Jitan Ram Manjhi on Tejashwi Yadav: 'लगता है रात वाला उतरा नहीं...'; तेजस्वी की फिसली जुबान पर भड़के जीतन राम मांझी, बोले- नशा इंसान से कुछ भी बुलवा...
बिहार के सियासी गलियारों में बयानों की मर्यादा और तीखे हमलों का दौर एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के एक हालिया बयान को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के दिग्गज नेता और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने ऐसा करारा तंज कसा है कि पटना से लेकर दिल्ली तक राजनीति गरमा गई है। किसी जनसभा और मीडिया संवाद के दौरान तेजस्वी यादव की जुबान फिसलने के बाद हम (HAM) संरक्षक जीतन राम मांझी ने बिना कोई नरमी बरते सीधा व्यक्तिगत हमला बोल दिया। मांझी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि "लगता है रात वाला सुरूर अभी पूरी तरह उतरा नहीं है, और नशा इंसान से कुछ भी करवा या बुलवा सकता है।" मांझी के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में भारी भूचाल आ गया है और महागठबंधन व एनडीए के प्रवक्ता आमने-सामने आ गए हैं।
तेजस्वी यादव की फिसली जुबान: जानिए क्या था वो विवादित बयान?
इस पूरे सियासी संग्राम की जड़ में तेजस्वी यादव का वह बयान है जो उन्होंने हाल ही में एक राजनीतिक कार्यक्रम और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया था। सरकार की नीतियों, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते समय तेजस्वी यादव के मुंह से कुछ ऐसे शब्द निकल गए जो तथ्यात्मक रूप से उलट थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बोलते-बोलते एक सामान्य 'स्लिप ऑफ टंग' (Slip of tongue) था, जिसे तेजस्वी ने बाद में सुधारने का प्रयास भी किया।
लेकिन चुनावी और राजनीतिक खींचतान के इस माहौल में विपक्ष और एनडीए के नेताओं को बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा मिल गया। सोशल मीडिया पर तेजस्वी के उस भाषण की छोटी-सी क्लिप कुछ ही मिनटों में वायरल हो गई। एनडीए के नेताओं ने इसे तेजस्वी के राजनीतिक ज्ञान और गंभीरता की कमी से जोड़ना शुरू कर दिया।
जीतन राम मांझी का तीखा पलटवार: 'रात वाला नशा अभी उतरा नहीं है'
विवादित क्लिप सामने आने के कुछ ही देर बाद केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी ने मीडिया के सामने आकर तेजस्वी यादव पर तीखा हमला बोला। अपने चिर-परिचित ठेठ और बेबाक अंदाज के लिए जाने जाने वाले मांझी ने तेजस्वी के बयानों को उनकी निजी जीवनशैली से जोड़ते हुए बड़ा वार किया।
जीतन राम मांझी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "तेजस्वी जी दिन में जब माइक पकड़ते हैं, तो उन्हें खुद होश नहीं रहता कि वे क्या बोल रहे हैं और किसके खिलाफ बोल रहे हैं। लगता है कि पिछली रात वाला नशा अभी तक पूरी तरह से उतरा नहीं है। जब व्यक्ति किसी तरह के नशे या मानसिक भ्रम में होता है, तो उसकी जुबान इसी तरह फिसलती है। नशा इंसान से कुछ भी करवा सकता है और कुछ भी कहलवा सकता है।"
मांझी ने आगे कहा कि बिहार की जनता इतनी समझदार है कि वह भली-भांति जानती है कि कौन गंभीर नेता है और कौन केवल हवा-हवाई राजनीति कर रहा है। उन्होंने तेजस्वी को सलाह दी कि वे मीडिया और जनता के सामने आने से पहले अपनी सोच और जुबान दोनों को संतुलित करने का अभ्यास करें।
बिहार में शराबबंदी के बीच 'नशे' वाले बयान के गहरे सियासी मायने
बिहार की राजनीति में 'नशे' या शराब से जुड़ा कोई भी तंज महज साधारण बयान नहीं होता, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक निहितार्थ होते हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में पिछले एक दशक से पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है। ऐसे में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही एक-दूसरे के नेताओं पर शराबबंदी की विफलता और गुप्त सेवन को लेकर छींटाकशी करते रहे हैं।
