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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) के खिलाफ भारत सरकार ने एक निर्णायक जंग शुरू कर दी है। देश भर के सरकारी अस्पतालों में अब 9 से 14 वर्ष की किशोरियों के लिए एचपीवी (Human Papillomavirus) वैक्सीन मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही है। बाजार में इस टीके की एक खुराक की कीमत करीब 10,000 रुपये तक है, लेकिन अब यह सरकारी केंद्रों पर पूरी तरह निःशुल्क मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रशिक्षण पूरा कर चुकी हैं और कई शहरों में चरणबद्ध तरीके से टीकाकरण अभियान शुरू हो चुका है।

9 से 14 साल की उम्र ही क्यों है सबसे खास?

विशेषज्ञों के अनुसार, एचपीवी संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण है। यह वायरस शरीर की कोशिकाओं के डीएनए को प्रभावित करता है। कम उम्र में टीकाकरण सबसे अधिक प्रभावी होता है क्योंकि इस आयु वर्ग में किशोरियों की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immunity) वायरस के खिलाफ बेहतर प्रतिक्रिया देती है। सरकार का मुख्य ध्यान इस समय 9-14 वर्ष की आयु वर्ग पर है ताकि भविष्य में इस जानलेवा बीमारी के खतरे को जड़ से खत्म किया जा सके।

टीकाकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज (Important Documents)

अभिभावकों को अपनी बेटी का मुफ्त टीकाकरण करवाने के लिए किसी लंबी औपचारिक प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं है। इसके लिए केवल उम्र का सत्यापन (Age Verification) अनिवार्य है। आप अस्पताल में निम्नलिखित में से कोई भी एक दस्तावेज दिखा सकते हैं:

आधार कार्ड (सबसे महत्वपूर्ण)

जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate)

स्कूल आईडी कार्ड (School ID)

बाजार में महंगा, सरकारी अस्पताल में मुफ्त

निजी अस्पतालों या खुले बाजार में एचपीवी वैक्सीन का खर्च उठाना कई परिवारों के लिए मुश्किल था। एक डोज की कीमत ₹10,000 होने के कारण लोग इसे टाल देते थे। अब सरकारी अस्पतालों में इसे मुफ्त उपलब्ध कराकर सरकार ने उन लाखों परिवारों को राहत दी है जो आर्थिक तंगी की वजह से अपनी बेटियों को यह सुरक्षा कवच नहीं दे पा रहे थे।

सर्वाइकल कैंसर के जोखिम कारक: क्यों जरूरी है जागरूकता?

एचपीवी संक्रमण के लक्षण शुरुआत में स्पष्ट नहीं होते, इसलिए बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाली किशोरियों और महिलाओं में यह संक्रमण लंबे समय तक बना रह सकता है। इसके अलावा, सुरक्षा सावधानियों का अभाव और लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन भी जोखिम को बढ़ा सकता है। यह टीका न केवल कैंसर से बचाता है बल्कि भविष्य के लिए एक सुरक्षा घेरा तैयार करता है।

कैसे लगवाएं टीका?

अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र (CHC/PHC) पर जाकर आप अपनी बेटी के टीकाकरण के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। कई शहरों में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से स्कूलों में भी कैंप लगाकर यह टीका लगाया जा रहा है।