ब्रिक्स समिट में भी हुई देसी सुपरफूड की धूम, जानिए क्यों दुनिया भर के हेल्थ एक्सपर्ट्स इसे मान रहे हैं सेहत का असली खजाना
अंतरराष्ट्रीय मंचों और कूटनीतिक बैठकों की जब भी बात आती है, तो आमतौर पर बड़ी राजनीतिक संधियों, व्यापारिक समझौताओं और वैश्विक अर्थव्यवस्था की चर्चाएं ही जेहन में आती हैं। लेकिन इन दिनों दुनिया की निगाहें जिस महत्वपूर्ण ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर टिकी हैं, वहां से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने भारत के पारंपरिक खानपान और विशेष तौर पर बिहार की माटी से जुड़े देसी सुपरफूड 'सत्तू' को वैश्विक पटल पर ला खड़ा किया है। बड़े-बड़े देशों के राष्ट्रध्यक्षों और वैश्विक निवेशकों के बीच जब भारतीय सांस्कृतिक और पारंपरिक आहार की बात चली, तो भुने हुए चने से तैयार होने वाला यह साधारण सा सत्तू अपनी बेजोड़ पोषक तत्वों और एनर्जी बूस्टर गुणों के कारण दुनिया भर के दिग्गजों के बीच चर्चा का मुख्य केंद्र बन गया। आधुनिक लाइफस्टाइल और भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग जहां एक तरफ महंगे और विदेशी सप्लीमेंट्स के पीछे भाग रहे हैं, वहीं भारत के पारंपरिक सत्तू ने यह साबित कर दिया है कि हमारी जड़ों में छिपा खानपान ही सबसे बेहतरीन और टिकाऊ सेहत का राज है।
#वैश्विक मंच ब्रिक्स समिट में कैसे पहुंची बिहार के पारंपरिक सत्तू की गूंज
जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य, पोषण सुरक्षा और टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर विचार-विमर्श हो रहा था, तब भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने दुनिया के सामने पारंपरिक भारतीय सुपरफूड्स की ताकत को रेखांकित किया। इसी चर्चा के दौरान बिहार के पारंपरिक सत्तू को विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया, जिसे ग्रामीण भारत की 'सुपर फूड' केंचुए के रूप में जाना जाता है। ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जब सत्तू के पोषण मूल्यों, प्रोटीन की मात्रा और इसके प्राकृतिक ठंडक देने वाले गुणों के बारे में जाना, तो वे भी हैरान रह गए। एक तरफ जहां बड़े कॉर्पोरेट ब्रांड्स आर्टिफिशियल एनर्जी ड्रिंक्स बेचकर युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं, वहीं बिहार के गांवों में सदियों से खाया जाने वाला यह देसी सत्तू बिना किसी केमिकल के शरीर को तुरंत ताकत और ताजगी देने का काम करता है। वैश्विक मंच पर इस पारंपरिक व्यंजन की चर्चा होने से न केवल बिहार की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान मिला है, बल्कि पूरी दुनिया में इसके व्यावसायिक और स्वास्थ्य संबंधी महत्व के नए द्वार भी खुल गए हैं।
#सत्तू को क्यों कहा जाता है देसी सुपरफूड और इसमें छिपे हैं कौन से चमत्कारी पोषक तत्व
बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड के घर-घर में बेहद चाव से खाया जाने वाला सत्तू असल में उच्च गुणवत्ता वाले भुने हुए चने या जौ को पीसकर तैयार किया जाता है, जो पोषक तत्वों का एक ऐसा खजाना है जिसका मुकाबला कोई भी आधुनिक पैकेज्ड फूड नहीं कर सकता। आयुर्वेद और आधुनिक पोषण विज्ञान दोनों ही इस बात की पुष्टि करते हैं कि सत्तू में प्लांट-बेस्ड प्रोटीन, फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम और कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। गर्मियों के दिनों में शरीर को लू और डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए सत्तू का शर्बत किसी वरदान से कम नहीं माना जाता है, क्योंकि यह पेट को तुरंत ठंडक पहुंचाता है और पाचन तंत्र को मजबूत रखता है। इसमें मौजूद कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स शरीर में धीरे-धीरे ऊर्जा छोड़ते हैं, जिससे लंबे समय तक थकान महसूस नहीं होती और पेट भरा हुआ रहता है। यही वजह है कि फिटनेस फ्रीक लोग और एथलीट भी अब प्रोटीन पाउडर को छोड़कर इस देसी सुपरफूड को अपनी डाइट का अहम हिस्सा बना रहे हैं।
