img

Prabhat Vaibhav,Digital Desk : देश की राजधानी दिल्ली और पड़ोसी राज्य हरियाणा में एचआईवी-एड्स (HIV/AIDS) के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य महकमे की नींद उड़ा दी है। पिछले कुछ महीनों में संक्रमण की दर में आई अचानक तेजी के बाद केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारें भी पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गई हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, युवाओं में इस संक्रमण का प्रसार एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। दिल्ली के घने इलाकों और हरियाणा के औद्योगिक बेल्ट में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि इस जानलेवा बीमारी की रोकथाम के लिए समय रहते कड़े कदम उठाए जा सकें।

दिल्ली और हरियाणा में संक्रमण बढ़ने के मुख्य कारण

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों में प्रवासी आबादी का बड़ा हिस्सा रहता है, जहां जागरूकता की कमी और असुरक्षित शारीरिक संबंध संक्रमण फैलने की बड़ी वजह बन रहे हैं। इसके अलावा, नशीली दवाओं का इंजेक्शन के जरिए इस्तेमाल (Injecting Drug Users) भी हरियाणा के कुछ जिलों में एचआईवी प्रसार का प्रमुख कारण बनकर उभरा है। दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों में आईसीटीसी (ICTC) केंद्रों पर आने वाले मरीजों की संख्या में पिछले साल की तुलना में करीब 15 से 20 प्रतिशत का इजाफा देखा गया है, जो सीधे तौर पर खतरे की घंटी है।

सरकार ने कसी कमर, शुरू हुआ विशेष जांच अभियान

संक्रमण की रोकथाम के लिए दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग और हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसाइटी ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाल लिया है। अस्पतालों में मुफ्त जांच और परामर्श की सुविधा को और अधिक सुलभ बनाया जा रहा है। सरकार का मुख्य फोकस अब 'टारगेटेड इंटरवेंशन' (Targeted Intervention) पर है, जिसके तहत उन समूहों की पहचान की जा रही है जो संक्रमण के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं। स्वास्थ्य मंत्री के निर्देशानुसार, दूरदराज के इलाकों और झुग्गी-बस्तियों में मोबाइल वैन के जरिए मुफ्त एचआईवी टेस्टिंग और जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं ताकि प्रारंभिक अवस्था में ही मरीजों की पहचान की जा सके।

एआरटी (ART) केंद्रों पर दबाव और दवाओं की उपलब्धता

बढ़ते मामलों के बीच एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (ART) केंद्रों पर मरीजों का दबाव भी बढ़ गया है। सरकार ने सुनिश्चित किया है कि जीवन रक्षक दवाओं की कमी न होने पाए। डॉक्टरों का कहना है कि एचआईवी अब 'मौत की सजा' नहीं है; यदि समय पर पता चल जाए और नियमित इलाज शुरू हो, तो संक्रमित व्यक्ति भी एक सामान्य और लंबा जीवन जी सकता है। हालांकि, सामाजिक भेदभाव और जानकारी का अभाव अभी भी मरीजों को इलाज से दूर रख रहा है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी लक्षण या संदेह की स्थिति में बिना डरे जांच कराएं, क्योंकि गोपनीयता बनाए रखना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता है।

नया विजन: जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुसार, एड्स को खत्म करने के लिए '95-95-95' के लक्ष्य पर काम किया जा रहा है। इसका अर्थ है कि 95 प्रतिशत संक्रमितों को अपनी स्थिति का पता हो, 95 प्रतिशत का इलाज चल रहा हो और 95 प्रतिशत का वायरल लोड कम हो सके। दिल्ली और हरियाणा में स्कूलों और कॉलेजों के माध्यम से युवाओं को जागरूक करने का एक बड़ा अभियान शुरू किया जा रहा है। विशेषज्ञों की राय है कि जब तक लोग खुलकर इस विषय पर बात नहीं करेंगे और सावधानियां नहीं बरतेंगे, तब तक इस खतरे को पूरी तरह टालना नामुमकिन होगा।