जीतन राम मांझी द्वारा तेजस्वी पर सीधे 'नशे' का आरोप लगाना सीधे तौर पर उनकी व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचाने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। मांझी इससे पहले भी कई बार शराबबंदी कानून की समीक्षा और ताड़ी को लेकर बयान दे चुके हैं, लेकिन इस बार उनका सीधा निशाना लालू परिवार के उत्तराधिकारी पर था।
राजद (RJD) का पलटवार: 'उम्र के इस पड़ाव पर मांझी जी ने खो दिया है मानसिक संतुलन'
जीतन राम मांझी के इस विवादित और तल्ख बयान के तुरंत बाद राष्ट्रीय जनता दल की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। राजद के वरिष्ठ प्रवक्ताओं और नेताओं ने मांझी के बयान को अमर्यादित, घटिया और बुजुर्ग नेता की हताशा करार दिया है।
राजद नेताओं ने कहा कि "जीतन राम मांझी जी उम्र के उस पड़ाव पर पहुंच चुके हैं जहां वे केवल खबरों में बने रहने के लिए इस तरह की हल्की और बेतुकी बयानबाजी करते हैं। तेजस्वी यादव बिहार के युवाओं के सबसे लोकप्रिय नेता हैं और वे बेरोजगारी, महंगाई और शिक्षा जैसे ज्वलंत मुद्दों पर बात कर रहे हैं। एनडीए के पास जब तेजस्वी के सवालों का कोई जवाब नहीं होता, तो वे व्यक्तिगत चरित्र हनन और इस तरह के ओछे बयानों पर उतर आते हैं।"
राजद प्रवक्ताओं ने पलटवार करते हुए यह भी याद दिलाया कि मांझी खुद कई बार अपने बयानों से पलटने और अजीबो-गरीब टिप्पणियां करने के लिए जाने जाते हैं, इसलिए उन्हें दूसरों को नैतिकता और गंभीरता का पाठ पढ़ाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
नीतीश-भाजपा गठबंधन बनाम तेजस्वी: व्यक्तिगत हमलों से गर्माया माहौल
बिहार की राजनीति में पिछले कुछ महीनों से वैचारिक बहसों की जगह व्यक्तिगत और पारिवारिक हमलों ने ले ली है। एक तरफ जहां तेजस्वी यादव लगातार नीतीश सरकार और एनडीए की 'डबल इंजन' व्यवस्था को हर मोर्चे पर विफल साबित करने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा, जदयू और हम के नेता तेजस्वी के प्रशासनिक अनुभव, पढ़ाई-लिखाई और पूर्व के पारिवारिक मामलों को लेकर लगातार हमलावर हैं।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि जीतन राम मांझी का यह बयान एनडीए के उस आक्रामक तेवर का हिस्सा है, जिसके तहत वे तेजस्वी को एक गैर-गंभीर नेता के तौर पर पेश करना चाहते हैं। मांझी महादलित समुदाय के बड़े चेहरे हैं और गया संसदीय क्षेत्र से सांसद होकर केंद्र में मंत्री हैं। उनके इस बयान का मकसद मगध और पूरे बिहार के ग्रामीण मतदाताओं के बीच यह संदेश देना है कि विपक्ष का नेतृत्व परिपक्व हाथों में नहीं है।
सोशल मीडिया पर छिड़ा मीम वॉर और समर्थकों में टकराव
इस बयान के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म्स जैसे एक्स (ट्विटर), फेसबुक और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच जबर्दस्त जंग छिड़ गई है।
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एनडीए समर्थकों का रुख: एनडीए समर्थक तेजस्वी के उस भाषण की क्लिप को शेयर करते हुए उनके भाषण कौशल और नेतृत्व पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
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महागठबंधन समर्थकों का रुख: वहीं दूसरी तरफ तेजस्वी के समर्थक मांझी के पुराने बयानों और उनके द्वारा पूर्व में शराबबंदी कानून पर उठाए गए सवालों के वीडियो साझा कर उन्हें घेर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट कहना है कि लोकतंत्र में नेताओं को अपनी भाषा में गरिमा और शुचिता बनाए रखनी चाहिए। बयानों का गिरता स्तर न केवल राजनीति की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, बल्कि जनता के बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने का काम भी करता है। बहरहाल, मांझी के इस वार और राजद के पलटवार ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में बिहार का सियासी पारा और ज्यादा चढ़ने वाला है।