Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की 'समृद्धि यात्रा' जब भोजपुर के आरा पहुंची, तो वहां का नजारा केवल विकास योजनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक गलियारों में एक 'पावरफुल मैसेज' भी दे गया। अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने जिस गर्मजोशी के साथ उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पीठ थपथपाई, उसने मंच से विपक्ष को एकजुटता का कड़ा संदेश दिया है। 'सब ठीक है न जी' का उनका सिग्नेचर स्टाइल और जनता का हाथ उठाकर समर्थन, इस कार्यक्रम का सबसे चर्चित हिस्सा बन गया।
2005 बनाम 2026: बदलते बिहार की तस्वीर
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत 2005 के पहले और बाद के बिहार की तुलना से की। उन्होंने याद दिलाया कि एक दौर वह था जब शाम ढलते ही लोग घरों से निकलने में डरते थे, लेकिन एनडीए सरकार ने 'कानून का राज' स्थापित किया।
शिक्षा की क्रांति: साइकिल योजना और स्कूल-कॉलेजों के विस्तार से बेटियों को शिक्षा की मुख्यधारा में जोड़ा गया।
स्वास्थ्य सेवाओं का जाल: 2006 से मुफ्त दवा और डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई। पहले केवल 6 मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढ़कर 12 हो चुके हैं।
रोजगार और सौर ऊर्जा पर मास्टर प्लान
नीतीश कुमार ने भविष्य के रोडमैप पर चर्चा करते हुए कहा कि बिहार अब उद्योगों के लिए तैयार है।
बंद चीनी मिलें: राज्य सरकार बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने के लिए जमीन उपलब्ध करा रही है।
सोलर मिशन: प्रदेश के 50 लाख घरों पर सोलर प्लेट लगाने का लक्ष्य है, ताकि जनता पर बिजली बिल का बोझ न पड़े।
मत्स्य पालन: मुख्यमंत्री ने गर्व से कहा कि आज बिहार मछली उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन चुका है।
महिला सशक्तिकरण: जीविका दीदियों की बढ़ती ताकत
महिला सुरक्षा और स्वावलंबन को अपनी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार पुलिस में महिलाओं की भागीदारी आज देश में सबसे अधिक है।
जीविका समूह: राज्य में 10 लाख 78 हजार से अधिक जीविका समूह सक्रिय हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुके हैं।
सामाजिक सौहार्द: कब्रिस्तान की घेराबंदी और मंदिरों की सुरक्षा के जरिए समाज के हर वर्ग के लिए सुरक्षित माहौल तैयार किया गया है।
वो पल, जो सुर्खियां बन गया...
भाषण के आखिरी पलों में मुख्यमंत्री का अंदाज पूरी तरह बदल गया। उन्होंने जनता की ओर देखते हुए मुस्कुराते हुए पूछा— "सब ठीक है न जी?" जिस पर भीड़ ने हाथ उठाकर जबरदस्त समर्थन दिया। इसके तुरंत बाद, मंच पर बैठते समय उन्होंने दोनों उपमुख्यमंत्रियों की पीठ थपथपाई। राजनीतिक विश्लेषक इसे एनडीए के भीतर अटूट तालमेल और आने वाले चुनावों के लिए एक 'शक्ति प्रदर्शन' के रूप में देख रहे हैं।




