खराब पाचन और पेट की समस्याओं से राहत पाने के लिए योगासन क्यों हैं बेहद जरूरी

खराब पाचन और पेट की समस्याओं से राहत पाने के लिए योगासन क्यों हैं बेहद जरूरी

भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली, गलत खानपान, अनियंत्रित समय पर भोजन करना और लगातार एक जगह बैठकर काम करने की आदत ने आज के समय में अधिकांश लोगों को पेट की बीमारियों का मरीज बना दिया है। सुबह उठते ही पेट साफ न होना, दिनभर गैस बनना, खट्टी डकारें आना, पेट में भारीपन रहना और खाया-पिया ठीक से न पचना आम बात बन गई है। जब हमारा पाचन तंत्र (Digestive System) कमजोर हो जाता है, तो शरीर को पोषक तत्व मिलना बंद हो जाते हैं और कई तरह की बीमारियां घेरने लगती हैं। अंग्रेजी दवाओं और चूर्ण-फांकों के सहारे कुछ समय के लिए राहत तो मिल जाती है, लेकिन समस्या जड़ से खत्म नहीं होती। ऐसे में हमारे प्राचीन और वैज्ञानिक योग विज्ञान में ऐसे कई असरदार योगासन बताए गए हैं जो बिना किसी साइड इफेक्ट के पेट की हर समस्या को चुटकियों में दूर कर सकते हैं। यदि आप भी गैस, कब्ज और बदहजमी से तंग आ चुके हैं, तो अपनी दिनचर्या में इन 4 खास योगासन को जरूर शामिल करना चाहिए।

1. वज्रासन: एकमात्र ऐसा योगासन जिसे भोजन के तुरंत बाद भी किया जा सकता है और जो पाचन को बनाता है फौलादी

जब भी पाचन क्रिया को सुधारने की बात आती है, तो सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण आसन 'वज्रासन' (Vajrasana) का नाम आता है। यह योग जगत का एक ऐसा अनोखा आसन है जिसे बाकी सभी आसनों के विपरीत पेट भरने यानी भोजन करने के तुरंत बाद भी आसानी से किया जा सकता है। इसे करने की विधि बेहद सरल है; आपको बस अपने दोनों घुटनों को मोड़कर जमीन पर बैठना होता है और अपने कूल्हों को एड़ियों पर टिकाना रीढ़ की हड्डी को सीधा रखकर बैठना होता है। जब आप भोजन के बाद 10 से 15 मिनट वज्रासन में बैठते हैं, तो शरीर के निचले हिस्से यानी पैरों की तरफ जाने वाले रक्त का प्रवाह कम होकर पेट के अंगों और पाचन तंत्र की ओर बढ़ जाता है। इससे आंतों की कार्यप्रणाली तेज हो जाती है, पाचक रस बेहतर तरीके से स्रावित होते हैं और खाया हुआ भोजन बहुत आसानी से पच जाता है। जिन लोगों को अक्सर गैस और एसिडिटी की समस्या रहती है, उनके लिए वज्रासन एक अचूक उपाय है।

2. पवनमुक्तासन: पेट में फंसी गैस को बाहर निकालने और कब्ज को जड़ से खत्म करने का अचूक उपाय

पेट की तमाम समस्याओं में सबसे ज्यादा कष्टदायक होती है पेट में गैस का बनना और उसका बाहर न निकलना, जिससे सीने में जलन और भारीपन होने लगता है। 'पवनमुक्तासन' (Pawanmuktasana) नाम से ही स्पष्ट है कि यह आसन पेट की वायु या गैस को मुक्त यानी बाहर करने का काम करता है। इस योगासन को करने के लिए पीठ के बल सीधे लेट जाएं, गहरी सांस लेते हुए अपने दोनों घुटनों को मोड़कर छाती की तरफ लाएं और हाथों से कसकर पकड़ लें। इसके बाद सिर को उठाकर अपनी नाक को घुटने से लगाने का प्रयास करें। कुछ सेकंड इसी स्थिति में रुककर सामान्य सांस लेते रहें और फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आ जाएं। यह आसन पेट की मांसपेशियों पर हल्का दबाव डालता है, जिससे आंतों की मसाज होती है, कब्ज की शिकायत दूर होती है और पेट में फंसी हुई गैस आसानी से पास हो जाती है। नियमित रूप से सुबह खाली पेट इस आसन को करने से पेट हमेशा हल्का और साफ रहता है।

3. भुजंगासन: रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने के साथ-साथ पाचन अंगों को मजबूती देने वाला बेहतरीन अभ्यास

सांप के फन उठाने की मुद्रा जैसा दिखने वाला 'भुजंगासन' (Bhujangasana) पेट के स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस आसन को करने के लिए पेट के बल जमीन पर लेट जाएं, अपनी हथेलियों को छाती के पास जमीन पर रखें और सांस लेते हुए शरीर के ऊपरी हिस्से यानी सिर और सीने को ऊपर की ओर उठाएं। इस दौरान आपकी नाभि जमीन से सटी रहनी चाहिए। भुजंगासन करने से पेट के अंगों पर खिंचाव पड़ता है, जिससे लिवर, अग्न्याशय (Pancreas) और आंतें सक्रिय हो जाती हैं। जब ये अंग ठीक से काम करते हैं, तो शरीर में भोजन को पचाने वाले एंजाइम्स का उत्पादन बेहतर होता है। इसके अलावा, यह आसन मेटाबॉलिज्म (Metabolism) को बूस्ट करता है, जिससे वजन नियंत्रित रखने में भी बहुत मदद मिलती है। जिन लोगों की पाचन शक्ति बहुत कमजोर है, उन्हें रोज सुबह भुजंगासन का अभ्यास जरूर करना चाहिए।

4. मरिआरासन या कैट-काऊ पोज: आंतों की बेहतर मूवमेंट और पेट की सूजन को कम करने के लिए जादुई योगासन

चौथे और बेहद महत्वपूर्ण योगासन के रूप में 'मरिआरासन' (Marjaryasana) या जिसे कैट-काऊ पोज (Cat-Cow Pose) भी कहा जाता है, पेट की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। इसे करने के लिए योगा मैट पर बिल्ली की तरह हाथों और घुटनों के बल आ जाएं। सांस भरते हुए अपनी रीढ़ की हड्डी को नीचे की ओर झुकाएं और सिर ऊपर उठाएं, फिर सांस छोड़ते हुए पीठ को ऊपर की ओर गोलाई में उठाएं और ठोड़ी को छाती से लगाएं। इस प्रक्रिया को लगातार दोहराने से पेट के अंदरूनी अंगों की बहुत अच्छी स्ट्रेचिंग होती है। यह आसन आंतों में अटके हुए मलमूत्र को बाहर निकालने में मदद करता है, कब्ज की पुरानी समस्या को ठीक करता है और पेट की सूजन को कम करता है। इन चारों योगासन को यदि आप अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बना लेते हैं, तो कुछ ही दिनों में आपको अपने पेट और पाचन तंत्र में एक अद्भुत सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।