पर छोटे-मोटे भजन गाया करता था, आज वह अपनी इस अनूठी गायकी के बल पर देश के लाखों-करोड़ों दिलों पर राज कर रहा है।

गुमनामी के अंधेरे से निकलकर सीधे सिल्वर स्क्रीन तक पहुंचने की असाधारण दास्तान

किसी भी इंसान के जीवन में यदि आंख की रोशनी न हो, तो उसकी दुनिया को अंधकारमय मान लिया जाता है, लेकिन कुछ लोग अपने भीतर के विजन से ऐसी रोशनी पैदा करते हैं जो पूरी दुनिया को रोशन कर देती है। ‘हनुमान अंश’ फिल्म के इस लोकप्रिय भजन को गाने वाले इस नेत्रहीन गायक का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। जन्म से या बचपन से ही दृष्टिबाधित होने के कारण उनके जीवन में शुरू से ही अनगिनत मुश्किलें थीं, लेकिन उनके पिता और संगीत के प्रति उनका अगाध प्रेम उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। उन्होंने कभी यह शिकायत नहीं की कि उनके पास दुनिया को देखने के लिए आंखें नहीं हैं, बल्कि उन्होंने अपनी आवाज को ही अपनी आंख और अपनी पहचान बना लिया। गांव-गांव घूमकर छोटे-मोटे कार्यक्रमों में भाग लेना, ग्रामीण मेलों में तंबूरा लेकर हनुमान जी के भजन गाना और अपनी रोजी-रोटी का जुगाड़ करना ही उनकी रोजमर्रा की जिंदगी थी। उन्हें यह तनिक भी अंदाजा नहीं था कि एक दिन उनकी यही सादगी और भक्ति से भरी आवाज किसी बड़े बैनर की फिल्म तक पहुंचेगी और उन्हें रातों-रात एक राष्ट्रीय पहचान दिला देगी।

तंबूरे की थाप से लेकर रिकॉर्डिंग स्टूडियो तक का यह सफर

इस नेत्रहीन गायक के जीवन में तब एक बहुत बड़ा और सुखद मोड़ आया जब ‘हनुमान अंश’ फिल्म के संगीतकारों और निर्देशकों की नजर या कान उनकी इस अनूठी लोक-शैली पर पड़े। फिल्म के मेकर्स एक ऐसे गायक की तलाश कर रहे थे जिसके गले में कोई कृत्रिम बनावट न हो बल्कि जिसकी आवाज में एक सच्ची पुकार, एक नैसर्गिक तड़प और अटूट भक्ति का भाव झलकता हो। जब उन्होंने इस फकीर मिजाज गायक को तंबूरे के साथ गाते हुए सुना, तो वे समझ गए कि उन्हें अपनी फिल्म के लिए वही रीयल हीरा मिल चुका है जिसकी उन्हें तलाश थी। जब इस गायक को मुंबई के अत्याधुनिक रिकॉर्डिंग स्टूडियो में लाया गया, तो पहली बार उन्होंने इतने बड़े पैमाने पर माइक्रोफोन के सामने गाना गाया। रिकॉर्डिंग के दौरान जब उन्होंने अपनी आंखें बंद करके तंबूरे की थाप पर ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान...’ के बोल गाए, तो स्टूडियो में मौजूद हर एक शख्स की आंखें नम हो गईं। उनकी आवाज में मौजूद वह दर्द और समर्पण इतना सच्चा था कि उसे बिना किसी रीटेके के फाइनल कर लिया गया, और आज वही गाना इस फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी बन चुका है।

‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान...’ गाने ने इंटरनेट पर मचाया तहलका, हर कोई हुआ मु मुरीद

जब से यह फिल्म रिलीज हुई है और यह गाना लोगों के सामने आया है, तब से इंटरनेट पर इस नेत्रहीन गायक की ही चर्चा हो रही है। लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उनके संघर्ष और उनकी इस दैवीय आवाज के वीडियो लगातार शेयर कर रहे हैं। दर्शकों का कहना है कि आज के ऑटो-ट्यून और मशीनी संगीत के दौर में इस तरह की रूहानी आवाज सुनना किसी वरदान से कम नहीं है। इस गाने के बोल और इस गायक की भावपूर्ण प्रस्तुति ने लोगों के दिलों में हनुमान जी के प्रति आस्था को और अधिक प्रगाढ़ कर दिया है। ग्रामीण परिवेश से निकलकर बड़े पर्दे तक का यह सफर इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि यदि आपके भीतर सच्ची कला और लगन है, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको मुकाम हासिल करने से नहीं रोक सकती। आज देश के बड़े-बड़े संगीतकार और फिल्मी हस्तियां इस गायक की सादगी और उनके सुरों के कायल हो चुके हैं, और वे लगातार उनकी सराहना कर रहे हैं।

संघर्ष के बाद मिली इस सफलता ने बदल दी इस साधारण फकीर गायक की दुनिया

कभी दो वक्त की रोटी और अपने तंबूरे के सहारे जीवन की गाड़ी खींचने वाले इस नेत्रहीन कलाकार की जिंदगी अब पूरी तरह से बदल चुकी है। हालांकि इतनी बड़ी सफलता मिलने के बाद भी उनके स्वभाव में वही विनम्रता, वही सादगी और वही जमीन से जुड़ापन बरकरार है जो पहले दिन था। उनका यह मानना है कि यह उनकी अपनी कोई महिमा नहीं है, बल्कि यह सब उस बजरंगबली की कृपा है जिनके भरोसे उन्होंने हमेशा गाना गाया था। ‘हनुमान अंश’ की इस सफलता ने देश के उन तमाम छिपे हुए और बेसहारा कलाकारों को भी एक नई उम्मीद दी है जो संसाधनों की कमी या शारीरिक अक्षमता के कारण गुमनामी के अंधेरे में जीने को मजबूर हैं। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि टैलेंट किसी पहचान का मोहताज नहीं होता, और सही समय आने पर मेहनत का फल हर इंसान को जरूर मिलता है। इस नेत्रहीन गायक की यह प्रेरणादायक गाथा आने वाले कई दशकों तक लोगों को संघर्ष करने और कभी हार न मानने की सीख देती रहेगी।

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