क्या 2021 के यास तूफान जितना खतरनाक है अर्णब? झारखंड में अलर्ट, किसानों की बढ़ी टेंशन

क्या 2021 के यास तूफान जितना खतरनाक है अर्णब? झारखंड में अलर्ट, किसानों की बढ़ी टेंशन

साल 2021 में आए यास तूफान ने जिस तरह ओडिशा, पश्चिम बंगाल के साथ-साथ झारखंड के कोल्हान और संथाल परगना प्रमंडल में तबाही मचाई थी, उसकी यादें आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं। यास तूफान के दौरान झारखंड में लगातार 48 घंटे तक मूसलाधार बारिश हुई थी, जिससे नदियां उफान पर आ गई थीं, पुल-पुलिया बह गए थे और हजारों एकड़ में खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई थीं। मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात अर्णब की हवाओं की गति और समुद्र से नमी खींचने की क्षमता काफी हद तक यास तूफान जैसी ही दिखाई दे रही है। हालांकि, अर्णब का लैंडफॉल और उसकी दिशा में थोड़ा अंतर हो सकता है, लेकिन इसके असर से झारखंड के आसमान में घने बादल छाने, 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और कई जिलों में भारी से अति-भारी बारिश (Heavy to Very Heavy Rainfall) की प्रबल आशंका जताई गई है।

झारखंड के इन जिलों में मौसम विभाग का यलो और ऑरेंज अलर्ट जारी

चक्रवात अर्णब के संभावित प्रभाव को देखते हुए रांची मौसम केंद्र ने राज्य के कई पूर्वी और दक्षिणी जिलों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया है। पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर), पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा), सरायकेला-खरसावां, सिमडेगा, गुमला, खूंटी, रांची, बोकारो और संथाल परगना के दुमका व साहिबगंज जिलों में बारिश और वज्रपात (Lightning) की सबसे अधिक संभावना जताई गई है। जिला प्रशासनों को एहतियाती कदम उठाने और आपातकालीन सेवाओं को मुस्तैद रखने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। बिजली विभाग को भी निर्देश दिए गए हैं कि तेज हवाओं से पोल उखड़ने या तार टूटने की स्थिति में तुरंत मरम्मत कार्य शुरू किया जाए, ताकि ग्रामीण और शहरी इलाकों में लंबे समय तक ब्लैकआउट की स्थिति पैदा न हो।

खेत में खड़ी फसलों पर मंडराया संकट और किसानों की बढ़ी भारी चिंता

चक्रवात अर्णब की आहट ने झारखंड के किसानों की नींद पूरी तरह उड़ा दी है। यह समय राज्य में धान की फसल के पकने और कटाई के साथ-साथ रबी की शुरुआती फसलों जैसे दलहन, तिलहन और हरी सब्जियों की बोआई का होता है। ऐसे में अगर चक्रवात के कारण मूसलाधार बारिश होती है, तो खेतों में पानी भर जाएगा और पकी हुई धान की फसल टूटकर गिर जाएगी, जिससे दाने काले पड़ जाएंगे और सड़ने लगेंगे। सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जलजमाव की वजह से किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा, जिससे राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है।

कृषि वैज्ञानिकों की किसानों को सलाह और राहत-बचाव कार्य की सरकारी तैयारियां

मौसम के बिगड़ते मिजाज को देखते हुए बिरसा कृषि विश्वविद्यालय और राज्य कृषि विभाग ने किसानों के लिए आपातकालीन एडवाइजरी जारी की है। किसानों को सलाह दी गई है कि जिन फसलों की कटाई हो चुकी है, उन्हें तुरंत सुरक्षित और सूखे स्थानों पर पहुंचाएं। जो फसलें अभी खेतों में खड़ी हैं, वहां से पानी की निकासी (Drainage System) के उचित प्रबंध पहले से ही कर लें। साथ ही, कीट-व्याधि से बचाने के लिए किसी भी तरह के छिड़काव को बारिश थमने तक स्थगित कर दें। वहीं, राज्य सरकार ने एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को अलर्ट पर रखा है ताकि किसी भी आपात स्थिति, जलभराव या बिजली आपूर्ति बाधित होने पर तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सके।