नीलकंठ से लौट रहे श्रद्धालुओं से भरी बस अनियंत्रित होकर पलटी,मची चीख-पुकार
उत्तराखंड के देवभूमि कहे जाने वाले पावन और पर्वतीय क्षेत्रों से इस वक्त एक बेहद दर्दनाक, झकझोर देने वाली और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने पूरे इलाके में मातम और शोक की लहर पैदा कर दी है। विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल नीलकंठ महादेव के दर्शन करके वापस लौट रही पर्यटकों और श्रद्धालुओं से भरी एक तेज रफ्तार अनियंत्रित बस भद्रकाली मार्ग पर अचानक सड़क पर पलट गई। इस भयानक दुर्घटना का शिकार केवल बस में बैठे यात्री ही नहीं हुए, बल्कि बस की चपेट में रास्ते से गुजर रहे स्कूटी सवार दो सगे भाई भी आ गए, जिनकी मौके पर ही बेहद दर्दनाक मौत हो गई। इस भीषण हादसे में बस में सवार लगभग 13 यात्री गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं, जिन्हें तुरंत स्थानीय पुलिस और राहत दलों की मदद से नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। दुर्घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोग तथा प्रशासन तुरंत बचाव कार्य में जुट गए। पर्वतीय सड़कों की संकीर्ण बनावट, तेज ढलान और चालकों की जरा सी लापरवाही कैसे बेकसूर लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है, इस दुर्घटना ने एक बार फिर से इस कड़वी सच्चाई को सबके सामने ला खड़ा किया है। आइए इस विस्तृत और ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए जानते हैं कि आखिर यह हादसा कैसे हुआ और मौके पर क्या कुछ हालात बने रहे।
नीलकंठ महादेव के दर्शन कर लौट रहे थे श्रद्धालु, भद्रकाली मार्ग पर हुआ खौफनाक हादसा
यह पूरी हृदयविदारक घटना उत्तराखंड के ऋषिकेश-नीलकंठ मार्ग पर स्थित भद्रकाली क्षेत्र के पास घटी है, जो सालभर पर्यटकों और कांवड़ियों की आवाजाही के कारण बेहद व्यस्त और संवेदनशील माना जाता है। बस में सवार सभी श्रद्धालु अपनी धार्मिक यात्रा पूरी करने के बाद बहुत ही आनंदित माहौल में वापस अपने गंतव्य की ओर लौट रहे थे, लेकिन किसी को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि कुछ ही पलों में यह आस्था की यात्रा एक भयानक त्रासदी में बदल जाएगी। पहाड़ी रास्तों के घुमावदार मोड़ पर जब बस पहुंची, तो ऐसा प्रतीत होता है कि चालक ने वाहन पर से अपना नियंत्रण खो दिया या ब्रेक फेल जैसी कोई तकनीकी खराबी आ गई। अनियंत्रित हुई वह भारी-भरकम बस सड़क के किनारे असंतुलित होकर जोर से पलट गई, और पलटने से ठीक पहले उसने सामने से आ रहे स्कूटी सवार दो भाइयों को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोग तुरंत अपने घरों और दुकानों से बाहर निकल आए और उन्होंने देखा कि बस के नीचे और आसपास लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे।
स्कूटी सवार दो सगे भाइयों की मौके पर मौत, परिवारों में पसरा मातम
इस दर्दनाक सड़क हादसे में सबसे ज्यादा खौफनाक पहलू यह रहा कि जब बस पलटी, तो उसकी चपेट में आए स्कूटी सवार दो सगे भाइयों को बचने का मौका तक नहीं मिला। दोनों भाई अपने किसी जरूरी काम से या सामान्य सफर पर उसी मार्ग से गुजर रहे थे, जब काल बनकर आई वह बस उन पर आ गिरी। मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों भाइयों की सांसे घटनास्थल पर ही थम गईं, और उनके शव बुरी तरह से क्षत-विक्षत हो गए। जब इस घटना की सूचना उनके पैतृक आवास और परिजनों तक पहुंची, तो कोहराम मच गया और माता-पिता तथा अन्य संबंधियों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पर्वतीय क्षेत्रों में अक्सर तेज रफ्तार और यातायात नियमों की अनदेखी के कारण इस तरह के हादसे आम लोगों की जिंदगियां छीन लेते हैं, और इस बार भी दो हंसते-खेलते परिवारों का सुहाग और चिराग हमेशा के लिए बुझ गया। स्थानीय प्रशासन ने मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और उनके परिजनों को सांत्वना देने का प्रयास किया जा रहा है।
बस में सवार 13 यात्री गंभीर रूप से घायल, अस्पतालों में चल रहा है आपातकालीन इलाज
सड़क पर पलटने वाली उस यात्री बस में बैठे लगभग 13 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें कांच के टूटने और बस के अंदर दबने से भारी चोटें आई हैं। दुर्घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और एंबुलेंस की कई गाड़ियां रिकॉर्ड समय में घटनास्थल पर पहुंच गईं। राहत और बचाव कार्य में जुटे जवानों ने बड़ी मशक्कत के साथ बस के अंदर फंसे यात्रियों को खिड़कियों और दरवाजों को तोड़कर बाहर निकाला। सभी घायलों को तुरंत ऋषिकेश के एम्स (AIIMS) और अन्य नजदीकी सरकारी अस्पतालों के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की विशेष टीमें उनका इलाज कर रही हैं। कुछ यात्रियों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है जिसके कारण मरने वालों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। अस्पताल के बाहर घायल यात्रियों के परिजनों का तांता लगा हुआ है और हर कोई अपने प्रियजनों की सलामत वापसी के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहा है।
पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा और ओवरस्पीडिंग को लेकर खड़े हुए गंभीर सवाल
उत्तराखंड के चारधाम और नीलकंठ मार्ग जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक और वाहन पहुंचते हैं, लेकिन बुनियादी सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन न होना एक बहुत बड़ी समस्या बना हुआ है। पर्वतीय रास्तों पर वाहन चलाने के लिए विशेष प्रशिक्षण और गति सीमा (Speed Limit) का कड़ाई से पालन होना अनिवार्य है, बावजूद इसके कई चालक संकरे और खतरनाक मोड़ों पर भी ओवरटेक करने से बाज नहीं आते। इस भीषण हादसे के बाद परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन एक बार फिर से एक्शन मोड में आ गया है और पहाड़ी मार्गों पर चलने वाले कमर्शियल वाहनों की फिटनेस, ओवरलोडिंग और ड्राइवरों के लाइसेंस की रैंडम जांच के निर्देश दिए गए हैं। जनता और स्थानीय नागरिकों की मांग है कि खतरनाक मोड़ों पर क्रैश बैरियर और चेतावनी बोर्ड बढ़ाए जाएं ताकि इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। दो सगे भाइयों की मौत और दर्जनों लोगों के घायल होने की यह घटना पूरे क्षेत्र के लिए एक गहरा जख्म छोड़ गई है, जिसे लंबे समय तक भुलाया नहीं जा सकता।