महिलाओं में बढ़ती चिंता का विषय बना ब्रेस्ट कैंस

महिलाओं में बढ़ती चिंता का विषय बना ब्रेस्ट कैंस

आज के आधुनिक दौर में जब स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लगातार बढ़ रही है, तब भी महिलाओं के बीच स्तन कैंसर या ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) को लेकर कई तरह के डर, संकोच और गलतफहमियां समाज में आज भी गहराई से जुड़ी हुई हैं। जैसे ही किसी महिला को इस गंभीर बीमारी का पता चलता है, उसके और उसके परिवार के मन में सबसे पहले अनगिनत सवाल और मौत का खौफ पैदा हो जाता है कि आखिर इसका इलाज कैसे होगा, क्या डॉक्टर इस बीमारी को पूरी तरह हरा सकते हैं और इसमें कीमोथेरेपी कितनी लंबी और दर्दनाक प्रक्रिया होती है। इन तमाम गंभीर सवालों के सटीक और वैज्ञानिक जवाब देने के लिए देश के जाने-माने और अनुभवी ऑन्कोलॉजिस्ट व कैंसर विशेषज्ञ ब्रेस्ट कैंसर के संपूर्ण उपचार (Breast Cancer Treatment Process) पर विस्तार से प्रकाश डालते हैं। विशेषज्ञों का स्पष्ट रूप से यह कहना है कि यदि स्तन कैंसर की पहचान शुरुआती चरणों यानी स्टेज 1 या स्टेज 2 में ही हो जाए, तो यह बीमारी पूरी तरह से ठीक हो सकती है और मरीज एक सामान्य व स्वस्थ जीवन जी सकता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान, एडवांस सर्जिकल तकनीकों और टार्गेटेड थेरेपी के आ जाने के बाद से कैंसर के इलाज का पूरा परिदृश्य ही बदल चुका है, जिससे मरीजों की रिकवरी रेट में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिला है।

शुरुआती जांच और स्टेजिंग का महत्व: डॉक्टर कैसे तय करते हैं मरीज के लिए सही ट्रीटमेंट प्लान?

जब कोई मरीज ब्रेस्ट कैंसर के संदिग्ध लक्षणों, जैसे स्तन में गांठ या सूजन के साथ डॉक्टर के पास पहुंचता है, तो सबसे पहले उसकी सटीक डायग्नोसिस (Diagnosis) यानी जांच की प्रक्रिया शुरू की जाती है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, मैमोग्राफी, सोनोग्राफी, कोर नीडल बायोप्सी और पेट स्कैन जैसी आधुनिक जांचों के जरिए यह पता लगाया जाता है कि कैंसर किस प्रकार का है, उसका आकार कितना है और वह शरीर के दूसरे अंगों तक फैला है या नहीं। इस पूरी रिपोर्ट के आधार पर ट्यूमर की स्टेज तय की जाती है और फिर एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम (जिसमें सर्जन, मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट और रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट शामिल होते हैं) मिलकर उस मरीज के लिए सबसे असरदार ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल तैयार करती है। हर मरीज का शरीर और कैंसर का प्रकार अलग होता है, इसलिए इलाज का तरीका भी हर महिला के लिए कस्टमाइज्ड होता है। कुछ मामलों में इलाज की शुरुआत सीधे सर्जरी से होती है, तो कुछ मामलों में ट्यूमर के आकार को छोटा करने और कैंसर कोशिकाओं को नियंत्रित करने के लिए पहले दवाइयां या कीमोथेरेपी दी जाती है, जिसे नियोएडजुवेंट थेरेपी कहा जाता है।

ब्रेस्ट कैंसर की सर्जरी और ऑन्कोप्लास्टिक तकनीक: अब अंग बचाने के विकल्प भी हैं उपलब्ध

