आसमान में दिखेगा अरावली का दम:भारत और फ्रांस के बीच हुआ ऐतिहासिक रक्षा समझौता !
भारतीय सैन्य इतिहास और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होने वाला ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। भारतीय सशस्त्र बलों की ताकत को आसमान में और अधिक अजेय बनाने के लिए भारत और फ्रांस के बीच एक बहुत बड़ा रणनीतिक समझौता संपन्न हुआ है। इस रक्षा समझौते के तहत अब भारतीय सेना के बेड़े में शामिल होने वाले 13-टन श्रेणी के भारी-भरकम और ताकतवर सैन्य हेलिकॉप्टरों को आधुनिक तकनीक की सुपर पावर मिलने जा रही है। खास तौर पर रेगिस्तानी और पहाड़ी इलाकों में अपनी अद्भुत मारक क्षमता के लिए जाने जाने वाले 'अरावली' क्षेत्र और देश की सामरिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस प्रोजेक्ट को बेहद अहम माना जा रहा है। फ्रांस के प्रतिष्ठित एयरोस्पेस दिग्गजों और भारत की रक्षा कंपनियों के बीच हुए इस कोलैबोरेशन के बाद से वैश्विक रक्षा गलियारों में भारत की तकनीकी ताकत की चर्चा तेज हो गई है, जिससे दुश्मनों के खेमे में स्वाभाविक रूप से खलबली मच गई है।
क्या है भारत और फ्रांस के बीच हुआ यह नया रक्षा समझौता?
भारत और फ्रांस के द्विपक्षीय रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में कूटनीति और रक्षा सहयोग के मामले में दुनिया के लिए एक मिसाल बन चुके हैं। राफेल लड़ाकू विमानों की सफल डील के बाद अब दोनों देशों ने एडवांस्ड रोटरक्राफ्ट टेक्नोलॉजी और भारी सैन्य हेलिकॉप्टरों के इंजनों तथा एवियोनिक्स को लेकर एक नया अनुबंध किया है। इस समझौते के मुख्य केंद्र बिंदु में भारतीय सेना और वायुसेना की उन जरूरतों को पूरा करना है, जिनके तहत ऊंचे पहाड़ों, दुर्गम घाटियों और सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी हथियार, गोला-बारूद और सैनिकों की तेजी से आवाजाही सुनिश्चित की जा सके। फ्रांस की विश्वस्तरीय तकनीक और भारत की 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत इन 13-टन के भारी हेलिकॉप्टरों को अत्याधुनिक सुपर पावर से लैस किया जाएगा, जिससे वे किसी भी मौसम और किसी भी भौगोलिक परिस्थिति में अचूक निशाना लगाने और उड़ान भरने में पूरी तरह सक्षम होंगे।
13-टन श्रेणी के हेलिकॉप्टरों की खासियत और उनकी मारक क्षमता
सैन्य संचालन के लिहाज से 13-टन या इससे अधिक वजन वाले हेलिकॉप्टरों को 'हेवी-लिफ्ट' (Heavy-Lift) श्रेणी में रखा जाता है, जो युद्ध के मैदान में गेम-चेंजर साबित होते हैं। इन विमानों की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि ये अपने साथ भारी मात्रा में सैन्य साजो-सामान, तोपें, गाड़ियां और बड़ी संख्या में कमांडोज को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पलक झपकते ही पहुंचा सकते हैं। फ्रांस के साथ हुए इस नए समझौते के बाद इन हेलिकॉप्टरों में अत्याधुनिक रडार सिस्टम, नाइट विजन क्षमता, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट और सटीक निशाना साधने वाली मिसाइलें लगाई जाएंगी। इसके अलावा, इनके इंजनों को इस प्रकार अपग्रेड किया जा रहा है कि वे अत्यधिक ऊंचाई वाले ठंडे पहाड़ी क्षेत्रों में भी बिना किसी ऑक्सीजन या पावर लॉस के बेहतरीन प्रदर्शन कर सकें, जो लद्दाख या अरुणाचल प्रदेश जैसे मोर्चों पर भारत के लिए बेहद जरूरी है।
सामरिक दृष्टिकोण से क्यों खास है यह समझौता और 'अरावली' का कनेक्शन?
भारत की रक्षा रणनीतियों में घरेलू भौगोलिक विशेषताओं का हमेशा से विशेष महत्व रहा है। पश्चिमी भारत की प्राचीन पर्वत श्रृंखला 'अरावली' से लेकर देश के अन्य सामरिक क्षेत्रों तक वायुसेना और थल सेना के बीच समन्वय स्थापित करने में आधुनिक हेलिकॉप्टरों की भूमिका सर्वोपरि है। इस समझौते के लागू होने से भारत की स्ट्रैटेजिक एयर मोबिलिटी (Strategic Air Mobility) में क्रांतिकारी सुधार आएगा। किसी भी आपातकालीन स्थिति, प्राकृतिक आपदा या युद्ध के हालात में भारतीय सेना कम से कम समय में अपनी सामरिक तैनाती को मजबूत कर सकेगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि फ्रांस के साथ यह तकनीक का हस्तांतरण (Technology Transfer) भारत को भविष्य में खुद के भारी हेलिकॉप्टरों के स्वदेशी निर्माण की दिशा में भी आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।
आत्मनिर्भर भारत और रक्षा निर्यात की ओर बढ़ता एक और मजबूत कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार पिछले एक दशक से रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता को कम करने और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लगातार कड़े कदम उठा रही है। फ्रांस के साथ यह समझौता इस बात का प्रमाण है कि अब भारत केवल रक्षा साजो-सामान खरीदने वाला देश नहीं रहा, बल्कि वह तकनीक के सह-विकास (Co-development) और सह-उत्पादन (Co-production) में एक बराबरी का साझीदार बन चुका है। आने वाले वर्षों में जब ये 13-टन के सुपर-पावर हेलिकॉप्टर भारतीय सेना के बेड़े में पूरी तरह शामिल हो जाएंगे, तो हमारी सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था अभेद्य हो जाएगी। इस ऐतिहासिक समझौते ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किए बिना दुनिया की किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।