आम आदमी पर टूटा महंगाई का पहाड़, क्या 'कांदा एक्सप्रेस' और सरकारी कदमों से थमेगी कीमतों की रफ्तार?
देशभर के बाजारों में इन दिनों रसोई की दो सबसे बुनियादी और आवश्यक वस्तुएं यानी चीनी और प्याज आम आदमी के आंसू निकालने पर मजबूर हो चुकी हैं। खुले बाजार में चीनी के दाम बढ़कर 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुके हैं, जबकि प्याज की कीमतें भी 65 रुपये प्रति किलो के आंकड़े को पार कर गई हैं। अचानक आई इस बेतहाशा महंगाई के कारण देश के मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों का घरेलू बजट पूरी तरह से चरमरा गया है। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय बाजारों तक इस बात की चर्चा है कि त्योहारी सीजन से ठीक पहले रसोई का यह बढ़ता बजट आम आदमी की कमर तोड़ रहा है। सरकार और प्रशासनिक स्तर पर कीमतों को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न उपायों पर मंथन शुरू हो गया है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर राहत मिलने का इंतजार लंबा होता जा रहा है।
चीनी की कीमतों में बेकाबू उछाल, क्यों बनी यह स्थिति?
खुदरा बाजारों में चीनी की कीमतें बढ़ने के पीछे उत्पादन में कमी और सप्लाई चेन का असंतुलन मुख्य कारण माना जा रहा है। जानकारों के मुताबिक इस सीजन में गन्ने के उत्पादन के अनुमानित आंकड़े और वास्तविक पैदावार में काफी अंतर देखने को मिला है। इसके अलावा, घरेलू खपत और निर्यात नीतियों के बीच तालमेल बैठने में आई अड़चनों के कारण थोक और खुदरा बाजारों में स्टॉक सीमित हो गया है। देश के कई बड़े शहरों जैसे गुवाहाटी, कोलकाता, चेन्नई और हैदराबाद में चीनी के दाम 70 रुपये प्रति किलो तक दर्ज किए गए हैं। हालांकि कुछ जगहों पर मामूली गिरावट के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन आम उपभोक्ताओं को अभी भी राहत के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।
प्याज के तीखे तेवर, ₹65 के पार पहुंचा भाव
चीनी के साथ-साथ रसोई की दूसरी सबसे अहम जरूरत यानी प्याज ने भी आम आदमी की आंखों में पानी ला दिया है। खुदरा बाजारों में प्याज का भाव 65 रुपये प्रति किलो से ऊपर निकल चुका है। बेमौसम बारिश, नई फसल आने में देरी और परिवहन लागत बढ़ने के कारण मंडियों में प्याज की आवक प्रभावित हुई है। स्थानीय बाजारों में बिचौलियों और हॉर्डिग (जमाखोरी) की वजह से भी कीमतों में कृत्रिम तेजी देखने को मिल रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि दाल-सब्जी के छौंक से लेकर हर रोज बनने वाले खाने में इस्तेमाल होने वाला प्याज यदि इसी तरह महंगा बिकता रहा, तो घर चलाना बेहद कठिन हो जाएगा।
मध्यम वर्ग और गृहणियों पर पड़ा महंगाई का सबसे बड़ा असर
किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में जब खाद्य पदार्थों के दाम इस तरह अचानक बढ़ते हैं, तो उसका सबसे ज्यादा प्रभाव निश्चित आय वाले मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर पड़ता है। एक आम गृहणी के लिए महीने का बजट तय करना मुश्किल हो गया है क्योंकि आटे, दाल, तेल के बाद अब चीनी और प्याज जैसी रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो चुकी हैं। जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते मूल्य नियंत्रण और कालाबाजारी रोकने के कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। लोग अब सरकार की ओर टकटकी लगाए देख रहे हैं कि कब उन्हें इन बढ़ती कीमतों से राहत मिलेगी।
क्या 'कांदा एक्सप्रेस' और सरकारी प्रयासों से थमेगी महंगाई?
बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने निगरानी बढ़ा दी है। बफर स्टॉक से चीनी और प्याज को बाजार में उतारने के साथ-साथ परिवहन व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए विशेष ट्रेनों और ट्रकों यानी 'कांदा एक्सप्रेस' जैसी लॉजिस्टिक्स व्यवस्थाओं पर विचार किया जा रहा है ताकि देश के दूर-दराज के इलाकों तक समय पर सस्ते दामों में सप्लाई पहुंच सके। इसके अलावा, जमाखोरों के खिलाफ छापेमारी तेज कर दी गई है। अब देखना यह होगा कि इन प्रशासनिक और रणनीतिक उपायों के बाद कब तक आम आदमी की थाली में परोसी जाने वाली इन जरूरी चीजों के दाम काबू में आते हैं और जनता को राहत मिलती है।