#वजन घटाने से लेकर डायबिटीज कंट्रोल तक, अचूक औषधि है बिहार का सत्तू
आज के समय में जब पूरी दुनिया मोटापे, मधुमेह (डायबिटीज) और अनियंत्रित जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से जूझ रही है, तब सत्तू का सेवन एक बहुत ही आसान और असरदार घरेलू उपाय के रूप में उभरकर सामने आया है। सत्तू का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) बहुत कम होता है, जिसका मतलब यह है कि इसे खाने के बाद खून में शुगर का स्तर अचानक नहीं बढ़ता, और यही खूबी इसे डायबिटीज के मरीजों के लिए एक आदर्श आहार बनाती है। इसके अलावा, इसमें मौजूद भरपूर मात्रा में फाइबर मेटाबॉलिज्म को तेज करता है और बार-बार भूख लगने की आदत को कंट्रोल करता है, जिससे वजन घटाने की प्रक्रिया बेहद आसान हो जाती है। जो लोग अपने बढ़ते हुए वजन और पेट की चर्बी से परेशान हैं, यदि वे सुबह के वक्त एक गिलास ठंडा सत्तू का पानी या नमकीन घोल पी लें, तो उन्हें दिनभर ऊर्जा मिलती है और कैलोरी इनटेक भी नियंत्रण में रहता है।
#बनाने में बेहद आसान और जेब पर भारी नहीं, हर वर्ग की पहली पसंद है सत्तू
सत्तू की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जितना पौष्टिक और गुणकारी है, उतना ही किफायती और बनाने में आसान भी है। इसके लिए किसी बड़े शेफ या जटिल रेसिपी की जरूरत नहीं होती; बस पानी में सत्तू, थोड़ा सा भुना जीरा, काला नमक, नींबू का रस और कटी हुई प्याज-हरी मिर्च मिलाने से कुछ ही सेकंड में एक शानदार और ताकतवर ड्रिंक तैयार हो जाती है। बिहार और आसपास के क्षेत्रों में तो सत्तू से लिट्टी, पराठे, और कचौड़ी जैसी स्वादिष्ट चीजें भी बनाई जाती हैं जो स्वाद और सेहत का एक बेहतरीन संगम पेश करती हैं। कम लागत में उच्च पोषण देने वाले इस देसी आहार ने यह साबित कर दिया है कि अच्छी सेहत के लिए महंगे हेल्थ क्लब्स या विदेशी सप्लीमेंट्स की कोई जरूरत नहीं है, बल्कि हमारी अपनी पारंपरिक रसोई में ही सबसे बड़ी ताकत छिपी हुई है।
#वैश्विक बाजार में देसी खानपान का बढ़ता दबदबा और भविष्य की संभावनाएं
ब्रिक्स समिट जैसे प्रतिष्ठित मंच पर बिहार के सत्तू की चर्चा होना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब दुनिया भर का झुकाव ऑर्गेनिक, नेचुरल और ट्रेडिशनल फूड्स की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। भारत सरकार भी 'वोकल फॉर लोकल' और मिलेट्स के साथ-साथ ऐसे पारंपरिक सुपरफूड्स को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रमोट करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। आने वाले दिनों में जिस तरह से वैश्विक स्तर पर फिटनेस और नेचुरल डाइट को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, उसमें बिहार का यह सत्तू देश की सीमाओं को लांघकर दुनिया के हर कोने में अपनी मजबूत पहचान बनाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। ग्लोबल मंच पर मिली इस सराहना ने न केवल बिहार के स्थानीय किसानों और उत्पादकों में नया उत्साह भरा है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि हमारी संस्कृति की जड़ें जितनी गहरी हैं, उनके फल उतने ही मीठे और स्वास्थ्यवर्धक हैं।