इलाज के बहाने अस्पताल गया कैदी गर्लफ्रेंड के साथ कर रहा था मौज, कॉन्स्टेबल पर गिरी गाज
देश की जेलों की सुरक्षा व्यवस्था और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर अक्सर गंभीर सवाल खड़े होते रहे हैं, लेकिन इस बार जो मामला सामने आया है उसने पुलिस विभाग के होश उड़ा दिए हैं। मेडिकल ट्रीटमेंट यानी इलाज के नाम पर जेल से अस्पताल भेजे गए एक शातिर कैदी ने अस्पताल के कमरे को ही अपनी मौज-मस्ती का अड्डा बना लिया। वह अस्पताल के अंदर अपनी गर्लफ्रेंड के साथ आराम से रंगरलियां मना रहा था, जबकि उसकी सुरक्षा के लिए बाहर पुलिसकर्मी तैनात थे। जब इस सनसनीखेज लापरवाही और खेल का भंडाफोड़ हुआ, तो पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए कैदी की सुरक्षा में लापरवाही बरतने वाले मुख्य कॉन्स्टेबल को निलंबित (Suspend) कर दिया गया है और पूरे प्रकरण की गहन उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ इस सनसनीखेज खेल का पर्दाफाश?
यह पूरा हैरान कर देने वाला मामला तब प्रकाश में आया जब जेल में बंद एक कुख्यात कैदी ने पेट दर्द या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या का बहाना बनाकर जेल प्रशासन से अस्पताल जाने की अनुमति मांगी। नियमानुसार गंभीर या सामान्य बीमारी की स्थिति में कैदियों को इलाज के लिए पुलिस सुरक्षा के कड़े पहरे में सरकारी अस्पताल के कैदी वार्ड में भर्ती कराया जाता है। आरोपी कैदी को भी पुलिस अभिरक्षा में अस्पताल में दाखिल कराया गया था, जहां उसे डॉक्टरों की देखरेख में रहना था। लेकिन शातिर कैदी ने पुलिसकर्मियों की मिलीभगत या उनकी भारी लापरवाही का फायदा उठाते हुए अस्पताल के कमरे को ही अपनी अय्याशी का ठिकाना बना लिया। दिन के उजाले या रात के वक्त उसकी प्रेमिका बेधड़क अस्पताल के कमरे के अंदर आती-जाती रही और दोनों कथित तौर पर मौज-मस्ती में मशगूल रहे। जब स्थानीय खुफिया तंत्र और वरिष्ठ अधिकारियों को इस बात की भनक लगी, तो मौके पर अचानक छापेमारी की गई, जिससे इस पूरे खेल का पर्दाफाश हो गया।
पुलिस सुरक्षा में सेंध और खाकी की कार्यप्रणाली पर उठे बड़े सवाल
इस घटना ने एक बार फिर कानून व्यवस्था और पुलिस अभिरक्षा (Police Custody) के दावों की पोल खोल दी है। जनता के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर कैसे एक सलाखों के पीछे बंद अपराधी अस्पताल के अंदर अपनी प्रेमिका के साथ सरेआम इस तरह की हरकतें कर सकता है? क्या जेल प्रशासन और अस्पताल की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को इस बात की भनक तक नहीं थी या फिर सब कुछ जानते हुए भी पैसों या अन्य प्रलोभनों के चक्कर में आंखें मूंद ली गई थीं? आमतौर पर जब किसी कैदी को अस्पताल ले जाया जाता है, तो वहां मिलने-जुलने वालों पर पूरी पाबंदी होती है और बिना पुलिस अनुमति के कोई भी व्यक्ति उसके पास नहीं फटक सकता। इसके बावजूद यदि कोई महिला बेरोक-टोक कैदी के साथ लंबे समय तक कमरे में समय बिता रही थी, तो यह साफ तौर पर पुलिस की आपराधिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
कॉन्स्टेबल पर गिरी गाज, निलंबित कर बिठाई गई उच्चस्तरीय जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों ने तुरंत कड़ा रुख अपनाया है। कैदी की सुरक्षा और पहरेदारी में तैनात संबंधित कॉन्स्टेबल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही इस बात की भी गहराई से जांच की जा रही है कि इस खेल में और कौन-कौन लोग शामिल थे। क्या अस्पताल के कर्मचारियों या अन्य पुलिसकर्मियों की भी इस मिलीभगत में कोई संलिप्तता थी? अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के कृत्य से पुलिस विभाग की छवि को भारी आघात पहुंचा है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद इसमें संलिप्त पाए जाने वाले अन्य कर्मचारियों और खुद कैदी के खिलाफ भी अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई किए जाने की पूरी तैयारी है।
जेल और अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े किए जा रहे हैं नियम
इस घटना के बाद से प्रशासन की नींद उड़ गई है और अब राज्य के सभी अस्पतालों और जेलों की सुरक्षा व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा की जा रही है। स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज के नाम पर जाने वाले कैदियों पर अब बॉडी वार्न कैमरे और सीसीटीवी कैमरों के जरिए पैनी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा मुलाकातियों के लिए बनाए गए नियमों का कड़ाई से पालन कराने के लिए कहा गया है ताकि भविष्य में कोई भी अपराधी इस तरह खाकी की आंखों में धूल झोंककर कानून का मखौल न उड़ा सके। यह घटना न सिर्फ एक कैदी और उसकी प्रेमिका की अय्याशी का किस्सा है, बल्कि यह हमारे प्रशासनिक तंत्र में फैली उस सड़न को भी बेनकाब करती है, जिसे सुधारने के लिए कड़े प्रशासनिक और कानूनी हथौड़े चलाने की सख्त जरूरत है।