एक चूक और उड़ जाता पूरा इलाका! गोरखपुर में एथेनॉल से भरा टैंकर पलटा, 5 घंटे सांसें थामे रहा प्रशासन

एक चूक और उड़ जाता पूरा इलाका! गोरखपुर में एथेनॉल से भरा टैंकर पलटा, 5 घंटे सांसें थामे रहा प्रशासन

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद और पूर्वांचल के सबसे प्रमुख औद्योगिक व व्यावसायिक केंद्र गोरखपुर से इस वक्त एक ऐसी दहला देने वाली और दिल की धड़कनें बढ़ा देने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे और आम जनता के होश उड़ा दिए हैं। गोरखपुर के एक व्यस्त और संवेदनशील मार्ग पर उस वक्त एक बहुत बड़ा और भीषण हादसा होने से बाल-बाल बच गया जब अत्यधिक ज्वलनशील केमिकल यानी एथेनॉल से भरा हुआ एक भारी-भरकम टैंकर अचानक अनियंत्रित होकर सड़क के बीचों-बीच पलट गया। इस भयानक दुर्घटना के बाद टैंकर से भारी मात्रा में खतरनाक एथेनॉल सड़क पर तेजी से बहने लगा, जिसकी तीखी गंध और ज्वलनशीलता को देखकर मौके पर मौजूद लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। यदि इस दौरान थोड़ी सी भी लापरवाही या किसी की एक छोटी सी चिंगारी लग जाती, तो पलभर में ऐसा भीषण विस्फोट होता कि आसपास का पूरा इलाका मानचित्र से नेस्तनाबूद हो जाता और सैकड़ों बेकसूर लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी। इस विकट स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर दौड़े और अगले पांच घंटे तक युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर किसी तरह स्थिति को अपने नियंत्रण में लिया। इस दौरान पूरे इलाके की सांसें थमी रहीं और हर कोई भगवान से यही प्रार्थना करता नजर आया कि किसी तरह यह बड़ा टल जाए। आइए इस विस्तृत और सनसनीखेज रिपोर्ट के जरिए जानते हैं कि कैसे उस पांच घंटे के दौरान गोरखपुर प्रशासन ने एक बहुत बड़ी आपदा को अपनी सूझबूझ से टाल दिया और वहां क्या-क्या हालात बने रहे।

आधी रात का वह खौफनाक मंझर जब अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गया एथेनॉल टैंकर

यह पूरी घटना गोरखपुर जिले के एक प्रमुख मार्ग पर उस समय घटी जब चारों तरफ सामान्य आवाजाही चल रही थी। एक विशालकाय टैंकर, जो पूरी तरह से अत्यधिक ज्वलनशील और खतरनाक एथेनॉल केमिकल से लदा हुआ था, अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रहा था कि अचानक चालक ने वाहन से अपना नियंत्रण खो दिया। सड़क की बनावट या अचानक सामने आए किसी वाहन को बचाने के चक्कर में वह भारी-भरकम टैंकर असंतुलित हो गया और जोरदार धमाके के साथ सड़क किनारे पलट गया। टैंकर पलटते ही उसके भीतर भरा हजारों लीटर एथेनॉल तेजी से सड़क पर फैलने लगा और हवा में उसकी रासायनिक गंध इस कदर फैल गई कि लोगों का सांस लेना तक दूभर हो गया। स्थानीय लोगों ने जब उस बहते हुए केमिकल को देखा और उसकी तीव्र गंध महसूस की, तो उन्हें समझते देर नहीं लगी कि यह कोई साधारण पानी या तेल नहीं, बल्कि एक ऐसा विस्फोटक पदार्थ है जो हल्की सी आंच पाते ही पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले सकता था। डर के मारे आसपास के दुकानदारों और घरों में रहने वाले लोगों ने तुरंत अपने दरवाजे बंद कर लिए और सुरक्षित स्थानों की तरफ भागने लगे, जिससे उस पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।

