दिल्ली में ब्रिक्स महाजुटान के बीच अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के अचानक मणिपुर पहुंचने से क्या है बड़ा संकेत
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति के गलियारों में इन दिनों भारत की राजधानी दिल्ली का राजनीतिक पारा अपने चरम पर है क्योंकि एक तरफ जहां दुनिया भर के प्रमुख देशों के नेता और प्रतिनिधि एक महत्वपूर्ण वैश्विक मंच यानी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली में जुटे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका का कूटनीतिक रुख दुनिया भर के रणनीतिकारों को हैरान कर रहा है। ऐसे संवेदनशील वक्त पर जब भारत की नजरें पूरी तरह से राजधानी दिल्ली में चल रही उच्चस्तरीय वैश्विक बैठकों पर टिकी थीं, भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gor) अचानक देश के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर की राजधानी इंफाल जा पहुंचे। दिल्ली के इस राजनीतिक महाकुंभ को छोड़कर किसी संवेदनशील पूर्वोत्तर राज्य का दौरा करना और वहां के राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री से मुलाकात करना महज एक साधारण कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसके पीछे अमेरिका की एक बड़ी भू-राजनीतिक सोच और भविष्य की रणनीतिक चाल छिपी हुई है, जिस पर अब दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों की पैनी नजरें गड़ गई हैं।
#दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन की हलचल और अमेरिकी राजदूत की पूर्वोत्तर यात्रा के मायने
एक तरफ जहां राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ब्रिक्स देशों के महाजुटान के जरिए वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) और वैकल्पिक आर्थिक व्यवस्थाओं पर गहन मंथन चल रहा है, वहीं अमेरिका का इस प्रकार पूर्वोत्तर भारत के संवेदनशील क्षेत्र में अपने शीर्ष राजनयिक को भेजना एक गहरा संदेश देता है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि अमेरिका यह स्पष्ट रूप से रेखांकित करना चाहता है कि उसकी भारत के साथ रणनीतिक और द्विपक्षीय साझेदारी केवल राष्ट्रीय राजधानी तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भारत के हर कोने, विशेषकर सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण पूर्वोत्तर क्षेत्र में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराने के लिए पूरी तरह से उत्सुक है। जब दुनिया के बाकी देश दिल्ली के मंच पर अपनी कूटनीतिक ताकत झोंक रहे थे, तब अमेरिकी राजदूत का इंफाल की धरती पर उतरना यह साबित करता है कि वाशिंगटन अब भारत के साथ क्षेत्रीय स्तर पर भी आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग के नए द्वार खोलने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है।
#मणिपुर पहुंचकर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने की मुख्यमंत्री और राज्यपाल से मुलाकात
अपने दो दिवसीय महत्वपूर्ण दौरे पर इंफाल पहुंचे अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सबसे पहले राज्य के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह और राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से अलग-अलग उच्चस्तरीय मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान दोनों पक्षों के बीच अमेरिका और मणिपुर के बीच आपसी संबंधों को प्रगाढ़ बनाने, पर्यटन क्षेत्रों में विकास करने और आर्थिक तथा व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देने पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री सचिवालय में हुई इस बैठक के बाद सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें मुख्यमंत्री से मणिपुर के विकास के विजन को सुनकर बेहद खुशी हुई। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिका और भारत आपसी आर्थिक संबंधों को किस प्रकार और अधिक ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने अमेरिकी राजदूत को आगामी 'मणिपुर संगाई फेस्टिवल' में शामिल होने के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया, जिसे अमेरिकी राजनयिक ने बहुत ही सकारात्मकता के साथ स्वीकार किया।
#ऐतिहासिक धरोहरों का दौरा और लोकटक झील में नौका विहार का आनंद
अपनी इस अनूठी और चर्चित यात्रा के दौरान अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने केवल राजनीतिक बैठकों तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने मणिपुर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को भी बहुत करीब से महसूस किया। यात्रा के पहले दिन उन्होंने पूर्ववर्ती मणिपुर साम्राज्य के ऐतिहासिक 'कंगला किले' का दौरा किया और वहां के प्राचीन इतिहास के बारे में जानकारी हासिल की। इसके अलावा, उन्होंने इंफाल के उस प्रसिद्ध और अनूठे 'ख्वाइरामबंद कैथल' बाजार का भी दौरा किया जो दुनिया भर में केवल महिलाओं द्वारा संचालित सबसे बड़े बाजार के रूप में जाना जाता है। इतना ही नहीं, अपनी यात्रा के अगले चरण में वे बिष्णुपुर जिले पहुंचे और पूर्वोत्तर भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की प्रसिद्ध 'लोकटक झील' की सुबह-सुबह सैर करते हुए वहां नौका विहार का आनंद भी उठाया। अमेरिकी राजदूत का यह सहज और खुला अंदाज यह दिखाता है कि अमेरिका पूर्वोत्तर के सामाजिक ताने-बाने और प्राकृतिक सुंदरता को अंतरराष्ट्रीय पटल पर एक सकारात्मक संदेश के रूप में पेश करना चाहता है।
#क्या अमेरिका इस कूटनीतिक कदम से पूर्वोत्तर में अपने पैर पसारना चाहता है
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका द्वारा पूर्वोत्तर राज्यों में इस प्रकार की उच्चस्तरीय कूटनीतिक पहुंच बढ़ाना केवल सामान्य कूटनीति का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसके पीछे भू-राजनीतिक समीकरण साधने की एक लंबी रणनीति भी शामिल है। म्यांमार की सीमा से सटे होने और दक्षिण पूर्व एशिया का प्रवेश द्वार होने के कारण पूर्वोत्तर भारत का यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से दुनिया की महाशक्तियों के लिए हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहा है। हालांकि, भारत सरकार ने हमेशा से यह स्पष्ट किया है कि पूर्वोत्तर में आंतरिक विकास और विदेशी संबंधों का संचालन पूरी तरह से राष्ट्रीय संप्रभुता के दायरे में होता है, लेकिन अमेरिका का इस क्षेत्र में व्यक्तिगत रुचि लेना यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में वाशिंगटन इस भू-भाग में अपनी आर्थिक और कूटनीतिक उपस्थिति को और ज्यादा मजबूत करने की जुगत में है।
#ब्रिक्स और अमेरिकी कूटनीति के इस खेल का भविष्य क्या होगा
एक तरफ जहां ब्रिक्स जैसे मंच पश्चिमी आधिपत्य को चुनौती देने और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत करने के लिए जाने जाते हैं, वहीं ठीक उसी समय अमेरिकी राजदूत का भारत के भीतरूनी और संवेदनशील हिस्सों का दौरा करना एक सोची-समझी कूटनीतिक चाल का हिस्सा प्रतीत होता है। यह इस बात का प्रमाण है कि वाशिंगटन अब पारंपरिक कूटनीतिक सीमाओं से बाहर निकलकर भारत के साथ हर मोर्चे पर अपने संबंधों को गहरा और व्यापक बनाने की नीति पर काम कर रहा है। दिल्ली के सम्मेलनों की चमक-दमक के बीच मणिपुर के शांत और प्राकृतिक परिवेश में अमेरिकी राजदूत की यह हलचल आने वाले समय में भारत-अमेरिका संबंधों के एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकती है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी रहेंगी।