जयपुर में सीआरपीएफ कैंप के पास खेत में मिला जिंदा मोर्टार बम, बम निरोधक दस्ते ने आबादी से दूर ले जाकर किया डिफ्यूज, टला बड़ा हादसा

जयपुर में सीआरपीएफ कैंप के पास खेत में मिला जिंदा मोर्टार बम, बम निरोधक दस्ते ने आबादी से दूर ले जाकर किया डिफ्यूज, टला बड़ा हादसा

राजस्थान की राजधानी जयपुर के आमेर थाना इलाके में सोमवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) कैंपस से कुछ ही दूरी पर स्थित एक खेत में जिंदा मोर्टार बम बरामद हुआ। संवेदनशील सुरक्षा प्रतिष्ठान और घनी ग्रामीण आबादी के इतने करीब शक्तिशाली सैन्य आयुध मिलने की खबर से पुलिस महकमे, खुफिया तंत्र और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही आमेर थाना पुलिस, सिविल डिफेंस की रेस्क्यू टीम और बम निरोधक दस्ता (BDS) भारी लाव-लश्कर के साथ मौके पर पहुंचा। सुरक्षा एजेंसियों ने बिना किसी देरी के इलाके की घेराबंदी की और बेहद सावधानीपूर्वक ऑपरेशन चलाते हुए मोर्टार बम को आबादी क्षेत्र से दूर सुनसान जगह पर ले जाकर गहरे गड्ढे में नियंत्रित धमाके (कंट्रोल्ड ब्लास्ट) के जरिए सफलतापूर्वक डिस्पोज कर दिया। समय रहते उठाए गए इस कदम से एक बड़ा और जानलेवा हादसा होने से टल गया।

खेत में कचरे के ढेर में पड़ा था जिंदा मोर्टार, महिला की सतर्कता से खुला राज

यह सनसनीखेज मामला जयपुर के आमेर थाना क्षेत्र अंतर्गत खातीवालों की ढाणी (वार्ड नंबर 148) का है। सोमवार सुबह करीब 10:30 बजे गांव की एक स्थानीय महिला अपने रोजमर्रा के काम के सिलसिले में खेत की पगडंडी से गुजर रही थी। इसी दौरान उसकी नजर खेत में पड़े सूखे पत्तों और कचरे के ढेर के बीच दबे एक भारी-भरकम, धातु के संदिग्ध गोले पर पड़ी। महिला ने जब गौर से देखा तो उसे वस्तु के सैन्य हथियार या विस्फोटक होने का अंदेशा हुआ।

महिला ने बिना किसी लापरवाही के तुरंत अपने घर पहुंचकर परिजनों को इसकी सूचना दी। बात जंगल की आग की तरह पूरे गांव में फैल गई और देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा होने लगी। खतरे की गंभीरता को भांपते हुए जागरूक ग्रामीणों ने फौरन पुलिस कंट्रोल रूम (112) को फोन कर खेत में जिंदा बम पड़े होने की जानकारी दी।

महज 8 मिनट में पहुंची पुलिस और सिविल डिफेंस, पूरे इलाके की कराई गई नाकेबंदी

डिप्टी कंट्रोलर सिविल डिफेंस अमित शर्मा के अनुसार, पुलिस कंट्रोल रूम से घटना का अलर्ट सुबह करीब 11:05 बजे प्राप्त हुआ था। सूचना मिलते ही पुलिस और सिविल डिफेंस की विशेष टीम रिकॉर्ड आठ मिनट के भीतर सीधे घटनास्थल पर पहुंच गई। आमेर थानाधिकारी गौतम डोटासरा और एसीपी सुरेंद्र सिंह राणावत के नेतृत्व में पुलिस बल ने सबसे पहले सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए खेत के चारों तरफ सुरक्षा घेरा बनाया और वहां जुटी सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ को सुरक्षित दूरी पर पीछे धकेला।

सिविल डिफेंस और पुलिस की प्राथमिक जांच में इस बात की पुष्टि हो गई कि कचरे में पड़ा ऑब्जेक्ट कोई डमी या कबाड़ नहीं, बल्कि एक असली और सक्रिय (Live) मोर्टार शेल है। इसके तुरंत बाद राज्य पुलिस के बम निरोधक दस्ते (Bomb Disposal Squad) को अत्याधुनिक उपकरणों और सेफ्टी सैंडबैग्स के साथ मौके पर तलब किया गया।