पुराने समय में ब्रेस्ट कैंसर की सर्जरी का मतलब पूरे स्तन को निकालना होता था, जिससे महिलाओं में मानसिक रूप से भी गहरा आघात पहुंचता था और शारीरिक बनावट में बदलाव आ जाता था। लेकिन आज के आधुनिक मेडिकल युग में 'ब्रेस्ट कंजर्वेशन सर्जरी' (Breast Conservation Surgery) और 'ऑन्कोप्लास्टिक सर्जरी' तकनीक आ चुकी है, जिसने इलाज के तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। डॉक्टर बताते हैं कि यदि ट्यूमर शुरुआती अवस्था में है और केवल एक सीमित हिस्से में है, तो सर्जन केवल कैंसरग्रस्त हिस्से को ही बाहर निकालते हैं और बाकी के स्वस्थ हिस्से को पूरी तरह सुरक्षित रखते हैं, जिससे महिला के शारीरिक स्वरूप और आत्मविश्वास पर ज्यादा असर नहीं पड़ता। जिन मामलों में ट्यूमर का आकार बड़ा होता है और पूरा स्तन निकालना जरूरी हो जाता है, वहां प्लास्टिक सर्जन की मदद से तुरंत या बाद में रीकंस्ट्रक्शन सर्जरी (Breast Reconstruction) करके शरीर के आकार को दोबारा ठीक किया जा सकता है। यह तकनीक महिलाओं में मानसिक संबल बनाए रखने और सामान्य जीवन जीने की ओर लौटने में बहुत मददगार साबित हो रही है।

कीमोथेरेपी कितनी लंबी चलती है और इसके साइड इफेक्ट्स से निपटने के क्या हैं वैज्ञानिक तरीके?

मरीजों के मन में सबसे बड़ा डर कीमोथेरेपी (Chemotherapy) को लेकर होता है कि यह कितने महीने या साल चलेगी और इसके क्या दुष्परिणाम होंगे। इस पर रोशनी डालते हुए विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि कीमोथेरेपी की अवधि और उसका चक्र (Cycles) पूरी तरह से कैंसर के ग्रेड, प्रकार और स्टेज पर निर्भर करता है। आमतौर पर ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी के 4 से 6 चक्र होते हैं, जो हर 2 या 3 हफ्ते के अंतराल पर दिए जाते हैं, यानी कुल मिलाकर यह प्रक्रिया करीब 3 से 6 महीने तक चल सकती है। हालांकि कुछ विशेष मामलों में यह समय थोड़ा कम या ज्यादा भी हो सकता है। कीमोथेरेपी के दौरान बाल झड़ना, कमजोरी, जी मिचलाना और इम्युनिटी कमजोर होना आम साइड इफेक्ट्स हैं, लेकिन आज ऐसी आधुनिक दवाइयां और एंटी-इमीटिक ड्रग्स उपलब्ध हैं जो इन दुष्प्रभावों को बहुत हद तक नियंत्रित कर लेती हैं। कीमोथेरेपी का कोर्स पूरा होने के कुछ महीनों बाद बाल वापस आ जाते हैं और मरीज धीरे-धीरे अपनी सामान्य दिनचर्या और काम में लौट आते हैं।

रेडिएशन थेरेपी, हॉर्मोन थेरेपी और इम्युनोथेरेपी: इलाज के अन्य बेहद महत्वपूर्ण चरण

कीमोथेरेपी और सर्जरी के अलावा ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में रेडिएशन थेरेपी (Radiation Therapy) की भी बहुत बड़ी भूमिका होती है। सर्जरी के बाद बचे हुए हिस्सों में यदि कैंसर कोशिकाओं के दोबारा पनपने का थोड़ा भी जोखिम रहता है, तो हाई-एनर्जी एक्स-रे किरणों के जरिए उन बची हुई कोशिकाओं को पूरी तरह नष्ट किया जाता है, जो आमतौर पर कुछ हफ्तों तक हफ्ते में 5 दिन छोटे सत्रों के रूप में दी जाती है। इसके अलावा, हॉर्मोन रिसेप्टर पॉजिटिव कैंसर के मामलों में हॉर्मोन थेरेपी (Hormone Therapy) दी जाती है जो कई सालों तक टैबलेट के रूप में चल सकती है ताकि बीमारी दोबारा न उभरे। चिकित्सक सलाह देते हैं कि महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले किसी भी बदलाव, गांठ या सूजन को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और नियमित रूप से अपनी सेल्फ-एग्जामिनेशन व मैमोग्राफी करानी चाहिए, क्योंकि समय पर की गई पहचान ही कैंसर के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है।