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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर एक बार फिर सियासी पारा चढ़ गया है। इस बार किसी विपक्षी नेता ने नहीं, बल्कि सत्ताधारी एनडीए (NDA) के प्रमुख घटक दल 'हिंदुस्तान अवामी मोर्चा' (HAM) के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इस महत्वाकांक्षी नीति पर कड़े सवाल उठाए हैं। मांझी ने साफ शब्दों में कहा कि शराबबंदी होनी चाहिए, लेकिन जिस तरह से इसे लागू किया जा रहा है, वह गरीबों के लिए काल बन गया है।

मांझी ने नीतीश कुमार को दी ये 3 बड़ी 'नसीहत'

गया में मीडिया से बात करते हुए जीतन राम मांझी ने शराबबंदी कानून की तीन ऐसी खामियां गिनाईं, जो सीधे तौर पर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करती हैं:

1. छोटे लोग शिकार, बड़े तस्कर आजाद मांझी ने आरोप लगाया कि ज़मीनी स्तर पर पुलिस और अधिकारी उल्टा काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "नियमों के मुताबिक थोड़ी मात्रा में शराब पीने या ले जाने वालों को नहीं पकड़ना है, लेकिन हकीकत में गरीब और छोटे लोग ही पकड़े जा रहे हैं। वहीं, जो लोग लाखों लीटर की तस्करी कर रहे हैं, वे पैसे के दम पर बच निकलते हैं।"

2. बिहार का पैसा जा रहा बाहर (आर्थिक नुकसान) उन्होंने आर्थिक पहलू पर प्रहार करते हुए कहा कि बिहार में प्रभावी शराबबंदी नहीं होने के कारण शराब दूसरे राज्यों से तस्करी के जरिए लाई जा रही है। इससे बिहार की जनता का पैसा झारखंड, बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जा रहा है, जिससे बिहार की अर्थव्यवस्था को दोहरा नुकसान हो रहा है।

3. गरीबों की 'उम्र' घटा रही है जहरीली शराब मांझी का सबसे गंभीर आरोप गरीबों के स्वास्थ्य को लेकर था। उन्होंने कहा, "अमीर लोग तो 50 हजार रुपये की विदेशी शराब पी लेते हैं, लेकिन गरीब तबका विषैली शराब पीने को मजबूर है। विशेषकर मुसहर-भुइयां और अनुसूचित जाति के लोग जहरीली शराब के कारण बीमारियों का शिकार हो रहे हैं और उनकी आयु कम हो रही है।"

चौंकाने वाला आंकड़ा: 6 लाख मुकदमों में 4 लाख 'दलित'

केंद्रीय मंत्री ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि बिहार में शराबबंदी कानून के तहत दर्ज करीब 6 लाख मुकदमों में से 4 लाख मामले केवल अनुसूचित जाति के लोगों पर दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि मुकदमों के इस बोझ ने गरीब परिवारों को बर्बाद कर दिया है। मांझी ने अपने ही गांव के एक युवक का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे शराब के कारण वह गंभीर बीमारियों से जूझ रहा है।

सियासी उबाल: विधायकों के 'ब्लड टेस्ट' की मांग

बिहार विधानसभा में भी यह मुद्दा छाया हुआ है। आरएलएम (RLM) विधायक माधव आनंद द्वारा समीक्षा की मांग के बाद विवाद और बढ़ गया। इस बीच कांग्रेस के एक विधायक ने तो यहाँ तक कह दिया कि राज्य के सभी विधायकों का ब्लड टेस्ट होना चाहिए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

जीतन राम मांझी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और गृह मंत्री सम्राट चौधरी से अपील की है कि वे शराबबंदी कानून के इन दुष्प्रभावों पर गंभीरता से विचार करें और इसकी समीक्षा करें ताकि गरीबों को न्याय मिल सके।