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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : भारतीय विमानन क्षेत्र से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। देश की सबसे बड़ी किफायती एयरलाइन, इंडिगो (InterGlobe Aviation) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पीटर अल्बर्स ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह बड़ा फैसला उस वक्त लिया गया है जब एयरलाइन पिछले तीन महीनों से गंभीर परिचालन चुनौतियों और उड़ान संकट से जूझ रही थी। अल्बर्स के जाने के बाद अब कंपनी के प्रबंध निदेशक राहुल भाटिया ने अंतरिम तौर पर कमान अपने हाथों में ले ली है।

परिचालन संकट और 4500 उड़ानें रद्द होने का दबाव

इंडिगो के लिए पिछला कुछ समय काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। दिसंबर के पहले सप्ताह में एयरलाइन को लगभग 4,500 उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं, जिससे देशभर के हजारों यात्री प्रभावित हुए थे। इस संकट के पीछे पायलटों के लिए लागू किए गए सख्त सरकारी नियमों और रोस्टर प्रबंधन में विफलता को मुख्य कारण माना जा रहा था। हालांकि एयरलाइन ने इस अव्यवस्था के लिए सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी थी, लेकिन परिचालन संबंधी इन खामियों ने कंपनी की साख पर सवाल खड़े कर दिए थे। अब माना जा रहा है कि पीटर अल्बर्स का इस्तीफा इसी दबाव का नतीजा है।

राहुल भाटिया की वापसी: 'पुरानी संस्कृति' को मजबूत करने पर जोर

इंटरग्लोब एविएशन के अध्यक्ष विक्रम सिंह मेहता ने स्पष्ट किया है कि नए प्रमुख की घोषणा होने तक राहुल भाटिया ही प्रबंधन का नेतृत्व करेंगे। मेहता ने कहा कि राहुल भाटिया की वापसी का उद्देश्य कंपनी की आंतरिक संस्कृति को फिर से मजबूत करना और परिचालन उत्कृष्टता को बढ़ाना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इंडिगो अपने ग्राहकों को भरोसेमंद और पेशेवर सेवा देने की अपनी प्रतिबद्धता को और गहरा करेगी। गौरतलब है कि राहुल भाटिया की इंटरग्लोब एंटरप्राइजेज, इंडिगो में 35.69 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ी शेयरधारक है।

इस्तीफे के बीच शेयर बाजार में इंडिगो की ऊंची उड़ान

हैरानी की बात यह है कि सीईओ के इस्तीफे की खबर के बावजूद मंगलवार को शेयर बाजार में इंडिगो (InterGlobe Aviation) के शेयरों में जबरदस्त उछाल देखा गया। बीएसई (BSE) के आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी के शेयर 3.46 प्रतिशत यानी 146.45 रुपये की बढ़त के साथ 4,475.25 रुपये पर बंद हुए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि शेयरों में यह तेजी कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों के कारण आई है, जिसका सीधा फायदा विमानन क्षेत्र को मिल रहा है।