आषाढ़ गुप्त नवरात्रि कल से: इस शुभ मुहूर्त में करें कलश स्थापना, खुलेंगे बंद किस्मत के ताले!
हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि साल में दो नहीं बल्कि चार नवरात्रि आती हैं? चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्रि भी होती हैं। कल यानी आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 की शुरुआत हो रही है। इस दौरान तंत्र-मंत्र की साधना और मां दुर्गा के 10 दिव्य स्वरूपों (दस महाविद्याओं) की गुप्त रूप से पूजा की जाती है। आइए जानते हैं कलश स्थापना का सबसे उत्तम मुहूर्त और पूजा की सही विधि।
कब से कब तक है आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026?
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि कल से प्रारंभ हो रही है। इस साल आषाढ़ गुप्त नवरात्रि बेहद खास मानी जा रही है क्योंकि इस बार कई शुभ और दुर्लभ योग बन रहे हैं, जो भक्तों की हर मनोकामना पूरी करने वाले हैं। गुप्त नवरात्रि में आम नवरात्रि की तरह जोर-शोर से उत्सव नहीं मनाया जाता, बल्कि साधक एकांत में रहकर मां की कठिन आराधना करते हैं।
कलश स्थापना (घटस्थापना) का सबसे उत्तम मुहूर्त
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में घटस्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करनी चाहिए ताकि पूजा का पूर्ण फल मिल सके। कल कलश स्थापना के लिए दो सबसे उत्तम मुहूर्त बन रहे हैं:
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सुबह का शुभ मुहूर्त: कल सुबह 05:45 बजे से लेकर सुबह 07:30 बजे तक का समय घटस्थापना के लिए बेहद श्रेष्ठ है।
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अभिजीत मुहूर्त (सर्वोत्तम): यदि आप सुबह कलश स्थापित नहीं कर पाते हैं, तो दोपहर में 11:55 बजे से 12:50 बजे तक का अभिजीत मुहूर्त सबसे उत्तम रहेगा। इस समय में किया गया कोई भी शुभ कार्य हमेशा सफल होता है।
इन 10 महाविद्याओं की होती है गुप्त पूजा
गुप्त नवरात्रि का नाम ही इस बात का प्रतीक है कि इसमें पूजा को पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है। इसमें मां दुर्गा के नौ रूपों के बजाय दस महाशक्तियों की साधना की जाती है, जो इस प्रकार हैं:
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मां काली
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मां तारा
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मां त्रिपुर सुंदरी
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मां भुवनेश्वरी
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मां छिन्नमस्ता
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मां त्रिपुर भैरवी
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मां धूमावती
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मां बगुलामुखी
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मां मातंगी
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मां कमला
मनोकामना पूर्ति के लिए अपनाएं यह सरल पूजा विधि
यदि आप तंत्र साधना नहीं भी करते हैं, तो सामान्य भक्त के रूप में कल सुबह उठकर स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा घर में कलश की स्थापना करें और मां दुर्गा की प्रतिमा के सामने अखंड ज्योति या दीपक जलाएं। गुप्त नवरात्रि में 'ॐ दुं दुर्गाय नमः' मंत्र का जाप करना बेहद कल्याणकारी माना जाता है। इस नौ दिनों की अवधि में सात्विकता का पालन करना और ब्रह्मचर्य बनाए रखना अनिवार्य है।