लगातार पांच घंटे तक अटकी रहीं सांसें, प्रशासन ने की तत्काल इमरजेंसी की घोषणा

टैंकर के पलटने की सूचना मिलते ही गोरखपुर जिला प्रशासन, यातायात पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें साइरन बजाते हुए रिकॉर्ड समय में घटनास्थल पर पहुंच गईं। स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मौके पर मौजूद अधिकारियों ने तुरंत पूरे इलाके को सील कर दिया और दोनों तरफ के ट्रैफिक को पूरी तरह से रोक दिया गया। उस पांच घंटे के लंबे अंतराल में प्रशासन और राहत बचाव दलों की सांसें लगातार थमी रही थीं, क्योंकि एथेनॉल का वाष्पीकरण (Vaporization) इतनी तेजी से हो रहा था कि हवा में आग पकड़ने का खतरा हर सेकंड बढ़ता जा रहा था। दमकल विभाग की आधा दर्जन से अधिक गाड़ियों को तुरंत मौके पर तैनात किया गया और लगातार पानी तथा फोम की बौछार करके सड़क पर फैले एथेनॉल को ठंडा करने का काम शुरू किया गया ताकि किसी भी प्रकार की घर्षण या चिंगारी से आग न भड़क सके। जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के जरिए आसपास के लोगों को अपने घरों के अंदर ही रहने और बिजली की मुख्य सप्लाई को तुरंत बंद करने की सख्त हिदायत दी, ताकि कोई भी अनहोनी न हो सके।

बाल-बाल बचा गोरखपुर, विशेषज्ञों ने बताया कि क्यों इतना खतरनाक होता है एथेनॉल

इस भयानक हादसे के टलने के बाद जब विशेषज्ञों और इंजीनियरों ने अपनी जांच-पड़ताल की, तो उन्होंने यह चौंकाने वाला खुलासा किया कि यदि हवा का रुख थोड़ा सा भी विपरीत होता या उस दौरान कोई वाहन चालक लापरवाही से सिगरेट या बीड़ी पीते हुए निकल जाता, तो गोरखपुर में एक ऐसा औद्योगिक मंजर देखने को मिलता जिसकी कल्पना करना भी रूह कंपा देता है। एथेनॉल एक ऐसा पेट्रो-केमिकल उत्पाद है जिसका उपयोग उद्योगों और ईंधन के रूप में बड़े पैमाने पर किया जाता है, लेकिन इसकी ज्वलनशीलता पेट्रोल से भी कई गुना अधिक तेज होती है। यह तरल पदार्थ हवा के संपर्क में आते ही बहुत तेजी से गैस में बदलता है और अत्यधिक ज्वलनशील वातावरण तैयार कर देता है। इस दुर्घटना में टैंकर का मुख्य वॉल्व पूरी तरह से क्षतिग्रस्त नहीं हुआ था, वरना टैंक के अंदर मौजूद पूरा का पूरा हजारों लीटर एथेनॉल एक साथ सड़क पर फैल जाता और तब पांच घंटे क्या, पांच दिनों तक उस आग पर काबू पाना असंभव हो जाता। गनीमत यह रही कि टैंकर के चालक और खलासी इस हादसे में मामूली रूप से घायल हुए जिन्हें समय रहते अस्पताल पहुंचा दिया गया और किसी की जान का नुकसान नहीं हुआ।

सबक और प्रशासनिक सतर्कता: भविष्य के लिए खड़े हुए गंभीर सुरक्षा सवाल

गोरखपुर की इस सनसनीखेज घटना ने एक बार फिर से देश के हाईवे और शहरी सीमाओं से गुजरने वाले खतरनाक रसायनों और ज्वलनशील पदार्थों के परिवहन (Hazardous Material Transportation) को लेकर सुरक्षा मानकों पर बहुत बड़े और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या ऐसे टैंकरों की फिटनेस की जांच सही समय पर नहीं की जाती है? क्या घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों से गुजरने वाले इन केमिकल वाहनों के लिए कोई निश्चित समय-सारणी या सुरक्षित कॉरिडोर तय नहीं होना चाहिए? इस प्रकार के तमाम सवाल अब आम जनता और बुद्धिजीवियों के मन में उठ रहे हैं। प्रशासन ने अब इस मामले की गहराई से जांच के आदेश दे दिए हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि टैंकर की गति सीमा क्या थी और क्या चालक नशे की हालत में था या उसे झपकी आई थी। पांच घंटे के उस लंबे और तनावपूर्ण संघर्ष के बाद जब आखिरकार क्रेन की मदद से उस पलटे हुए टैंकर को सीधा करके सड़क से हटाया गया और यातायात को सुचारू किया गया, तब जाकर प्रशासन और स्थानीय नागरिकों ने चैन की सांस ली। यह घटना हमें यह सिखाती है कि आधुनिक औद्योगिक विकास के दौर में सुरक्षा नियमों के प्रति जरा सी भी कोताही कितने बड़े विनाश का कारण बन सकती है, और सतर्कता ही इस तरह के हादसों से बचने का एकमात्र अचूक उपाय है।

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