सुनसान जगह पर 5 फीट गहरा गड्ढा खोदकर किया ब्लास्ट, तेज धमाके से थर्राया इलाका

बम निरोधक दस्ते ने विशेष सुरक्षा सूट और तकनीकी सावधानियों के साथ मोर्टार को एक सुरक्षित कंटेनर में रखकर उठाया। चूंकि पास में ही सीआरपीएफ और सीआईएसएफ का बड़ा कैंपस और आवासीय ढाणियां थीं, इसलिए इसे उसी स्थान पर डिफ्यूज करना बेहद जोखिम भरा था। टीम ने मोर्टार को रिहायशी इलाके से कई किलोमीटर दूर एक वीरान और सुनसान स्थान पर पहुंचाया।

वहां जेसीबी और मैनुअल तरीके से मिट्टी में गहरा गड्ढा खोदा गया। मोर्टार को गड्ढे के अंदर रखकर वैज्ञानिक विधि से सुरक्षित वायरिंग और डेटोनेटर के जरिए दोपहर करीब 2:00 बजे कंट्रोल्ड ब्लास्ट कर नष्ट कर दिया गया। डिस्पोजल के दौरान इतना भीषण धमाका हुआ कि आसपास की जमीन कांप उठी और आसमान में धूल का बड़ा गुबार उठ गया। इस सफल ऑपरेशन में सिविल डिफेंस के अधिकारी अमित शर्मा, असरार अहमद, राजेश कुमार, यूनुस खान, मोहम्मद बिलाल, दीपक सैनी और घनश्याम शर्मा सहित बीडीएस के विशेषज्ञों ने अहम भूमिका निभाई।

सीआरपीएफ कैंप के पास जिंदा सैन्य मोर्टार मिलने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, एफआईआर दर्ज

आमेर थाना पुलिस और सुरक्षा विशेषज्ञों की शुरुआती तकनीकी जांच में सामने आया है कि बरामद मोर्टार सेना या अर्धसैनिक बलों द्वारा युद्धाभ्यास और कॉम्बैट ऑपरेशंस में इस्तेमाल किया जाने वाला पुराना लेकिन बेहद शक्तिशाली 'इल्यूमिनेशन/एक्सप्लोसिव मोर्टार शेल' था। हालांकि, यह मोर्टार सेना की किसी पुरानी फायरिंग रेंज का है या इसे किसी अन्य स्थान से यहां लाकर फेंका गया, यह अभी पहेली बना हुआ है।

एसीपी आमेर सुरेंद्र सिंह राणावत ने बताया कि सीआरपीएफ कैंप से महज एक से डेढ़ किलोमीटर के दायरे में इस तरह का जिंदा हथियार मिलना अत्यंत गंभीर मामला है। आमेर थाना पुलिस ने विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस इस मामले की कबाड़ कारोबारियों (स्क्रैप डीलर्स), अवैध हथियारों की तस्करी और पुराने सैन्य अभ्यास स्थलों से स्क्रैप उठाने वाले गिरोहों के एंगल से भी गहन जांच कर रही है।

ग्रामीणों ने ली राहत की सांस, पुलिस ने संदिग्ध वस्तुओं से दूर रहने की दी सख्त हिदायत

मोर्टार बम के सफलतापूर्वक नष्ट होने के बाद आमेर और आसपास के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों की समझदारी और तत्परता की सराहना की, क्योंकि किसी ने भी उस संदिग्ध मोर्टार को छूने या हिलाने की गलती नहीं की।

जयपुर पुलिस ने आम जनता के लिए परामर्श जारी करते हुए कहा है कि खेतों, जंगलों, खाली प्लॉटों या रेलवे ट्रैक्स के आसपास यदि कोई भी लावारिस धातु की वस्तु, गोला-बारूद जैसा शेल या संदिग्ध पैकेट नजर आए, तो उसे कतई न छुएं और तुरंत पुलिस हेल्पलाइन या स्थानीय थाने को सूचना दें। कई बार अप्रयुक्त (Unexploded) पुराने सैन्य गोले लंबे समय तक निष्क्रिय दिखने के बावजूद हल्का सा झटका लगने पर भी जानलेवा विस्फोट कर सकते हैं।

जयपुर के आमेर में समय पर हुई पुलिस और सुरक्षा बलों की यह संयुक्त कार्रवाई इस बात की मिसाल है कि प्रशासनिक तत्परता और जनता की सजगता से किसी भी संभावित बड़े हादसे को टाला जा सकता है।

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