स्वरा भास्कर के बदले सुर! पहले पद्मावत के ‘जौहर’ को बताया कायराना, जब होने लगी....
भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में अपने मुखर और बेबाक अंदाज के लिए हमेशा चर्चा में रहने वाली लोकप्रिय अभिनेत्री स्वरा भास्कर एक बार फिर से सोशल मीडिया के सबसे बड़े विवादों के केंद्र में आ चुकी हैं। जब भी सिनेमा के किसी संवेदनशील विषय या ऐतिहासिक घटनाओं पर बहस छिड़ती है, तो स्वरा की टिप्पणियां अक्सर जनता के एक बड़े वर्ग का ध्यान खींचती हैं। हाल ही में उनका एक पुराना या नया बयान इंटरनेट पर इस कदर वायरल हुआ कि देखते ही देखते ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बवाल मच गया। मामला तब गरमाया जब उन्होंने संजय लीला भंसाली की विवादित और सुपरहिट फिल्म ‘पद्मावत’ के उस ऐतिहासिक क्लाइमैक्स यानी ‘जौहर’ के दृश्य पर सवाल उठाते हुए उसे कथित तौर पर कायराना करार दे दिया था। उनके इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया यूजर्स, इतिहास प्रेमियों और फिल्म आलोचकों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्हें भारी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। चारों तरफ से घिरने के बाद आखिरकार अभिनेत्री को अपनी चुप्पी तोड़नी पड़ी और अपनी सफाई देते हुए यह कहना पड़ा कि उनके शब्दों को गलत तरीके से पेश किया गया है और उन्होंने कतई ऐसा नहीं कहा था। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया पर कही गई किसी भी बात का किस तरह से राई का पहाड़ बन जाता है।
‘पद्मावत’ के जौहर सीन पर छिड़ी थी बहस, स्वरा के बयान ने पकड़ी तूल
संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ जब सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, तब इसके कई दृश्यों को लेकर देश भर में तीखी बहस छिड़ी थी। फिल्म के अंत में रानी पद्मावती द्वारा हजारों महिलाओं के साथ अपने सम्मान की रक्षा के लिए जौहर यानी अग्नि में समर्पित होने वाले दृश्य को भारतीय नारी के साहस, त्याग और बलिदान के प्रतीक के रूप में दिखाया गया था। लेकिन अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने उस दौरान एक खुला खत लिखकर इस प्रथा और फिल्म के उस विशेष क्लाइमैक्स पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने उस समय अपने लेख में कुछ ऐसी बातें लिखी थीं जिन्हें पढ़ने के बाद लोगों को लगा कि वे रानी के जौहर को एक प्रकार की रूढ़िवादिता या गलत फैसला बता रही हैं। उस वक्त भी इस पर काफी विवाद हुआ था, लेकिन हाल ही में जब वह मुद्दा सोशल मीडिया के एल्गोरिदम में दोबारा तैरता हुआ सामने आया, तो नेटिज़न्स ने एक बार फिर उस पुराने बयान को निकालकर स्वरा को घेरना शुरू कर दिया। इस बार आलोचना का स्तर इतना तीव्र था कि अभिनेत्री को तुरंत मैदान में उतरकर अपनी सफाई पेश करनी पड़ी।
भारी ट्रोलिंग के बाद अभिनेत्री की सफाई, बोलीं- ‘मैंने कतई ऐसा नहीं कहा था’
जब सोशल मीडिया पर चारों तरफ से गालियों, आलोचनाओं और तीखी प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई, तब स्वरा भास्कर ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए इस विवाद पर विराम लगाने की कोशिश की। उन्होंने अपनी सफाई में स्पष्ट किया कि उनके बयान को जानबूझकर तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है और उन्होंने कभी भी रानी पद्मावती या उनके बलिदान को लेकर कोई अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था। स्वरा ने कहा कि उनकी आलोचना का उद्देश्य किसी ऐतिहासिक पात्र की वीरता पर सवाल उठाना नहीं था, बल्कि वे केवल उस दौर की सामाजिक परिस्थितियों और पितृसत्तात्मक व्यवस्था पर एक वैचारिक चर्चा करना चाहती थीं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सोशल मीडिया पर अक्सर चीजों को संदर्भ से बाहर निकालकर पेश कर दिया जाता है, जिसके कारण बेवजह का विवाद खड़ा हो जाता है। हालांकि, उनकी इस सफाई के बाद भी सोशल मीडिया पर बहस थमने का नाम नहीं ले रही है और लोग उनके पुराने और नए बयानों के बीच की कड़ियों को जोड़कर लगातार अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
सिनेमा और इतिहास के बीच की बहस में अक्सर उलझती रही हैं हस्तियां
यह पहली बार नहीं है जब स्वरा भास्कर किसी ऐतिहासिक फिल्म या उसके दृश्यों पर अपनी राय रखने के कारण विवादों में आई हों। भारतीय सिनेमा में जब भी इतिहास को पर्दे पर उतारा जाता है, तो कलात्मक स्वतंत्रता और ऐतिहासिक तथ्यों के बीच एक बहुत पतली रेखा खींच जाती है, जिसे पार करते ही विवाद शुरू हो जाते हैं। एक तरफ जहां निर्देशकों का यह तर्क होता है कि वे अपनी रचनात्मकता के आधार पर कहानी कह रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दर्शकों और विचारकों का एक वर्ग ऐसा होता है जो हर एक दृश्य को सांस्कृतिक और ऐतिहासिक कसौटी पर कसता है। स्वरा जैसी मुखर अभिनेत्री जब ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखती हैं, तो समाज का एक वर्ग उनके समर्थन में खड़ा होता है तो दूसरा वर्ग उनके कड़े विरोध में उतर आता है। यही वजह है कि ‘पद्मावत’ के जौहर वाले दृश्य पर दिया गया उनका वह पुराना बयान आज भी उतने ही आवेग के साथ इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन जाता है, जितना वह फिल्म रिलीज होने के समय था।
सोशल मीडिया का यह दौर और बयानों के दूरगामी परिणाम
आज के इस डिजिटल युग में सेलिब्रिटीज द्वारा कही गई कोई भी बात कभी भी पुरानी नहीं होती है, क्योंकि इंटरनेट का आर्काइव हर एक बयान को सुरक्षित रखता है। स्वरा भास्कर के साथ हुआ यह ताजा विवाद इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि कैसे एक पुराना बयान अचानक से वर्तमान समय में आकर किसी बड़े तूफान का रूप ले सकता है। जब तक दर्शक और सोशल मीडिया यूजर्स किसी भी बात के मूल संदर्भ को समझे बिना केवल हेडलाइंस पर प्रतिक्रिया देते रहेंगे, तब तक इस तरह के वैचारिक संघर्ष और ट्रोलिंग का दौर थमता हुआ नजर नहीं आएगा। स्वरा के इस स्पष्टीकरण के बाद यह तो साफ हो गया है कि वे अपने रुख को लेकर कितनी सजग रहती हैं, लेकिन साथ ही यह भी तय है कि उनका नाम और उनके बयान आने वाले समय में भी बहस के केंद्र में बने रहेंगे।